ITR भरने में देरी पड़ेगी भारी! 31 जुलाई की डेडलाइन चूके तो ₹5,000 तक का जुर्माना, जानिए पूरा नियम
अगर आपने अभी तक अपना Income Tax Return (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो अब देरी करना महंगा पड़ सकता है। निर्धारित समय सीमा के बाद भी रिटर्न दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ लेट फीस और अन्य नियम लागू होंगे।
नियमों के अनुसार, जिन करदाताओं की कुल आय निर्धारित सीमा से अधिक है, उन्हें समय पर ITR दाखिल नहीं करने पर ₹5,000 तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है। वहीं, कम आय वाले कुछ करदाताओं के लिए यह शुल्क ₹1,000 तक हो सकता है।
लेट ITR दाखिल करने पर क्या होगा?
- ₹1,000 से ₹5,000 तक लेट फीस लग सकती है।
- यदि टैक्स बकाया है तो उस पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।
- रिटर्न दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना भी अनिवार्य है।
- कुछ मामलों में नुकसान (Loss) को अगले वर्षों में Carry Forward करने का लाभ प्रभावित हो सकता है।
किन लोगों के लिए अलग डेडलाइन है?
कुछ श्रेणी के करदाताओं के लिए सामान्य 31 जुलाई की समय सीमा लागू नहीं होती। संशोधित नियमों के तहत कुछ गैर-ऑडिट मामलों में अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तक हो सकती है। संबंधित करदाताओं को अपनी पात्रता अवश्य जांचनी चाहिए।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय तक इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द ITR दाखिल कर देना चाहिए, ताकि तकनीकी दिक्कतों और अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।
FAQ
ITR लेट फाइल करने पर कितना जुर्माना लगता है?
आय के आधार पर ₹1,000 से ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है।
क्या डेडलाइन के बाद भी ITR दाखिल किया जा सकता है?
हाँ, लेकिन उसे बेलटेड रिटर्न माना जाएगा और नियमों के अनुसार लेट फीस लागू हो सकती है।
क्या ई-वेरिफिकेशन जरूरी है?
हाँ, रिटर्न दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
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