नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर गठित SIT की जांच पड़ताल के बीच पुलिस कमिश्नर ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। SIT के कार्यों के साथ ही अब तक मिली शिकायतों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही भ्रष्टाचार की शिकायतें नगर आयुक्त के साथ ही जांच की संस्तुति के साथ विजिलेंस और एंटी करप्शन डिपार्टमेंट को भेजी जाएंगी। दो ठेकेदार अब तक हो चुके गिरफ्तार नगर निगम में ठेकेदारों की पूलिंग, कमीशन व भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पुलिस ने लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में रंगदारी के आरोप में ठेकेदार रज्जन बाजपेई व संदीप जैन को जेल भेजा गया था, जबकि ठेकेदार गोविंद शर्मा ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी स्टे ले रखा है। मामले की जांच SIT कर रही है। ठेकेदारों और कर्मचारियों के बयानों में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो आने वाले समय में बड़ी कार्रवाई की ओर इशारा कर रहे हैं। इसी बीच शनिवार को नगर आयुक्त का पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र वायरल हो गया। इस पत्र में नगर आयुक्त ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विभागीय शिकायत पर कार्रवाई न करने और कर्मचारियों को बेवजह परेशान न करने को कहा है। इस मामले में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा कि नगर आयुक्त का पत्र मिला है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर को शिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। फर्जी नाम वाली शिकायतों को शपथ पत्र लेकर समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभागीय शिकायतें सीधे नगर आयुक्त को भेजने को कहा गया है। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें नगर आयुक्त, एंटी करप्शन और विजिलेंस विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। SIT को निर्देश दिए गए हैं कि जांच के दौरान सीधे कर्मचारियों को नोटिस जारी न करें। आवश्यकता पड़ने पर नगर आयुक्त के माध्यम से उन्हें बयान दर्ज करने के लिए बुलाया जाएगा। अपराधिक शिकायतों की जांच करेगी पुलिस पुलिस कमिश्नर को भेजे गए पत्र में हाईकोर्ट के जिस आदेश का हवाला दिया गया है, वह सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी नाम पते से की गई शिकायतों पर सीधे कार्रवाई न करने की बात कहता है। ऐसे में पुलिस अब शिकायत आने पर शपथपत्र लेकर अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी। अगर शिकायतकर्ता का नाम पत्र फर्जी है, तो उसे समाप्त कर देगी। हालांकि अपराधिक शिकायतों पर पुलिस की जांच पूर्व की तरह चलती रहेगी।
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