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लखनऊ में बाढ़ का कहर: घरों में पांच फीट तक पानी, सांपों का खतरा; सैकड़ों परिवार हुए बेघर

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
3 October 2026 1:40 PM 1 मिनट पठन 5851 Views
लखनऊ में बाढ़ का कहर: घरों में पांच फीट तक पानी, सांपों का खतरा; सैकड़ों परिवार हुए बेघर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती और सई नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। फैजुल्लागंज और बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के कई इलाकों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। कुछ जगहों पर घरों में करीब पांच फीट तक पानी भरने की सूचना है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों और रिश्तेदारों के यहां जाने को मजबूर हुए हैं।

बाढ़ का असर केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं है। माल, इटौंजा, निगोहां, बंथरा और आसपास के क्षेत्रों में करीब 3,500 किसानों की फसलें प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। धान, उड़द, बाजरा, चारा और सब्जियों के खेत पानी में डूब गए हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है।

फैजुल्लागंज में लगातार बढ़ रहा बाढ़ का दायरा

गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से फैजुल्लागंज की कई कॉलोनियां जलमग्न हैं। दाउदनगर, मामा कॉलोनी, कैलाश विहार, कनौजिया चौराहा, नंदा फार्म हाउस, मिश्रा प्लानिंग एरिया और मस्जिद तिराहा समेत कई इलाकों में पानी भर गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ का पानी रोज करीब 300 मीटर नए इलाके को अपनी चपेट में ले रहा है। मिल्लत नगर, जैनब मस्जिद, राम विहार कॉलोनी, मामा कॉलोनी और पवन विहार में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कुछ परिवार अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फैजुल्लागंज के कुछ हिस्सों में बाढ़ लगातार छठे दिन भी बनी रही और 200 से अधिक घरों के पूरी तरह जलमग्न होने की सूचना स्थानीय स्तर पर सामने आई।

घर छोड़ने को मजबूर परिवार

बाढ़ का पानी घरों में पहुंचने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। कई लोग रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं, जबकि कुछ परिवार घर की सुरक्षा और सामान की चिंता के कारण ऊंचे स्थानों या घर की छतों पर रहने को मजबूर हैं।

बीकेटी के बहादुरपुर गांव में एक ग्रामीण के अनुसार, रात में पानी तेजी से बढ़ा और सुबह तक घर के आंगन में करीब पांच फीट पानी भर गया। परिवार के करीब 12 सदस्यों और मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा।

बाढ़ के पानी में सांपों का खतरा

जलभराव बढ़ने के साथ प्रभावित इलाकों में सांप निकलने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फैजुल्लागंज के स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई स्थानों पर सांप दिखाई दिए हैं। पानी से घिरे घरों और रास्तों में आवाजाही के कारण लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।

राहत सामग्री पहुंचाने में भी कई जगह मुश्किलें सामने आ रही हैं। सामाजिक संगठनों की ओर से प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री के पैकेट वितरित किए गए हैं।

नावों से पहुंचाई जा रही मदद

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के आवागमन और राहत कार्य के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार, 24 नावें लगाई गई हैं और 10 अतिरिक्त नावों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम विशाख जी. और जेसीपी बबलू कुमार ने नाव से फैजुल्लागंज पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को चिन्हित करके उनकी सूची तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित निकाला जा सके।

बीकेटी के गांवों में भी गंभीर हालात

बख्शी का तालाब क्षेत्र के कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। लासा, अकड़रिया खुर्द, दुधरा, सुल्तानपुर, बहादुरपुर और हीरापुरवा में कई घरों में पानी घुसने की सूचना है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 50 घर प्रभावित हुए हैं और लगभग 350 लोग अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों या ऊंचे स्थानों पर चले गए हैं।

ग्रामीण ट्रैक्टर और नावों की मदद से अनाज, भूसा और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें भी पानी में डूबी हुई हैं।

किसानों की हजारों बीघा फसल प्रभावित

बाढ़ से किसानों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। लखनऊ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में धान, उड़द, बाजरा, चारा और विभिन्न सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं।

निगोहां क्षेत्र में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से जवाहरखेड़ा, चिरानीखेड़ा, मीरानपुर और बरवलिया गांवों में करीब 100 बीघा फसल जलमग्न होने की जानकारी है। यहां करीब 50 किसानों के प्रभावित होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

इसके अलावा माल, इटौंजा, निगोहां, बंथरा और सैथा क्षेत्र में भी नदी का पानी बढ़ने से खेतों पर असर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 24 घंटे के भीतर कई स्थानों पर पानी का स्तर तीन से चार फीट तक बढ़ा।

बिजली व्यवस्था भी प्रभावित

बाढ़ के कारण बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। फैजुल्लागंज और दाउदनगर में छह ट्रांसफार्मर पेटियां पानी में डूब गईं। करंट उतरने के खतरे को देखते हुए बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिससे करीब 1,200 घरों की बिजली प्रभावित हुई।

अधिकारियों के अनुसार, पानी ट्रांसफार्मर के चबूतरे तक भी पहुंच गया था। ऐसे में सुरक्षा कारणों से बिजली काटना जरूरी बताया गया।

सैथा गांव में भी घरों में घुसा पानी

दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड स्थित सैथा गांव में भी गोमती का पानी घरों तक पहुंचने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार नदी किनारे बने 20 से अधिक मकानों में पानी भर गया और करीब 100 बीघा फसल प्रभावित हुई। कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं।

धान और सब्जियों की फसल पर भी बाढ़ का असर पड़ा है। तैयार तोरई, लौकी और खीरा जैसी सब्जियों के खराब होने का खतरा बताया गया है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

लखनऊ में बाढ़ की स्थिति ने प्रशासन के सामने राहत और बचाव की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर बिजली, भोजन, पीने के पानी और आवागमन जैसी मूलभूत सुविधाओं को बनाए रखना भी जरूरी है।

प्रशासन ने नावों की संख्या बढ़ाने, राहत कैंप चलाने और संवेदनशील वर्गों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। वहीं स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो गई है।

लखनऊ बाढ़: अभी कैसी है स्थिति?

फिलहाल गोमती और सई नदी के बढ़े जलस्तर के कारण लखनऊ के कई ग्रामीण और निचले इलाकों में जलभराव बना हुआ है। कई परिवार विस्थापित हैं, खेतों में पानी भरा है और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुरक्षा कारणों से बंद है। प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य जारी होने की बात कह रहा है।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित आवागमन, भोजन, बिजली और घरों में लौटने की स्थिति को लेकर है। आने वाले समय में नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति इस संकट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।

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