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उत्तर प्रदेश में जैविक खेती से किसानों की लागत घटी, बढ़ा मुनाफा; चित्रकूट के किसानों ने बदली खेती की राह

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
18 September 2026 9:59 AM 1 मिनट पठन 286 Views
उत्तर प्रदेश में जैविक खेती से किसानों की लागत घटी, बढ़ा मुनाफा; चित्रकूट के किसानों ने बदली खेती की राह

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश में खेती की बढ़ती लागत के बीच चित्रकूट के कई किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। महंगी रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बजाय किसान गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट और प्राकृतिक तरीके से तैयार किए गए कृषि इनपुट का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इससे खेती में होने वाला खर्च कम हुआ है और फसल की गुणवत्ता के साथ बाजार में मिलने वाली कीमत में भी सुधार देखने को मिला है।

रासायनिक खाद के बढ़ते खर्च से परेशान किसान

खेती में खाद, कीटनाशक और खरपतवारनाशक पर होने वाला खर्च किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में चित्रकूट में कुछ किसानों ने खेती का तरीका बदलते हुए जैविक और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना शुरू किया है।

जैविक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जगह गोबर की खाद, कंपोस्ट, हरी खाद, जैविक खाद, बायो-पेस्टीसाइड और दूसरे जैविक एजेंटों का इस्तेमाल किया जाता है।

2022 से जैविक खेती कर रहे नत्थूराम

चित्रकूट के बैहार गांव के किसान नत्थूराम ने 2022 में जैविक खेती शुरू की थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने झांसी के चिरगांव राजकीय कृषि विद्यालय में तीन दिवसीय प्रशिक्षण भी लिया था।

समय के साथ उन्होंने रबी और खरीफ दोनों फसलों के साथ बागवानी को भी अपनी खेती में शामिल किया। रिपोर्ट के अनुसार, वह करीब 18 बीघे में खेती और फलदार पौधों की बागवानी कर रहे हैं और इससे उन्हें सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपये का मुनाफा होने की जानकारी दी गई है।

किसान ने बताया- ‘जीरो बैलेंस की खेती’

मानिकपुर तहसील के बरहट गांव के किसान कोठारी सिंह पटेल ने भी 2023 में जैविक खेती शुरू की। उन्होंने धान, अरहर और ज्वार जैसी फसलों की खेती की।

कोठारी सिंह पटेल जैविक खेती को ‘जीरो बैलेंस की खेती’ बताते हैं। उनके मुताबिक इसमें मुख्य खर्च की जगह मेहनत अधिक लगती है। वह अपने परिवार के लिए अनाज रखने के बाद बची उपज को बाजार में बेचते हैं। उनके अनुसार, उन्हें पारंपरिक रासायनिक खेती की तुलना में जैविक खेती से ज्यादा फायदा हुआ है।

खराब जमीन को फिर से खेती योग्य बनाने की कोशिश

चित्रकूट के प्रगतिशील किसान योगेश जैन भी प्राकृतिक और जैविक खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक जिस जमीन पर उन्होंने काम शुरू किया था, वह लंबे समय तक रासायनिक खेती के कारण खराब हो गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पशुपालन के साथ गोबर और गौमूत्र से जैविक खाद तैयार की और खेतों में उसका इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक धीरे-धीरे जमीन की उर्वरता में सुधार हुआ और इसके बाद उन्होंने रबी और खरीफ फसलों का उत्पादन शुरू किया।

सरकार भी प्राकृतिक खेती को दे रही बढ़ावा

चित्रकूट के कृषि उप निदेशक जीत लाल गुप्ता के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 में चित्रकूट में 25 क्लस्टर बनाने और 3,125 किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को जागरूक करने के लिए विभागीय गोष्ठियां भी आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को विभाग की ओर से 2,000 रुपये के अनुदान की जानकारी दी गई है।

केंद्र सरकार की जानकारी के मुताबिक नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, पर्यावरणीय संतुलन और खेती की लागत कम करने में मदद करना है। 5 मार्च 2026 तक इस मिशन के तहत 18,786 क्लस्टर और 18.19 लाख नामांकित किसानों की जानकारी सरकार ने दी थी।

शुरुआत में उत्पादन कम हो सकता है, बाद में सुधार की उम्मीद

कृषि विभाग के अनुसार, प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाने के शुरुआती चरण में उत्पादन में कमी आ सकती है। हालांकि, लगातार जैविक खाद और प्राकृतिक इनपुट के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता में सुधार होने के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना बताई गई है।

इस वजह से जैविक खेती को तुरंत ज्यादा उत्पादन हासिल करने के बजाय लंबी अवधि में मिट्टी और लागत प्रबंधन के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

जैविक उत्पादों की मांग से किसानों को बाजार में फायदा

जैविक खेती से तैयार उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार तलाशने का अवसर भी मिल रहा है। हालांकि, बेहतर कीमत हर किसान या हर फसल के लिए निश्चित नहीं होती और यह गुणवत्ता, प्रमाणन, स्थानीय बाजार तथा मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

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