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इकलौते बेटे का शव पहुंचा औरैया:अर्थी देख चारों बहनें फूट-फूटकर रोईं, इकलौते बेटे की मौत से अनजान है मां

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
8 September 2026 7:27 PM 1 मिनट पठन 121 Views
इकलौते बेटे का शव पहुंचा औरैया:अर्थी देख चारों बहनें फूट-फूटकर रोईं, इकलौते बेटे की मौत से अनजान है मां

दिल्ली हॉस्टल हादसे में जान गंवाने वाले औरैया के पवन का शव सोमवार को घर पहुंचा। वह रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह के इकलौते बेटे थे। पवन उन छह छात्रों में शामिल था, जिनकी दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने से मौत हुई। शव देखते ही चारों बहनें फूट-फूटकर रोने लगीं। पिता विशंभर सिंह गम में डूबे रहे। वहीं, मां मीरा देवी बार-बार बेटे का चेहरा देखने के लिए बेचैन होती रहीं। परिवार की स्थिति देखकर वहां मौजूद रिश्तेदार और मोहल्ले के लोग भी भावुक हो गए। पवन रक्षाबंधन पर घर आया था। चारों बहनों ने उसे राखी बांधी थी। परिवार ने साथ मिलकर जन्माष्टमी भी मनाई। इसके बाद शनिवार को पवन दिल्ली के लिए रवाना हुआ। वहां पहुंचने के अगले ही दिन हॉस्टल की इमारत गिर गई। जिस भाई को बहनों ने हंसते हुए विदा किया था, सोमवार रात उसी का शव घर पहुंचा। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। दिल्ली में रह रही बहन प्रियांशी सूचना मिलते ही हॉस्टल पहुंची और काफी देर तक भाई को तलाशती रही। देर रात उसकी मौत की जानकारी मिली। मां से रोज वीडियो कॉल, रविवार को फोन नहीं आया तो घबरा गईं पवन की रोज सुबह-शाम मां से वीडियो कॉल पर बात होती थी। शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद भी उसने मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। रविवार सुबह भी बातचीत हुई, लेकिन शाम को पवन का फोन नहीं आया। हर दिन बेटे से बात करने वाली मां को जब फोन नहीं आया तो वह परेशान हो गईं। बाद में परिवार को हॉस्टल हादसे की जानकारी मिली। सोमवार सुबह पिता अपनी बेटी के साथ दिल्ली गए। पोस्टमार्टम के बाद देर रात पवन का शव लेकर घर लौटे। 20 जुलाई को DU में लिया था दाखिला, कंप्यूटर साइंस पढ़ रहा था पवन ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज दिबियापुर से इंटर की पढ़ाई पूरी की थी। 20 जुलाई को ही उसका दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला हुआ था। बेहतर भविष्य का सपना लेकर उसने दिल्ली में पढ़ाई शुरू की थी। महज करीब दो महीने में ही उसका यह सफर खत्म हो गया। उसकी बहन प्रियांशी भी पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर गर्ल्स हॉस्टल में रह रही है। इसी वजह से परिवार का दिल्ली से पहले से जुड़ाव था। चार बहनों का इकलौता भाई था, घर की खुशियां छिन गईं पवन चार बहनों के बीच इकलौता भाई था। बहनों के लिए वह परिवार का सहारा और खुशियों का केंद्र था। रक्षाबंधन पर चारों बहनों ने जिस भाई की कलाई पर राखी बांधी थी, उसी की अर्थी अब घर से उठने वाली है। पवन की मां मीरा देवी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती। परिवार को आशंका है कि बेटे की मौत की खबर उनकी हालत और बिगाड़ सकती है। इसलिए उन्हें अभी तक पवन की मौत के बारे में नहीं बताया गया है। रिश्तेदार लगातार घर पहुंच रहे हैं। जिस परिवार में कुछ दिन पहले बेटे के दिल्ली जाकर पढ़ाई करने और भविष्य बनाने की बातें हो रही थीं, वहां अब हर तरफ मातम है।

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