13 अप्रैल 1919 का वह दिन भारतीय इतिहास में केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के जागरण का वह निर्णायक क्षण है जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा प्रदान की। बैसाखी का उत्सव उस दिन शहादत और स्वाभिमान की अमर गाथा में परिवर्तित हो गया।
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