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तौकीर रजा को इलाहाबाद HC से जमानत नहीं, ‘सर तन से जुदा’ नारे पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
8 September 2026 12:43 PM 1 मिनट पठन 276 Views
तौकीर रजा को इलाहाबाद HC से जमानत नहीं, ‘सर तन से जुदा’ नारे पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

तौकीर रजा की जमानत खारिज, ‘सर तन से जुदा’ नारे पर HC की कड़ी टिप्पणी

प्रयागराज/बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में सितंबर 2025 में हुई हिंसा से जुड़े मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता और अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार किया।

‘सर तन से जुदा’ नारे पर कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इसे ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’, ‘जो बोले सो निहाल’, ‘जय श्री राम’ या ‘हर हर महादेव’ जैसे धार्मिक उद्घोषों के समान नहीं माना जा सकता।

कोर्ट के मुताबिक, इन धार्मिक उद्घोषों का इस्तेमाल संबंधित धार्मिक आस्था, भगवान या गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए किया जाता है, जबकि ‘सर तन से जुदा’ नारे का स्वरूप अलग है। अदालत ने इसे कानून के अधिकार तथा भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती बताते हुए कहा कि यह लोगों को हिंसक विद्रोह की ओर उकसाने की क्षमता रखता है।

क्या है बरेली हिंसा का मामला?

यह मामला 26 सितंबर 2025 को बरेली में हुई हिंसा से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में एकत्र होने का आह्वान किया गया था। प्रशासन ने बड़े जमावड़े को लेकर रोक संबंधी आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद भीड़ के आगे बढ़ने और पुलिस द्वारा उसे रोकने के दौरान स्थिति बिगड़ गई।

अभियोजन का आरोप है कि इस दौरान भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके और गोलीबारी भी हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इन आरोपों के आधार पर तौकीर रजा को मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया।

तौकीर रजा की तरफ से क्या दलील दी गई?

तौकीर रजा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह हिंसा वाली जगह पर मौजूद नहीं थे। उनके पक्ष ने कहा कि उन्हें घटना के दिन घर में सीमित रखा गया था और उन्होंने हिंसा भड़काने वाला कोई भाषण या अपील नहीं की थी।

हाईकोर्ट के आदेश में यह तथ्य भी दर्ज किया गया कि तौकीर रजा घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। हालांकि, अदालत ने मामले में उनके द्वारा पहले लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में एकत्र होने के लिए किए गए आह्वान और घटना के बाद उनके कथित भाषण को भी अपने विचार में लिया।

कोर्ट ने हिंसा के बाद के व्यवहार का भी किया जिक्र

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि घटना के बाद तौकीर रजा द्वारा कथित तौर पर भीड़ के बड़ी संख्या में पहुंचने पर धन्यवाद देने और उनके कृत्यों की प्रशंसा करने वाला भाषण भी अदालत के सामने विचार का विषय था। कोर्ट ने इस व्यवहार को भी स्वीकार्य नहीं माना।

जमानत क्यों नहीं मिली?

अदालत ने मामले की गंभीरता, हिंसा के आरोपों और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को देखते हुए तौकीर रजा को इस चरण पर जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल ऐसे कथित आह्वान या नारों को संरक्षण देने के लिए नहीं किया जा सकता, जिनसे कानून-व्यवस्था को खतरा पैदा हो।

क्या कोर्ट ने ‘जय श्री राम’ और ‘सर तन से जुदा’ की तुलना को खारिज किया?

हां। इस मामले की सबसे चर्चित टिप्पणी यही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘सर तन से जुदा’ नारे को ‘जय श्री राम’, ‘हर हर महादेव’ या ‘अल्लाहु अकबर’ जैसे धार्मिक उद्घोषों के समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने इन नारों के अर्थ और उद्देश्य में अंतर बताया।

अब तौकीर रजा के लिए आगे क्या?

जमानत याचिका खारिज होने के बाद इस मामले में तौकीर रजा को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। मामले की आपराधिक कार्यवाही आगे जारी रहेगी और आरोपों का अंतिम निर्धारण ट्रायल तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होगा। जमानत खारिज होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है।

बरेली हिंसा मामले में आगे भी कानूनी लड़ाई जारी

बरेली हिंसा मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। हाईकोर्ट के सामने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार के दौरान भीड़ के जमावड़े, पुलिस पर हमले, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और कथित भड़काऊ नारों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

इस फैसले से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तौकीर रजा को जमानत देने से इनकार किया है और कथित ‘सर तन से जुदा’ नारे को कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के संदर्भ में गंभीर माना है।

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