सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नकली नोटों के बाद अब नकली सिक्कों के बड़े नेटवर्क ने पुलिस और जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस की जांच में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले कथित सिंडिकेट से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क की शुरुआती कड़ी दिल्ली की तिहाड़ जेल में हुई एक मुलाकात से जुड़ी है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में हुई थी। जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा और बाद में सहारनपुर में नकली सिक्कों के कथित कारोबार की योजना तैयार हुई।
20 रुपये का सिक्का बनाने में खर्च होते थे 5-6 रुपये
पुलिस पूछताछ के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, एक 20 रुपये के नकली सिक्के को तैयार करने में करीब 5 से 6 रुपये की लागत आती थी। इसके बाद इन्हें एजेंटों को कथित तौर पर 12 से 15 रुपये में बेचा जाता था।
यानी अंकित मूल्य और उत्पादन लागत के बीच अंतर का फायदा उठाकर गिरोह बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के अनुसार इसी वजह से नकली सिक्कों का उत्पादन बड़े स्तर पर करने की योजना बनाई गई थी।
रोजाना हजारों नकली सिक्के तैयार करने का दावा
जांच में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि गिरोह ने उत्पादन के लिए कई मशीनों का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, छह मशीनों की मदद से रोजाना करीब 10 से 12 हजार सिक्के तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया था। कुछ लोग उत्पादन से जुड़े काम संभालते थे, जबकि अन्य लोगों की भूमिका तैयार सिक्कों को एजेंटों तक पहुंचाने की बताई जा रही है। तीतरो क्षेत्र में कथित तौर पर मशीनें लगाकर उत्पादन केंद्र तैयार किया गया था।
तिहाड़ जेल में हुई मुलाकात से शुरू हुई कहानी
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी उपकार लूथरा पहले भी नकली सिक्के बनाने के मामले में कानून के शिकंजे में आ चुका था। वर्ष 2017 में उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात तिहाड़ जेल में हिमांशु से हुई।
जेल से बाहर आने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा। इसके बाद सहारनपुर में नकली सिक्कों का कथित नेटवर्क खड़ा करने की योजना पर काम शुरू हुआ। धीरे-धीरे इसमें दूसरे लोग भी जुड़ते गए।
बाजार में सिक्के खपाने के लिए तैयार था नेटवर्क
पुलिस की जांच में सामने आया है कि नकली सिक्कों को बाजार में पहुंचाने के लिए एजेंटों का नेटवर्क तैयार किया गया था। पुलिस के अनुसार शराब की दुकानों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों जैसे स्थानों पर इन्हें खपाने की योजना थी।
जांच में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और बिहार तक संपर्क होने की बात सामने आई है। मधुबनी, भदोही और बदायूं जैसे स्थानों के नाम भी जांच में सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि इन सभी संपर्कों और नेटवर्क की वास्तविक भूमिका की जांच अभी जारी है।
पुलिस ने 20 रुपये के हजारों नकली सिक्के बरामद किए
इस मामले में सहारनपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक अलग पुलिस कार्रवाई में 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए गए थे। पुलिस ने मशीनें, डाई, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त करने की जानकारी दी है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें मुख्य आरोपी उपकार लूथरा भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई नेटवर्क और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करना है।
नेपाल में भी ठिकाना बनाने की कोशिश का दावा
पुलिस जांच में यह भी दावा सामने आया है कि मुख्य आरोपी ने पुलिस से बचने के दौरान नेपाल में भी नकली सिक्के बनाने का ठिकाना तैयार करने की कोशिश की थी।
पुलिस के अनुसार, उपकार पहले सुनार का काम करता था और उसे धातु से जुड़े तकनीकी काम की जानकारी थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसके पुराने संपर्कों का इस कथित नेटवर्क में कितना इस्तेमाल हुआ।
पंजाब से बिहार तक नेटवर्क की जांच
सहारनपुर में पकड़े गए कथित सिंडिकेट के तार कई राज्यों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस को मिले मोबाइल फोन और रजिस्टर इस जांच में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इनके जरिए एजेंटों, पुराने संपर्कों और सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
नकली नोटों के बीच नकली सिक्कों ने बढ़ाई चिंता
सहारनपुर में नकली सिक्कों का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब शहर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17 करोड़ रुपये से अधिक की कथित नकली करेंसी मिलने के मामले की एनआईए जांच भी चल रही है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नकली सिक्कों के इस मामले और पीएनबी करेंसी चेस्ट मामले के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।