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नीला ड्रम केस: सौरभ हत्याकांड में आज फैसला, 126 पेशी और 22 गवाहों के बाद कोर्ट में क्या होगा?

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
30 September 2026 10:58 AM 1 मिनट पठन 10886 Views
नीला ड्रम केस: सौरभ हत्याकांड में आज फैसला, 126 पेशी और 22 गवाहों के बाद कोर्ट में क्या होगा?

मेरठ: उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार, 30 सितंबर को फैसला आने की तारीख है। मेरठ की जिला अदालत में करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 से अधिक गवाहों के बयान के बाद अब मामले की निगाहें जिला जज की अदालत पर टिकी हैं।

मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला आरोपी हैं। अभियोजन पक्ष ने दोनों के खिलाफ परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा है, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध किया है।

आज अदालत में क्या होगा?

अदालत सबसे पहले यह तय करेगी कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित कर पाया है या नहीं।

अगर अदालत दोष सिद्ध करती है, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। इसलिए केवल फैसला आने की तारीख का मतलब यह नहीं है कि पहले से यह तय है कि आरोपियों को कौन-सी सजा मिलेगी। सजा अदालत के फैसले और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय होगी।

13 महीने चली सुनवाई

इस मामले में अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हो चुकी थी। इसके बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में करीब 13 महीने तक सुनवाई चली और 126 पेशियां हुईं। अभियोजन पक्ष की ओर से 22 से अधिक गवाहों के बयान कराए गए। इनमें सौरभ के परिजन, परिचित और मामले से जुड़े अन्य लोग शामिल रहे।

अदालत में मामले से जुड़े दस्तावेजी, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी रखे गए।

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोप लगाया कि सौरभ की हत्या की पहले से तैयारी की गई थी। अभियोजन ने कथित तौर पर दवाइयों, हथियार, ड्रम और अन्य सामान की खरीद से जुड़े साक्ष्यों को भी मामले का हिस्सा बनाया।

सौरभ के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अदालत से आरोपियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की है। अभियोजन पक्ष ने अपने तर्कों के समर्थन में संबंधित न्यायिक फैसलों का भी हवाला दिया।

हालांकि, अंतिम फैसला अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करना है।

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

बचाव पक्ष ने आरोपियों पर लगे आरोपों का विरोध किया है। रिपोर्टों के अनुसार, बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और अभियोजन की कहानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।

इसलिए अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि पेश किए गए परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपों को कानूनी रूप से साबित करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।

3 मार्च 2025 को सामने आया था मामला

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। अभियोजन के अनुसार, मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या की गई और उनका शव एक नीले ड्रम में छिपाया गया था।

इसके बाद पुलिस जांच में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया। दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और मामला अदालत में पहुंचा।

कब से चल रहा था मुकदमा?

मामला 2025 में अदालत पहुंचा और बाद में इसकी सुनवाई जिला जज की अदालत में हुई। लगभग 13 महीने की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें पेश कीं।

17 सितंबर को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की।

फैसले पर क्यों टिकी हैं नजरें?

सौरभ राजपूत हत्याकांड शुरुआती जांच के समय से ही व्यापक चर्चा में रहा है। शव के नीले ड्रम से बरामद होने की जानकारी सामने आने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था।

अब लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को अदालत किस तरह देखती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि फैसला आने से पहले किसी आरोपी को दोषी मानना कानूनी रूप से उचित नहीं है। अदालत के निर्णय के बाद ही आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने आएगा।

अब आगे क्या होगा?

30 सितंबर को अदालत पहले आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने पर फैसला सुनाएगी। यदि दोष सिद्ध होता है तो सजा के मुद्दे पर सुनवाई होगी। वहीं यदि आरोप साबित नहीं होते हैं, तो अदालत का निर्णय उसी के अनुरूप होगा।

इस तरह करीब 13 महीने चली सुनवाई के बाद अब मेरठ के बहुचर्चित नीला ड्रम केस में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण सामने है।

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