बीसवीं सदी के दो विश्वयुद्धों और हिरोशिमा-नागासाकी की त्रासदी ने मानवता को विश्वास दिलाया था कि शायद अब ‘युद्ध’ इतिहास की बात बन जाएंगे, किंतु इक्कीसवीं सदी में ऐसा नहीं हुआ।
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बीसवीं सदी के दो विश्वयुद्धों और हिरोशिमा-नागासाकी की त्रासदी ने मानवता को विश्वास दिलाया था कि शायद अब ‘युद्ध’ इतिहास की बात बन जाएंगे, किंतु इक्कीसवीं सदी में ऐसा नहीं हुआ।
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