अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रशासनिक बदलाव के बीच पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा एक बार फिर सक्रिय नजर आए हैं। दोनों तीर्थ यात्री सेवा केंद्र पहुंचे और वहां काम कर रहे कर्मचारियों से मुलाकात की। यह चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद दोनों की इस केंद्र में पहली ऐसी सार्वजनिक गतिविधि बताई गई है।
करीब एक घंटे तक सेवा केंद्र में रहने के दौरान दोनों ने कर्मचारियों का हालचाल जाना। कर्मचारियों से बातचीत करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर किसी तरह की परेशानी या समस्या सामने आती है तो उन्हें इसकी जानकारी दी जाए।
नए महासचिव और CEO की नियुक्ति के बाद बदला माहौल
चंपत राय और अनिल मिश्रा की सक्रियता ऐसे समय में सामने आई है, जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हो चुका है।
ट्रस्ट ने महंत गोविंद देव गिरि को नया पूर्णकालिक महासचिव नियुक्त किया है। वहीं एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। CEO पद के लिए 5,585 आवेदन आने के बाद चयन प्रक्रिया के जरिए तीन नामों का पैनल तैयार किया गया था।
नए CEO के कामकाज के लिए आने वाले समय में SOP यानी मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जानी है, जिसमें उनकी जिम्मेदारियों और अधिकारों को स्पष्ट किया जाएगा।
चढ़ावा चोरी मामले के बाद दोनों ने दिया था इस्तीफा
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा पर भी सवाल उठे थे। मामले की जांच के बीच दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने बाद में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किया और अनिल मिश्रा ने भी ट्रस्टी पद छोड़ दिया।
हालांकि बाद की SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया। Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम रिपोर्ट में पहले गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के नाम थे।
इसलिए वर्तमान खबर में दोनों के खिलाफ किसी आपराधिक दोषसिद्धि का दावा करना उचित नहीं होगा।
SIT जांच में सामने आई थी चोरी की पुष्टि
चढ़ावा विवाद की शुरुआती जांच में मंदिर की दानराशि से जुड़ी अनियमितताओं की पुष्टि हुई थी। Live Hindustan की रिपोर्ट के मुताबिक प्रारंभिक जांच में बड़ी रकम की बरामदगी और नकदी को लेकर कई सवाल सामने आए थे। जांच के दौरान CCTV फुटेज और मंदिर की नकदी प्रबंधन व्यवस्था भी जांच के दायरे में आई थी।
इसके बाद मामला काफी चर्चा में आया और मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठे।
हटाए गए तीन कर्मचारियों की भी हुई वापसी
इसी प्रशासनिक बदलाव के बीच राम मंदिर की व्यवस्थाओं से पहले हटाए गए तीन कर्मचारियों की भी वापसी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार संदीप गुप्ता, केडी तिवारी और बजरंग पाठक को पुराने दायित्वों के साथ फिर से बहाल किया गया है। यह फैसला नए पूर्णकालिक महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के आने के बाद हुआ।
संदीप गुप्ता को तीर्थ यात्री सेवा केंद्र की लॉकर व्यवस्था से जुड़ी शिकायत के बाद हटाया गया था। वहीं केडी तिवारी और बजरंग पाठक को प्रसाद व्यवस्था और अन्य जिम्मेदारियों से जुड़े विवाद के बाद स्थानांतरित किया गया था।