कानपुर: दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जांच के दौरान गिरफ्तार की गई उनकी बहू शालू को पुलिस ने अब मामले में आरोपी नहीं मानते हुए क्लीनचिट देने का फैसला किया है। पुलिस की जांच में हत्या की साजिश का आरोप शालू से हटकर उसके पति सुब्रत से जुड़ गया है। हालांकि पुलिस की अंतिम रिपोर्ट शुक्रवार को अदालत में दाखिल नहीं हो सकी, जिसके कारण शालू को अभी दो दिन और जेल में रहना पड़ेगा। शनिवार और रविवार को अदालत में अवकाश होने के कारण अब मामले में सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है।
पहले बहू पर लगा था हत्या की साजिश का आरोप
5 सितंबर को कानपुर के कल्याणपुर इलाके में स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा का शव मिला था। पुलिस ने जांच शुरू की तो शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर उनकी बहू शालू पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा।
पुलिस ने पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी को गिरफ्तार किया था। विशाल ने पूछताछ में कथित तौर पर शालू का नाम लिया था। इसके बाद शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
18 दिन की जांच में बदली पूरी कहानी
पुलिस की जांच करीब 18 दिनों तक चली। इस दौरान जांच एजेंसी ने कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों के बयानों और अन्य साक्ष्यों को खंगाला।
लाइव हिन्दुस्तान की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जिन साक्ष्यों के आधार पर शुरुआत में शालू को आरोपी बनाया गया था, जांच आगे बढ़ने पर उन्हीं कड़ियों का संबंध उसके पति सुब्रत से जुड़ता गया। पुलिस के मुताबिक हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका सामने आई और शालू को फंसाए जाने की बात जांच में सामने आई।
पुलिस ने सुब्रत को बनाया मुख्य आरोपी
पुलिस की मौजूदा जांच के अनुसार, विनीत मिनोचा की हत्या के पीछे उनके बेटे सुब्रत की भूमिका सामने आई है। गुरुवार को पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर जेल भेजा और शालू के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगाने की बात कही।
हालांकि अंतिम रिपोर्ट पर अदालत की ओर से सुनवाई अभी बाकी है। इसलिए फिलहाल शालू को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक जेल में रहना पड़ रहा है।
शुक्रवार को कोर्ट में होता रहा इंतजार
शालू के परिवार के लोग शुक्रवार को अदालत पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर देगी और उसके बाद शालू की रिहाई का रास्ता साफ हो जाएगा।
लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक विवेचक के देर से अदालत पहुंचने के कारण अंतिम रिपोर्ट पर सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद सप्ताहांत में अदालत बंद रहने के कारण मामला सोमवार तक टल गया।
परिवार बोला- रिपोर्ट दाखिल होने में देरी से बढ़ी परेशानी
शालू के परिजनों ने रिपोर्ट दाखिल होने में हुई देरी पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि पुलिस समय पर अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश कर देती तो शालू को शनिवार को जेल से बाहर आने का मौका मिल सकता था।
अब अदालत में अगली सुनवाई सोमवार को होने की उम्मीद है। अंतिम रिपोर्ट पर अदालत के संज्ञान के बाद ही शालू की रिहाई की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
सुब्रत पर कर्ज और महंगे खर्च का भी एंगल
जांच के दौरान पुलिस ने सुब्रत की आर्थिक स्थिति को भी जांच का हिस्सा बनाया। पुलिस के मुताबिक, उस पर काफी कर्ज था और उसने गोवा के कैसीनो तथा आईपीएल सट्टेबाजी में भी बड़ी रकम गंवाई थी।
रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि सुब्रत ने अलग-अलग लोगों और संस्थानों से पैसे उधार लिए थे। जांच में यह भी सामने आया कि उसने अपने पिता से आर्थिक मदद मांगी थी। इन वित्तीय परिस्थितियों को पुलिस ने हत्या की जांच में महत्वपूर्ण एंगल के तौर पर देखा।
शुरुआत में शालू के खिलाफ क्या सामने आया था?
मामले की शुरुआती जांच में पुलिस के सामने कई ऐसे बिंदु आए थे, जिनके आधार पर शालू को आरोपी बनाया गया था। इनमें मुख्य रूप से हत्यारोपी विशाल का बयान, अपार्टमेंट में प्रवेश से जुड़ी जानकारी, घर की चाबी और सीसीटीवी से जुड़े तथ्य शामिल थे।
बाद में जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने इन घटनाओं की अलग तरह से पड़ताल की और कथित तौर पर इनका संबंध सुब्रत से पाया। यही वजह रही कि पुलिस ने शालू के खिलाफ अपना रुख बदल दिया।