कानपुर शहर की खराब सड़कों और जगह-जगह गड्ढों को लेकर सोशलमीडिया पर वीडियों बनाए जा रहें है, जिसमें आम जनता सड़क की बदहाली से जूझती हुई नजर दिखाई दे रही है। तो वहीं सियासी हमले भी जनप्रतिनिधियों हो रहे हैं, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी जब कानपुर आए तो शहर की सड़कों पर तंज कसते हुए कहा था कि यहां यह समझना मुश्किल है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या शहर के जनप्रतिनिधियों को सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते? इमरान के बयान पर बीजेपी MLA अभिजीत सिंह सांगा ने पलटवार किया। उन्होंने कानपुर की सड़कों की मौजूदा स्थिति के लिए एक साथ चल रही कई विकास परियोजनाओं और बारिश को वजह बताया। सांगा ने कहा कि आने वाले तीन महीने में सड़कों की समस्या दूर किया जाएगा। दैनिक भास्कर ने विधायक सांगा से शहर के गड्ढों पर सवाल किए, इनके जवाब पढ़िए… सवाल: इमरान प्रतापगढ़ी ने कानपुर की सड़कों के गड्ढों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पता नहीं चलता सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क। आप क्या कहेंगे? जवाब- जनप्रतिनिधि होने के नाते कानपुर नगर की किसी भी समस्या की जिम्मेदारी हम लोगों की है। प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, इसलिए हम अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट रहे हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि 2017 से 2026 तक क्या किसी को यह समस्या दिखाई नहीं दी? कानपुर में इस समय एक साथ कई योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है। सीएम ग्रिड योजना के तहत सड़कें बन रही हैं। कई जगह मेट्रो रेल परियोजना के कारण सड़कें खुदी हुई हैं और नगर निगम की भी कई सड़कें बनाई जा रही हैं। मैं मानता हूं कि इन सभी कार्यों का समीक्षा के साथ निर्माण होना चाहिए था। एक साथ इतनी सड़कों पर काम नहीं होना चाहिए था। इसी वजह से बारिश के मौसम में अधिक के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। आने वाले तीन महीने के भीतर इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। कानपुर को गड्ढों से मुक्त किया जाएगा। सवाल: इमरान प्रतापगढ़ी का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते। इस पर आपका क्या जवाब है? जवाब- मैं इमरान प्रतापगढ़ी से कहना चाहता हूं कि क्या गड्ढे केवल उत्तर प्रदेश में ही दिखाई देते हैं? अगर वे जनता की समस्याओं की बात कर रहे हैं तो उन्हें उन क्षेत्रों की सड़कों को भी देखना चाहिए, जहां विपक्ष के विधायक, सांसद या विपक्ष की सरकारें हैं। किसी एक शहर की समस्या को लेकर राजनीति करने के बजाय पूरे देश और प्रदेश की समस्याओं को देखना चाहिए। इमरान प्रतापगढ़ी कांग्रेस के सांसद हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि कानपुर आकर केवल गड्ढों को लेकर राजनीति करने के बजाय शहर में हो रहे विकास कार्यों को भी देखें। यह वही कानपुर है जहां रिंग रोड का निर्माण हो रहा है। मेट्रो रेल परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का निर्माण हो चुका है। साढ़ में डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण हुआ है। इसके अलावा कई बहुआयामी योजनाओं पर काम चल रहा है, जो आने वाले समय में कानपुर की तस्वीर बदलने का काम करेंगी। मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि इमरान प्रतापगढ़ी को कानपुर आकर इस तरह की बयानबाजी के जरिए अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ये वहीं इमरान प्रतापगढ़ी हैं, जो अतीक अहमद को अपना भाई अपना बाप बताते थे, कानपुर आकर उनको सवाल नही उठाना था, बल्कि हो रहे विकास पर नजर डालनी थी। सवाल: अखिलेश यादव ने हाल ही में कानपुर का नाम ‘कमीशनपुर’ करने की बात कही। इससे पहले वह कानपुर को ‘बदनामपुर’ भी कह चुके हैं। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब- जो लोग लगातार कानपुर को टारगेट करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें कानपुर की जनता हर चुनाव में जवाब देती है। जनता उन्हें उनके आईने में उनकी तस्वीर दिखाने का काम करती है। कानपुर की बात छोड़िए, जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी, तब भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोप लगते रहे। राशन के कोटेदारों से लेकर पीडब्ल्यूडी की सड़कों तक को लेकर सवाल उठते थे।
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