लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अब राजनीति में उतरने का फैसला किया है। उन्होंने साफ किया है कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेंगी। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश से ही उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू होगी और वह लोगों से सीधे जुड़कर उनके मुद्दों को उठाना चाहती हैं।
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने अगस्त 2026 में IAS से इस्तीफा दिया था। करीब एक महीने बाद उन्होंने एक वीडियो संदेश के जरिए अपनी राजनीतिक पारी की घोषणा की।
किसी पार्टी के साथ नहीं जाएंगी दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह किसी मौजूदा राजनीतिक दल के झंडे के नीचे राजनीति नहीं करेंगी। उनका कहना है कि वह नागरिकों के साथ मिलकर एक ऐसा मंच तैयार करना चाहती हैं, जहां आम लोगों की समस्याओं और शिकायतों को जगह मिले।
उन्होंने प्रशासनिक सेवा के दौरान सामने आए कई मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार सरकारी मंजूरी, बजट और व्यवस्थाएं होने के बावजूद लोगों की समस्याएं हल नहीं हो पातीं। इसी अनुभव को उन्होंने राजनीति में आने के अपने फैसले से जोड़ा है।
जनता से सीधे जुड़ने की बात
दिव्या मित्तल ने कहा है कि उनकी राजनीतिक पहल में नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने लोगों से संपर्क करने और अपने मुद्दे साझा करने की अपील भी की है।
उनके अनुसार, उनका फोकस उन लोगों की आवाज उठाने पर रहेगा जिनकी शिकायतें सरकारी कार्यालयों तक नहीं पहुंच पातीं या पहुंचने के बाद भी उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती।
उन्होंने सड़कों की स्थिति, स्कूलों के निर्माण, जमीन के पट्टे, परीक्षा से जुड़ी समस्याओं और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया है।
13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहीं
दिव्या मित्तल 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी थीं। प्रशासनिक सेवा में करीब 13 साल रहने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया।
वह उत्तर प्रदेश में अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर काम कर चुकी हैं। मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप से पेयजल पहुंचाने से जुड़े कामों को लेकर भी उनका नाम सामने आया था।
दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग और IIM बेंगलुरु से MBA की पढ़ाई की है। IAS बनने से पहले उन्होंने लंदन में वित्तीय क्षेत्र में काम किया था।
यूपी में पहले भी राजनीति में आए हैं पूर्व नौकरशाह
दिव्या मित्तल की राजनीतिक एंट्री ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में कई पूर्व IAS और IPS अधिकारी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। इनमें कुछ ने राजनीतिक दलों का दामन थामा तो कुछ ने चुनावी राजनीति में सीधे प्रवेश किया।
अरविंद कुमार शर्मा गुजरात कैडर के पूर्व IAS अधिकारी रहे हैं और बाद में भाजपा में शामिल होकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए। वह वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।
वहीं पूर्व IPS अधिकारी असीम अरुण ने भी पुलिस सेवा छोड़ने के बाद भाजपा में प्रवेश किया और विधानसभा चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बने।
पूर्व IPS बृजलाल भी राजनीति में आए
उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस अधिकारी बृजलाल भी सेवानिवृत्ति के बाद सक्रिय राजनीति में आए। वह भाजपा से राज्यसभा सांसद बने।
इसके अलावा पूर्व IPS अधिकारी शिरीष चंद्र दीक्षित भाजपा के टिकट पर वाराणसी से लोकसभा सांसद रह चुके हैं। पूर्व IPS अधिकारी महेंद्र सिंह यादव ने भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और विधायक बने।
पूर्व IAS पीएल पुनिया भी रह चुके हैं सांसद
पूर्व IAS अधिकारी पीएल पुनिया भी सक्रिय राजनीति में आए। वह उत्तर प्रदेश में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर काम करने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए और बाराबंकी से लोकसभा सांसद रहे।
यूपी में कुछ पूर्व नौकरशाहों ने अपनी राजनीतिक पार्टियां बनाने की भी कोशिश की है। अमर उजाला की रिपोर्ट में विजय शंकर पांडेय, हरिशचंद्र और चंद्रपाल जैसे पूर्व IAS अधिकारियों का उल्लेख किया गया है, जिन्होंने अपनी राजनीतिक राह बनाने का प्रयास किया।
दूसरे राज्यों के पूर्व नौकरशाह भी राजनीति में आए
राजनीति में आने वाले पूर्व नौकरशाहों का उदाहरण केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। केरल कैडर के पूर्व IAS अधिकारी अल्फोंस कन्ननथनम ने भी प्रशासनिक सेवा के बाद चुनावी राजनीति में प्रवेश किया था। वह निर्दलीय विधायक बने और बाद में भाजपा में शामिल होकर राज्यसभा पहुंचे तथा केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे।
अब दिव्या मित्तल के सामने नई राजनीतिक पारी
दिव्या मित्तल ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में शामिल होने से इनकार किया है और उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी।
उनकी ओर से घोषित योजना नागरिकों के साथ मिलकर स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करने और सार्वजनिक मुद्दों को उठाने की है। आने वाले समय में उनकी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी क्षेत्र को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।