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यूपी चुनाव 2027: सपा-कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर बढ़ी बयानबाजी, इमरान मसूद-इकरा हसन के बाद शिवपाल ने दिया बड़ा बयान

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
23 September 2026 12:52 PM 1 मिनट पठन 34 Views
यूपी चुनाव 2027: सपा-कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर बढ़ी बयानबाजी, इमरान मसूद-इकरा हसन के बाद शिवपाल ने दिया बड़ा बयान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की ओर से जल्द सीट बंटवारा तय करने की मांग के बाद सपा सांसद इकरा हसन ने प्रतिक्रिया दी। इसके बाद कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने इमरान मसूद के रुख का समर्थन किया। अब समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा है कि सीटों पर अंतिम फैसला दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे।

इमरान मसूद ने सीट बंटवारे को लेकर उठाया मुद्दा

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद पिछले कुछ समय से सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट शेयरिंग जल्द तय करने की बात कह रहे हैं।

उनका कहना है कि अगर दोनों पार्टियों को साथ चुनाव लड़ना है तो सीटों का बंटवारा समय रहते स्पष्ट होना चाहिए, ताकि उम्मीदवारों को चुनाव की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

मसूद ने यह भी कहा है कि अगर गठबंधन पर सहमति नहीं बनती है तो कांग्रेस अपनी तैयारी अलग से कर सकती है। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सीटों को लेकर भी अपना रुख सार्वजनिक रूप से रखा है।

इकरा हसन ने दिया जवाब

इमरान मसूद के बयानों पर कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी का मुकाबला करने की क्षमता अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा के पास है।

इकरा हसन ने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ने का फैसला करती है तो इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। उनके मुताबिक, गठबंधन बना रहता है तो दोनों दल साथ काम कर सकते हैं, लेकिन गठबंधन नहीं रहने की स्थिति में इसका असर कांग्रेस पर ज्यादा पड़ सकता है।

इकरा हसन के इस बयान के बाद सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस और तेज हो गई।

कांग्रेस ने इमरान मसूद के रुख का किया समर्थन

इकरा हसन के बयान के बाद कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम इमरान मसूद के समर्थन में सामने आए।

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि इमरान मसूद ने सीट बंटवारे को जल्द तय करने की बात कहकर गलत नहीं किया है। उनके मुताबिक, उम्मीदवारों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने के लिए सीटों पर समय रहते निर्णय होना जरूरी है।

कांग्रेस की ओर से सामने आए इस रुख से यह संकेत मिला कि पार्टी सीट शेयरिंग को लेकर जल्द स्पष्टता चाहती है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने भी इकरा हसन पर साधा निशाना

इकरा हसन के बयान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता असीम वकार ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इकरा हसन के राजनीतिक अनुभव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस के सहयोग से ही कई नेताओं को चुनावी लाभ मिला है।

उन्होंने इमरान मसूद के उस तर्क को भी दोहराया कि बीजेपी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि, ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक दावे हैं और इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

अब शिवपाल यादव ने साफ किया- फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा

सीट शेयरिंग विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

देवरिया दौरे के दौरान शिवपाल यादव ने कहा कि अलग-अलग नेताओं के बयान से सीटों का फैसला नहीं होगा। उनके मुताबिक, सीट शेयरिंग पर निर्णय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे।

शिवपाल के इस बयान से सपा की ओर से यह संदेश सामने आया कि सीटों का अंतिम निर्णय स्थानीय या राज्य स्तर के नेताओं की बयानबाजी से नहीं, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से होगा।

असली मुद्दा सीटों की संख्या और चुनावी क्षेत्र

सपा-कांग्रेस के बीच मौजूदा विवाद का मुख्य केंद्र सीटों का बंटवारा है। कांग्रेस चाहती है कि उसे चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त सीटें और समय मिले, जबकि सपा की ओर से सीटों को लेकर अंतिम फार्मूला अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच अपनी-अपनी दावेदारी है। ऐसे में किन सीटों पर कौन पार्टी उम्मीदवार उतारेगी, यह गठबंधन की बातचीत में महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।

इमरान मसूद और इकरा हसन क्यों चर्चा में?

इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय प्रमुख नेता हैं। मसूद सहारनपुर से कांग्रेस सांसद हैं, जबकि इकरा हसन कैराना से सपा सांसद हैं।

सीट शेयरिंग को लेकर दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने गठबंधन की बातचीत को पश्चिमी यूपी की राजनीति से जोड़ दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के बयानों को पूरे गठबंधन के अंतिम रुख के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि सीटों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होना है।

क्या गठबंधन पर असर पड़ेगा?

फिलहाल सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, लेकिन दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से गठबंधन खत्म करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

कांग्रेस की ओर से जल्द सीट बंटवारे की मांग और सपा की ओर से शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर फैसला होने की बात के बीच अब निगाहें दोनों पार्टियों की बातचीत पर हैं।

2027 के चुनाव से पहले सीटों का अंतिम फार्मूला तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों दल किन-किन विधानसभा क्षेत्रों में एक-दूसरे के साथ तालमेल करते हैं।

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