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यूपी के गांवों में बिजली संकट गहराया, 18 घंटे की सप्लाई भी मुश्किल; बारिश और कोयले की कमी बनी वजह

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
14 September 2026 1:32 PM 1 मिनट पठन 694 Views
यूपी के गांवों में बिजली संकट गहराया, 18 घंटे की सप्लाई भी मुश्किल; बारिश और कोयले की कमी बनी वजह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। तय रोस्टर के मुताबिक गांवों को 18 घंटे बिजली देने की व्यवस्था है, लेकिन मौजूदा संकट के चलते कई क्षेत्रों में इतनी आपूर्ति भी नहीं हो पा रही है। रात के समय कटौती और स्थानीय फॉल्ट की वजह से लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश ने बढ़ाई बिजली की समस्या

इस बार बिजली संकट के पीछे मानसून और लगातार हो रही बारिश को एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। भारी बारिश और जलभराव के कारण कोयला खदानों से कोयले की निकासी और उसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है।

कोयले की उपलब्धता कम होने से कई तापीय बिजली परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित हुआ। पावर कॉरपोरेशन ने भी माना है कि बारिश के कारण कोयला स्टॉक पर असर पड़ा है।

कई तापीय परियोजनाओं में उत्पादन प्रभावित

राज्य में कुछ तापीय बिजली इकाइयां उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। इसके कारण बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर बढ़ गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अन्य राज्यों में भी कोयले की कमी और कम उत्पादन का असर पड़ रहा है। ऐसे में पावर एक्सचेंज से जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त बिजली हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है।

3,650 मेगावॉट का अंतर

यूपी लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक 13 सितंबर को बिजली की प्रतिबंधित मांग 28,834 मेगावॉट थी, जबकि उपलब्धता करीब 25,184 मेगावॉट रही। यानी मांग और उपलब्ध बिजली के बीच लगभग 3,650 मेगावॉट का अंतर था।

इसी कमी को देखते हुए अधिक मांग वाले समय, खासकर रात में, ग्रामीण क्षेत्रों सहित कुछ इलाकों में रोस्टिंग की जा रही है।

गांवों में रात के समय सबसे ज्यादा परेशानी

बिजली की मांग आमतौर पर शाम और रात के समय बढ़ जाती है। इसी दौरान उपलब्धता कम होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की जा रही है।

पावर कॉरपोरेशन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा बुंदेलखंड, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में भी जरूरत के मुताबिक रोस्टिंग करनी पड़ रही है। वहीं जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है।

रोस्टिंग के साथ लोकल फॉल्ट भी बड़ी समस्या

ग्रामीण उपभोक्ताओं की परेशानी सिर्फ निर्धारित कटौती तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में बारिश के कारण बिजली लाइनों और स्थानीय नेटवर्क में फॉल्ट की समस्या भी सामने आ रही है।

इस वजह से बिजली आने के बाद भी लगातार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बार-बार ट्रिपिंग और फॉल्ट के कारण लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों और जमीनी स्थिति में अंतर

रिपोर्ट में आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन करीब 16 घंटे 41 मिनट बिजली आपूर्ति हो रही है। लेकिन ग्रामीण उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उन्हें कई जगह इससे भी कम बिजली मिल रही है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मौजूदा स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है कि बारिश के मौसम में इतनी कटौती से ग्रामीण आबादी की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।

रात में बिजली कटौती से सुरक्षा की चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय लंबे पावर कट का असर केवल घरेलू कामकाज तक सीमित नहीं है। उपभोक्ता परिषद ने चिंता जताई है कि बारिश के मौसम में अंधेरा होने से सांप और दूसरे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

ऐसे में ग्रामीण इलाकों में लगातार बिजली उपलब्ध कराना सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली संकट को लेकर सवाल उठाया है कि बारिश के मौसम की संभावना पहले से रहती है, तो पर्याप्त कोयला स्टॉक क्यों नहीं रखा गया।

परिषद ने बंद तापीय इकाइयों को जल्द से जल्द चालू कराने और बिजली की कमी को दूर करने की मांग की है।

कब सुधरेंगे हालात?

बिजली आपूर्ति में सुधार काफी हद तक तापीय परियोजनाओं में उत्पादन बहाल होने और कोयले की आपूर्ति सामान्य होने पर निर्भर करेगा। अगर खदानों से कोयले की निकासी और परिवहन व्यवस्था जल्द सामान्य होती है, तो बिजली उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।

फिलहाल बिजली विभाग के सामने मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को कम करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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