पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ होगी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर इसका समापन होगा. इस दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में दान-पुण्य और सात्विक जीवन का विशेष महत्व है. तर्पण के समय दिशा, मुहूर्त और पूजा सामग्री से जुड़े नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है.
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