लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण स्वच्छता अभियान अब केवल घर-घर शौचालय बनाने तक सीमित नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण (SBM-G) के तहत अब गांवों में खुले में शौच मुक्त व्यवहार को बनाए रखने के साथ-साथ ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य गांवों में लंबे समय तक टिकाऊ स्वच्छता व्यवस्था तैयार करना है।
स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी। शुरुआती चरण में इसका मुख्य फोकस शौचालय निर्माण, खुले में शौच की समस्या को खत्म करने और लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने पर था। बाद में मिशन के दूसरे चरण में ग्रामीण स्वच्छता को अगले स्तर तक ले जाने के लिए ODF Plus पर जोर बढ़ाया गया।
ODF Plus क्या है?
ODF Plus का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि गांव में लोग खुले में शौच न करें। इसके तहत गांव के ODF दर्जे को बनाए रखने के साथ ठोस कचरा प्रबंधन, तरल/ग्रे-वॉटर प्रबंधन और दृश्य स्वच्छता जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाता है। केंद्र सरकार के अनुसार ODF Plus का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता व्यवस्था को टिकाऊ बनाना है।
यानी अब किसी गांव को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए केवल शौचालय होना पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि कूड़े और गंदे पानी के सुरक्षित निपटारे की व्यवस्था भी जरूरी है।
यूपी में 1 लाख से ज्यादा गांव, हजारों ODF Plus
उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ODF Plus डैशबोर्ड पर 26 सितंबर 2026 को जारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 75 जिले, 826 ब्लॉक और 57,694 ग्राम पंचायतों के तहत कुल 1,03,706 गांव दर्ज हैं। इनमें 7,425 गांव ODF Plus मॉडल, 5,563 उज्ज्वल और 1,210 उदीयमान श्रेणी में दर्ज किए गए हैं।
आधिकारिक डैशबोर्ड के मुताबिक, राज्य में 4,870 गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और 3,731 गांवों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं दर्ज हैं। इसके अलावा 5,554 गांवों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर और 5,558 गांवों में कूड़ा संग्रहण वाहन दर्ज किए गए हैं।
95 हजार से ज्यादा गांवों का भी उल्लेख
उत्तर प्रदेश सरकार के 2025 के एक प्रकाशन के हवाले से Aaj Tak ने बताया कि राज्य को स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत 100 प्रतिशत ODF घोषित किया गया था। उसी प्रकाशन के अनुसार 95,767 गांवों ने ठोस और तरल कचरा प्रबंधन व्यवस्था के साथ खुद को ODF घोषित किया था।
यह आंकड़ा उस व्यापक बदलाव को दिखाता है जिसमें ग्रामीण स्वच्छता का फोकस केवल शौचालय निर्माण से आगे बढ़कर गांवों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करने पर किया जा रहा है।
पहले शौचालय, अब कचरा प्रबंधन
SBM-G के पहले चरण में उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पहले चरण के दौरान 2.68 करोड़ व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण की जानकारी दी गई है।
अब दूसरे चरण में चुनौती यह है कि बने हुए शौचालयों का इस्तेमाल जारी रहे और गांवों में पैदा होने वाले ठोस एवं तरल कचरे का उचित प्रबंधन हो। केंद्र सरकार भी SBM-G Phase II में ODF व्यवहार को बनाए रखने और सभी गांवों में ठोस-तरल कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दे रही है।
ग्राम पंचायतों की बढ़ी जिम्मेदारी
इस पूरी व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गांव में स्वच्छता सुविधाओं के रखरखाव, कूड़ा संग्रहण और कचरे के सुरक्षित प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को स्थानीय स्तर पर संचालित करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों से जुड़ी है।
इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जो केवल अभियान या कुछ दिनों की सफाई तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित रूप से चलती रहे।
खाद के गड्ढे और सोख्ता गड्ढों पर भी जोर
ODF Plus के तहत गांवों में अलग-अलग तरह की सामुदायिक और घरेलू व्यवस्थाएं भी विकसित की जा रही हैं। यूपी के आधिकारिक डैशबोर्ड पर 30,471 सामुदायिक खाद के गड्ढे, 53,078 सामुदायिक सोख्ता गड्ढे, 16,673 वर्मी कम्पोस्ट पिट और 1,05,397 व्यक्तिगत खाद के गड्ढे दर्ज हैं।
इस तरह कचरे के निपटारे के साथ जैविक कचरे के उपयोग और गंदे पानी के प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
2026-27 में यूपी के बजट में भी प्रावधान
उत्तर प्रदेश के 2026-27 के बजट दस्तावेज में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II के लिए 2,823 करोड़ रुपये के प्रावधान का उल्लेख है। इससे ग्रामीण स्वच्छता और ODF Plus से जुड़े कार्यों को वित्तीय समर्थन दिए जाने की जानकारी मिलती है।
अब लक्ष्य सिर्फ ODF नहीं, साफ और टिकाऊ गांव
ग्रामीण स्वच्छता अभियान का अगला चरण गांवों में स्वच्छता को स्थायी बनाने से जुड़ा है। खुले में शौच मुक्त व्यवहार को बनाए रखने के साथ कूड़ा संग्रहण, ठोस कचरे का निपटारा, ग्रे-वॉटर प्रबंधन और गांवों की दृश्य स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है।
यूपी में ODF Plus की दिशा में चल रही गतिविधियां इसी बदलाव को दर्शाती हैं—जहां शौचालय निर्माण के बाद अब गांवों में कचरा प्रबंधन और लंबे समय तक स्वच्छ वातावरण बनाए रखना अगली बड़ी प्राथमिकता बन गई है।