मेरठ में रवि गौतम का ऐलान: 30 अगस्त को कमिश्नरी पर महापंचायत, पूर्व पुलिस अधिकारियों की जांच की मांग
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में कलेक्ट्रेट गेट पर हुए बवाल से जुड़े मामले को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कमिश्नरी पार्क में पिछले सात दिनों से धरने पर बैठे रवि गौतम ने अब 30 अगस्त को कमिश्नरी पर महापंचायत करने का ऐलान किया है। रवि गौतम का कहना है कि केवल पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय के तबादले से मामला खत्म नहीं होगा। उन्होंने पूर्व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
सात दिन से जारी है धरना
रवि गौतम पिछले सात दिनों से कमिश्नरी पार्क में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
उनकी प्रमुख मांगों में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, कथित मारपीट की जांच और ललिता गौतम मामले में पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच शामिल है।
30 अगस्त को महापंचायत का ऐलान
रवि गौतम ने कहा है कि अपनी मांगों को लेकर 30 अगस्त को कमिश्नरी पर महापंचायत आयोजित की जाएगी।
उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों पर जवाब मांगना और कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करना है।
हालांकि, पुलिस-प्रशासन की ओर से महापंचायत को लेकर सक्रियता बढ़ा दी गई है। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने कहा कि पुलिस समाज के विभिन्न लोगों के संपर्क में है, ताकि महापंचायत न हो।
तबादले को बताया अधूरी कार्रवाई
रवि गौतम ने पूर्व एसएसपी अविनाश पांडेय के तबादले को पर्याप्त कार्रवाई मानने से इनकार किया है।
उनकी मांग है कि अविनाश पांडेय और एसपी देहात अभिजीत कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच कराई जाए। साथ ही दोनों अधिकारियों समेत कथित मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी की गई है।
ध्यान देने वाली बात है कि संपत्ति से जुड़े आरोप फिलहाल रवि गौतम की मांग और आरोपों के रूप में सामने आए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
ललिता गौतम मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा मामला मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र में दलित छात्रा ललिता गौतम की मौत के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है।
परिजनों का आरोप था कि मामले में अन्य लोग भी आरोपी हैं और उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर 8 जुलाई को अनुसूचित जाति के लोगों ने कलेक्ट्रेट गेट पर धरना-प्रदर्शन किया था। लगभग तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने जाम खुलवाने के लिए बल प्रयोग किया था।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा था विवाद
प्रदर्शन के दौरान तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय के बंदी वाहन के अंदर रवि गौतम को थप्पड़ मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया था।
इसी घटना को लेकर रवि गौतम अब संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों पर अन्य आरोप भी लगे
हाल के दिनों में मेरठ में पुलिस कार्रवाई को लेकर एक और विवाद सामने आया है। किसान नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिस अधिकारियों पर कथित मारपीट और यातना के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर भी प्रदर्शन और कार्रवाई की मांग की जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद मेरठ में पुलिस कार्रवाई और अधिकारियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हुई है।
पूर्व एसएसपी का तबादला हो चुका है
विवाद के बीच अविनाश पांडेय का तबादला कर दिया गया और उन्हें डीजीपी कार्यालय से संबद्ध किया गया। उनकी जगह बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ का नया एसएसपी बनाया गया है।
लेकिन रवि गौतम का कहना है कि केवल तबादला पर्याप्त नहीं है और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच होनी चाहिए।
पुलिस महापंचायत रोकने की कोशिश में
30 अगस्त को प्रस्तावित महापंचायत को लेकर पुलिस-प्रशासन ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे समाज के विभिन्न लोगों और प्रमुख व्यक्तियों से संपर्क कर रहे हैं, ताकि महापंचायत आयोजित न हो।
ऐसे में आने वाले दिनों में मेरठ में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर 30 अगस्त पर है। यदि महापंचायत होती है तो इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए पुलिस-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी।
वहीं रवि गौतम का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका धरना जारी रहेगा।
निष्कर्ष
मेरठ में ललिता गौतम मामले और उससे जुड़े पुलिस कार्रवाई विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। रवि गौतम ने 30 अगस्त को कमिश्नरी पर महापंचायत का ऐलान कर दिया है। वह पूर्व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच, प्राथमिकी और कथित मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर पुलिस-प्रशासन महापंचायत को रोकने के लिए विभिन्न पक्षों से बातचीत कर रहा है।
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