तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेन से भी पटना से दिल्ली जाने में 12 घंटे से ज्यादा समय लगते हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब आप 5 घंटे से भी कम वक्त में पटना से दिल्ली जा सकेंगे। हाईस्पीड बुलेट ट्रेन से यह मुमकिन होने जा रहा है। बुलेट ट्रेन तेज रफ्तार यात्रा के मामले में फ्लाइट को टक्कर देगी। पटना से दिल्ली विमान से जाने में डेढ़ से दो घंटे लगते हैं। एक घंटा पहले एयरपोर्ट पहुंचना पड़ता है। एयरपोर्ट से निकलने में भी समय लगता है। वहीं, बुलेट ट्रेन आई तो बिहार के लोग 4 घंटे 41 मिनट में पटना से दिल्ली पहुंच सकेंगे। मंडे स्पेशल में पढ़िए, बुलेट ट्रेन बिहार के किन शहरों से चलेगी। इसकी कितनी रफ्तार होगी? बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जुड़ने से क्या फायदे मिलेंगे। 7 हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ेगा बिहार बिहार देश के 7 हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ने जा रहा है। इनमें दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी- सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे, पुणे – हैदराबाद, हैदराबाद- बेंगलुरु, हैदराबाद- चेन्नई और चेन्नई-बेंगलुरु शामिल हैं। दिल्ली से वाराणसी, पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन की परियोजना पर जल्द काम शुरू होगा। केंद्रीय बजट 2026-27 में इसकी घोषणा की गई थी। स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एनएचएसआरसीएल के अधिकारी की मानें तो इससे जुड़े DPR के लिए टेंडर किया गया है। काम अलॉट होना बाकी है। इसकी अनुमानित लंबाई 1550-1560 किमी है। बुलेट ट्रेन 320 km/h की रफ्तार से चलेगी। निमार्ण कार्य नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड करेगी। बिहार में बन सकते हैं बुलेट ट्रेन के 5 स्टेशन दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। देश के चार राज्यों में इसका नेटवर्क होगा। दिल्ली से लखनऊ और वाराणसी होते हुए ट्रेन बिहार आएगी। बिहार में इसका रुट बक्सर, आरा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज से होकर जाएगा। अब तक की जानकारी के अनुसार बिहार में बुलेट ट्रेन के 5 स्टेशन (बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार) बनाए जा सकते हैं। यूपी और बिहार के कई प्रमुख आर्थिक, धार्मिक और शैक्षणिक केन्द्रों को यह आपस में जोड़ेगा। मुंबई-अहमदाबाद की तर्ज पर बनेगा बुलेट ट्रेन नेटवर्क देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की तर्ज पर दिल्ली-सिलीगुड़ी रूट तैयार होगा। ट्रैक की डिजाइन स्पीड 350 किमी प्रति घंटे होगी। इस पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ेगी। जापानी कंपनी शिंकानसेन की टेक्नोलॉजी के अनुसार बिना गिट्टी वाला कंक्रीट ट्रैक इसके लिए तैयार होगा। इस तरह के ट्रैक को स्लैब ट्रैक कहते हैं। परंपरागत किस्म के रेलवे ट्रैक में पटरी और कंक्रीट के स्लीपर के नीचे छोटे-छोटे पत्थरों (गिट्टी) का उपयोग होता है। हाई स्पीड बुलेट ट्रेनों के लिए गिट्टी की जगह कंक्रीट के ठोस स्लैब का आधार तैयार किया जाता है। हाई स्पीड ट्रेन चलने पर गिट्टियों के उड़ने या खिसकने का खतरा रहता है, जिससे दुर्घटना का खतरा रहता है। ठोस कंक्रीट ट्रैक ट्रेन को पूरी स्थिरता देते हैं। ठोस और सटीक रूप से डिजाइन कंक्रीट स्लैब की वजह से ट्रेन में कंपन और आवाज भी काफी कम होती है, जिससे यात्रा आरामदायक होती है। अफसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़े अफसरों की नियुक्ति से जुड़ी अधिसूचना जारी हो गई है। प्रक्रिया चल रही है, एक माह के अंदर नियुक्ति कर ली जाएगी। अधिसूचना के अनुसार 3 ओएसडी और 3 एजीएम स्तर के अफसर दिल्ली से लेकर पटना, लखनऊ, वाराणसी में प्रोजेक्ट के काम देखेंगे। पटना में कहां होगा बुलेट ट्रेन स्टेशन पटना में बुलेट ट्रेन का स्टेशन फुलवारीशरीफ एम्स के आसपास हो सकता है। बिहटा की भी चर्चा है। यहां पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। इसके साथ ही एयरपोर्ट व औद्योगिक क्षेत्र से कनेक्टिविटी भी है। अभी भूमि अधिग्रहण की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। पहले सर्वे और DPR पूरी होगी, उसके बाद प्रभावित इलाके में जमीन की सूची तैयार होगी। 750 सीट वाली बुलेट ट्रेन चलेगी जानकारी है कि दिल्ली-पटना-सिलीगुड़ी रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन में 750 सीटें होंगी। अभी मुंबई-अहमदाबाद के बीच 731 सीटों वाली बुलेट चलाने की योजना है। बुलेट ट्रेन से बिहार को क्या फायदा होगा? अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन मॉडल क्या है? अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना जापान के शिंकानसेन मॉडल पर आधारित है। यही मॉडल अब दिल्ली-वाराणसी- पटना-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन के लिए भी आधार है। परियोजना को जापान की JICA और भारत की NHSRCL पूरा कर रही है। बिहार में बुलेट ट्रेन के सामने कौन सी बाधाएं हैं? केंद्र सरकार ने बुलेट ट्रेन के लिए बजट पास कर दिया है, लेकिन बिहार में भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही है। बिहार की आबादी काफी घनी है। लगभग 400 किमी लंबे हाई स्पीड ट्रैक के लिए काफी जमीन की जरूरत होगी। बिहार की जमीन काफी उपजाऊ है। ऐसे में बड़े पैमाने पर उपजाऊ या रिहायशी जमीन का अधिग्रहण करना होगा। बिहार में जब भी सरकार ने जमीन अधिग्रहण किया है मुआवजे पर किसानों के साथ तकरार और विरोध आम है। बिहार की भौगोलिक स्थिति की वजह से भी तकनीकी बाधाएं हैं। राज्य के कई इलाकों में नदियों के उफनाने से बाढ़ की स्थिति पैदा होती है। घनी आबादी वाले इलाके भी खूब हैं। ऐसे में एलिवेटेड ट्रैक बनाना और अन्य बुनियादी ढांचा तैयार करने में तकनीकी पेंच आएंगे।
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