हनुमान अंश मूवी का गीत ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डाल दई…’ इन दिनों लोगों की जुबान पर है। इसकी रिलीज के बाद से चर्चा में आए सिंगर नेत्रहीन सुनील लोधी इसे हनुमान जी की कृपा बता रहे हैं। बोले कि मोरे संकट के कटइया ने मेरी जिंदगी बदल दी। मध्यप्रदेश के सागर जिले के अगरा गांव निवासी सुनील जन्म से दृष्टिबाधित हैं। उन्होंने 9 साल की उम्र में गांव के बुजुर्गों के साथ बैठकर तंबूरा बजाना सीखा था। इसके बाद बुंदेली लोकगीत और भजन गाने का सिलसिला शुरू हुआ। सुनील का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी आवाज इतनी दूर तक पहुंचेगी। वह इस सफलता को हनुमान जी की कृपा मानते हैं। दैनिक भास्कर ने लोकगीत गायक सुनील लोधी से उनके संगीत के सफर और इस मुकाम को हासिल करने को लेकर बातचीत की। पढ़िए इस रिपोर्ट में… गांव में बुंदेली लोकगीत गाते हुए मामा ने रिकार्ड किया था सुनील बताते हैं कि उनके संगीत सफर में सबसे बड़ा मोड़ ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ भजन से आया। इसमें उनके मामा रोहित साहू का अहम योगदान रहा। उन्होंने सुनील को गांव में बुंदेली लोकगीत गाते हुए रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर वीडियो डालना शुरू किया। सुनील के मुताबिक, रोहित साहू वर्ष 2019 से उनके गाए लोकगीत सोशल मीडिया पर डाल रहे थे। धीरे-धीरे लोगों का ध्यान उनकी आवाज की ओर गया और ‘मोरे संकट के कटैया’ ने उनकी पहचान बना दी। इस भजन को सोशल मीडिया पर करोड़ों व्यूज मिले और इसी के बाद सुनील की आवाज मुंबई तक पहुंची। उन्होंने कहा ‘मामा मेरे गांव से ही करीब 6 किलोमीटर दूर तालचिर गांव में रहते हैं। उन्होंने ही साल 2019 से सोशल मीडिया पर मेरे गाए हुए लोकगीतों को डालना शुरू किया था। अब जो सफलता मेरे पास है, उसके लिए मैं इन्हें ही ‘संकट कटैया’ कहता हूं, क्योंकि मुझे तो बचपन से ही कुछ भी दिखाई नहीं देता है।’ उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने उन्हें बुलाया और उनका गीत भी सुना। उन्होंने उनके उपचार के लिए भी कहा था। ‘अब मैं यहां आया हूं तो मेरा मन मुख्यमंत्री योगी जी से भी मिलने का है। मेरी आवाज अगर योगी जी तक पहुंच जाए और अगर वे मुझे बुला लें तो यह मेरा सौभाग्य होगा।’ अब पढ़िए सवाल-जवाब के अंश… सवाल: जीवन में संगीत के सफर की शुरुआत कैसे हुई? जवाब- मैंने बुंदेलखंड गीतों में बहुत काम किया है। सोना कैसट, बुंदेलखंडी वाइनट और ऐसे तमाम गाने गाए हैं। लेकिन मेरे सफर में सबसे बड़ा योगदान ‘मोरे संकट के कटैया’ का रहा। इसमें रोहित मामा का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने हमारे बुंदेलखंड गीत गाते समय एक वीडियो शूट करके डाला था। इसी से पहचान मिली लोगों ने रोहित मामा से संपर्क किया और बताया कि वह मेरी रिकॉर्डिंग करना चाहते हैं। इसके बाद ‘मोरे संकट के कटैया’ से मेरी पहचान बनती चली गई। सवाल: आपने संगीत कैसे सीखा? जवाब: 9 साल की उम्र से ही मैंने बुजुर्गों के साथ बैठकर जब वो तंबूरा बजाते थे, तो सीखना शुरू कर दिया। इसके बाद फिर वहीं से संगीत की तरफ झुकाव बढ़ा। इसके बाद यहीं से गीत गाने का भी मन हुआ। इसमें बुजुर्गों और पुराने कलाकारों का भी योगदान है। दादी-दादा और बुजुर्गों के मुंह से हमने बहुत कुछ सुना है। मैं लता दीदी को चरणों में बार-बार नमन करता हूं। उनके गानों के म्यूजिक, स्टारमेकर और यूट्यूब पर उपलब्ध गानों से मैंने काफी सीखा। अनुराधा पौडवाल दीदी, लता दीदी और दूसरे तमाम कलाकारों के गाने सुनकर अंदाजा लगाया कि गाना किस तरह गाना चाहिए। सोनू निगम , कुमार सानू जैसे कलाकारों के गाने भी मैंने खूब गाए। उनके गानों की नकल करते-करते संगीत की समझ विकसित हुई। गाने गाने से मुझे प्रोत्साहन भी मिला और एक भरोसा आया कि शायद एक दिन मैं सफल हो सकता हूं। सवाल: आप हनुमान जी के भक्त हैं। उनके लिए आपने कौन-कौन से गीत गाए हैं? जवाब: मैंने हनुमान जी पर कई गीत गाए हैं। एक गीत की पंक्तियां हैं सुनिए… ‘अरे अंजनी पुत्र केसरी नंदन, तुम जग-जग के काटत बंधन। तुम्हरे हृदय बसे रघुनंदन, कि तुम्हरे हृदय में बैठे सीताराम।’ इसके अलावा ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु’ भी गाया है। सवाल: आप बचपन से देख नहीं सकते। क्या कभी हनुमान जी की प्रतिमा को उनके स्वरूप को महसूस किया है? जवाब- जब कोई गाना गाता हूं, सुर लगाता हूं या रियाज करता हूं, तो अंदर से एक शक्ति मिलती है कि ‘हां, करो… करते जाओ।’ मुझे लगता है कि ये उनकी ही कृपा है। मैं मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति को देख तो नहीं सकता, लेकिन हाथ से स्पर्श करके महसूस कर सकता हूं। ऐसा लगता है कि हमारे हनुमान जी महाराज पूरे सिंदूर में लीन रहते हैं। इन सब चीजों से मन में एक आश्वासन आया और मैं गाता चला गया। सवाल: आप एमपी के सीएम से मिल चुके हैं। क्या आप सीएम योगी जी से मिलना चाहते हैं? जवाब- हां, मैं योगी जी से मिलना चाहता हूं। शायद मेरी आवाज योगी जी तक पहुंच जाए तो बहुत अच्छा होगा। मेरे दर्शक भी मेरी आवाज उन तक पहुंचा सकते हैं। अगर योगी जी मुझे बुला लें, मेरा गीत सुन लें तो यह मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य होगा। सवाल: ‘हनुमान अंश’ की शूटिंग के दौरान क्या आपको पता था कि आप किस फिल्म के लिए गाना गा रहे हैं? जवाब- नहीं जब मैं गाना गाने गया था, तब मैं वहां के लोगों को नहीं जानता था। मैंने पहले भी बताया है कि हम लोग वर्सोवा गए थे। वहां हमने एक पोस्ट डाली थी। उसी पोस्ट के जरिए हमारे डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी जी से मुलाकात हुई। इसके बाद मैंने गाना गाया और वहां से वापस आ गया। उस समय ज्यादा परिचय नहीं था। बाद में जब फिल्म चली तो पता चला कि फिल्म के डायरेक्टर हमारे विशाल चतुर्वेदी जी ही थे।
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