बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के सिकंदराबाद इलाके से एक बुजुर्ग दंपति की पारिवारिक कहानी सामने आई है। 75 वर्षीय पति और 70 वर्षीय पत्नी अपने ही चार बेटों के बीच अलग-अलग रहने लगे। दो बेटे मां के साथ रहने लगे, जबकि दो बेटों ने पिता की जिम्मेदारी संभाली। लंबे समय तक अलग रहने के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया और मामला पुलिस की महिला सेल तक पहुंच गया।
चार बेटों के बीच ऐसे अलग हुए मां-बाप
सिकंदराबाद क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले इस दंपति के चार बेटे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पति जिन बेटों के साथ रहना चाहते थे, पत्नी उनके साथ रहने को तैयार नहीं थीं। वहीं पत्नी जिन दो बेटों के साथ रहना चाहती थीं, पति उनके साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुए।
धीरे-धीरे परिवार में यह स्थिति बन गई कि दो बेटे अपनी मां के साथ रहने लगे और बाकी दो बेटे पिता के साथ रहने लगे। इस तरह पति-पत्नी भी अलग-अलग रहने लगे।
विवाद बढ़ा तो मामला थाने तक पहुंचा
अलग-अलग रहने के बाद पति-पत्नी के बीच दूरियां और बढ़ती गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के बीच कई बार विवाद हुआ और मामला मारपीट तक भी पहुंचा। इसके बाद पति अपनी पत्नी और उनके साथ रहने वाले दोनों बेटों से नाराज हो गए और उनसे मिलना-जुलना भी बंद कर दिया।
वहीं पत्नी अपने दोनों बेटों के साथ रहने लगीं। समय बीतने के साथ उनकी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ीं और इलाज के साथ रोजमर्रा के खर्च की जरूरत भी सामने आई।
इलाज के लिए पति से मांगी आर्थिक मदद
70 वर्षीय सत्यवती की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उनके साथ रहने वाले दोनों बेटे इलाज और अन्य खर्च आसानी से उठा सकें। इसके बाद उन्होंने अपने पति से आर्थिक मदद मांगी।
महिला की शिकायत के बाद मामला पुलिस की महिला सेल तक पहुंचा। पुलिस ने दोनों बुजुर्गों को बुलाकर बातचीत की और पुराने विवाद को सुलझाने की कोशिश की।
महिला सेल ने साथ रहने की कोशिश की
महिला सेल की काउंसलिंग के दौरान पति-पत्नी और उनके चारों बेटों को समझाने की कोशिश की गई। पुलिस की कोशिश थी कि परिवार फिर से एक साथ रहे और बुजुर्ग दंपति अपने जीवन के इस पड़ाव पर एक-दूसरे का सहारा बनें।
हालांकि, लंबे समय से चले आ रहे विवाद और आपसी मतभेद के कारण दोनों पति-पत्नी दोबारा एक साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने आर्थिक मदद के जरिए विवाद का समाधान निकालने की कोशिश की।
पति हर महीने देंगे ₹5000
महिला सेल की प्रभारी अलका चौधरी के मुताबिक, काउंसलिंग के बाद बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को हर महीने ₹5,000 गुजारा भत्ता देने के लिए तैयार हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार, उस समय महीने के 15 दिन बीत चुके थे, इसलिए अगले 15 दिनों के खर्च के लिए ₹2,700 दिए गए। इसके बाद अगले महीने से पत्नी को नियमित रूप से ₹5,000 प्रति माह देने पर सहमति बनी।
साथ रहने पर नहीं बनी सहमति
पुलिस और महिला सेल ने पति-पत्नी को साथ रहने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद यह तय हुआ कि दोनों अलग-अलग रहेंगे और पति अपनी पत्नी के खर्च में हर महीने आर्थिक मदद करेंगे।
इस तरह पुलिस की मध्यस्थता के बाद पत्नी के इलाज और गुजारे के लिए आर्थिक सहायता का रास्ता निकला और मामले का औपचारिक निस्तारण किया गया।
परिवार के रिश्तों पर उठे सवाल
यह मामला बुजुर्ग माता-पिता की पारिवारिक स्थिति को लेकर चर्चा में है। जिस उम्र में माता-पिता को अपने बच्चों और जीवनसाथी के सहारे की जरूरत होती है, उस समय इस दंपति का अलग-अलग रहना परिवार के भीतर लंबे समय से चले आ रहे विवाद को दिखाता है।
फिलहाल पुलिस की काउंसलिंग के बाद पति द्वारा पत्नी को हर महीने ₹5,000 देने पर सहमति बन गई है। दोनों के दोबारा एक साथ रहने पर सहमति नहीं बनी है।