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कोई फ्रेंडली फाइट नहीं, 6 सीट पर महागठबंधन आमने-सामने:तेजस्वी को राहुल का कड़ा जवाब, नहीं चलेगी मनमानी, दिए 5 उम्मीदवार

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
3 October 2026 5:26 PM 1 मिनट पठन 9036 Views
कोई फ्रेंडली फाइट नहीं, 6 सीट पर महागठबंधन आमने-सामने:तेजस्वी को राहुल का कड़ा जवाब, नहीं चलेगी मनमानी, दिए 5 उम्मीदवार

बिहार में 8 सीटों पर हो रहे MLC चुनाव में महागठबंधन की पार्टियां आमने-सामने आ गई हैं। फ्रेंडली फाइट जैसी स्थिति नहीं, सीधी लड़ाई है। राजद ने सहयोगी पार्टियों से सलाह किए बिना 8 में से 6 सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए। अब कांग्रेस ने 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार दिए हैं। चार सीटों पर कांग्रेस-आरजेडी आमने-सामने है। 6 सीट पर महागठबंधन की पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। 5 प्रत्याशी देने के फैसले के साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरजेडी लीडर तेजस्वी यादव को कड़ा जवाब दिया है कि अब मनमानी नहीं चलेगी। किन सीटों पर महागठबंधन की पार्टियां आमने-सामने हैं? पढ़िए रिपोर्ट 1- सारण शिक्षक सीट, आरजेडी और सीपीआई आमने-सामने सारण शिक्षक सीट पर सीपीआई ने इसलिए पहले ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी कि महागठबंधन की कोई पार्टी प्रत्याशी नहीं दे, लेकिन आरजेडी नहीं मानी। इस सीट पर सीपीआई से केदार पांडेय, जयमंगल सिंह जैसे नेता चुनाव लड़ते रहे थे। अब आरजेडी के प्रो. जयराम यादव और सीपीआई के विद्यासागर विद्यार्थी आमने-सामने हैं। यहां जेडीयू ने आनंद पुष्कर और जनसुराज ने सीटिंग एमएलसी अफाक अहमद को उतारा है। कांग्रेस ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं दिया है। 2- दरभंगा शिक्षक सीट, कांग्रेस और सीपीएम में टकराव सीपीएम ने दरभंगा शिक्षक सीट पर रामदेव राय को उतारा है। वह पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। इस सीट से सीपीएम से वासुदेव सिंह चुनाव जीतते थे। इस सीट पर सीटिंग एमएलसी कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा हैं। कांग्रेस ने इन्हें फिर से टिकट दिया है। जेडीयू ने धनश्याम राय और जनसुराज ने सुरेश प्रसाद राय को उतारा है। 3- कोसी स्नातक सीट, आरजेडी और कांग्रेस की भिड़ंत इस सीट पर आरजेडी ने नितेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने मनोज जायसवाल को टिकट दिया है। वह एनएसयूआई से जुड़े रहे और कांग्रेस नेता तारिक अनवर के करीबी रहे हैं। दिलचस्प यह कि यहां से लड़ने की शर्त पर शिक्षक नेता अमित विक्रम ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। अमित पहले जनसुराज में थे। अमित विक्रम कहते हैं, ‘मैं तो हर हाल में चुनाव लड़ूंगा। यह चुनाव दलगत नहीं है।’ इस सीट पर बीजेपी के सीटिंग एमएलसी डॉ. एनके यादव हैं। जनसुराज ने डॉ. रजनीश रंजन को उतारा है। 4- दरभंगा स्नातक सीट, आरजेडी और कांग्रेस भिड़ रहीं दरभंगा स्नातक सीट पर आरजेडी ने अनिल कुमार झा को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने रजनीकांत पाठक को टिकट दिया है। वे मिथिलांचल की राजनीति में लंबे समय से एक्टिव रहे हैं। निर्दलीय सीटिंग एमएलसी सर्वेश कुमार को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। जनसुराज ने मो. इम्तेयाज नूरानी को उतारा है। 5- पटना शिक्षक सीट, आरजेडी और कांग्रेस के बीच फाइट यहां आरजेडी ने डॉ. संजीव कुमार सिंह और कांग्रेस ने संजय कुमार यादव को टिकट दिया है। संजय क्षेत्र में एक्टिव थे। हाल में वित्त रहित शिक्षकों के लिए आंदोलन चलाया। बीजेपी ने सीटिंग एमएलसी प्रो. नवल किशोर यादव को उम्मीदवार बनाया है। जनसुराज ने डॉ. दिव्या ज्योति को उतारा है। 6. पटना स्नातक सीट, आरजेडी और कांग्रेस ने उतारे उम्मीदवार पटना स्नातक सीट पर आरजेडी ने दिलीप कुमार को उतारा है। कांग्रेस ने डॉ. असादुल्लाह खान को टिकट दिया है। वे कांग्रेस सेवा दल से जुड़े रहे हैं। नवादा से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। जेडीयू ने नीरज कुमार और जनसुराज ने डॉ. अनुज सिंह को उतारा है। इस सीट पर एनडीए में भी काफी रार है। नीरज कुमार के खिलाफ उनकी ही पार्टी जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। अनंंत, जनसुराज के अनुज सिंह का प्रचार कर रहे हैं। सिर्फ दो सीट पर निभाया जा रहा महागठबंधन धर्म 1- तिरहुत शिक्षक सीट, कांग्रेस ने राजेश राठौर को टिकट नहीं दिया तिरहुत शिक्षक सीट पर कांग्रेस और राजद ने गठबंधन धर्म निभाते हुए उम्मीदवार नहीं दिया है। यहां से महागठबंधन की पार्टी सीपीआई के प्रो. संजय कुमार सिंह सिटिंग MLC हैं। उन्हें इस बार भी सीपीआई ने उतारा है। कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौर यहां चुनाव प्रचार में लगे हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया है। इसपर भास्कर से राजेश राठौर ने कहा, ‘मैं हर हाल में चुनाव लड़ूंगा। यह चुनाव दलगत भावना से ऊपर उठकर होता है। बुद्धिजीवी वोट करते हैं।’ सीपीआई के संजय कुमार सिंह कहते हैं, ‘मैं इस सीट पर महागठबंधन का अकेला उम्मीदवार हूं। जिसको शिक्षकों से कोई मतलब नहीं, न शिक्षक हैं, वैसे लोगों पर मैं क्या टिप्पणी करूं। मैं शिक्षकों की लड़ाई लड़ता रहा हूं। हमें शिक्षकों का वोट मिलेगा।’ इस सीट पर बीजेपी ने नरेंद्र प्रसाद सिंह को उतारा है। जनसुराज ने पहले तो भूषण झा के नाम की घोषणा की, लेकिन उन्हें बदलकर श्याम नंदन यादव को उम्मीदवार बनाया है। राजेश राठौर के बारे में चर्चा है कि वे पप्पू यादव की रणनीति पर तो नहीं चल रहे कि निर्दलीय लड़कर बीजेपी और कांग्रेस दोनों खेमों का वोट हासिल कर लें। राजेश राठौर कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बावजूद निर्दलीय लड़ते हैं तो कांग्रेस उन पर कौन सा अनुशासनात्मक कदम उठाती है यह भी देखना होगा। अगर कांग्रेस ने अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया तो यह साफ हो जाएगा कि पार्टी कुछ और खेल करने में लगी है। 2- तिरहुत स्नातक सीट, आरजेडी ने डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उतारा तिरहुत स्नातक सीट पर आरजेडी ने डॉ. रश्मि विनायक गौतम को उतारा है। यहां कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं दिया है न ही सीपीआई और सीपीएम ने उम्मीदवार दिया है। निर्दलीय बंशीधर बृजवासी सीटिंग एमएलसी हैं। वे फिर से निर्दलीय लड़ रहे हैं। जेडीयू ने फिर से अभिषेक झा को मौका दिया है। जनसुराज ने डॉ. विमोहन को उतारा है। आपसी लड़ाई से महागठबंधन को होता रहा है नुकसान 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की हार हुई थी। इसकी एक वजह सहयोगी पार्टियों के बीच आपसी समन्वय का अभाव माना गया था। 243 सीटों में से 12 सीटें ऐसी थीं जहां लड़ाई NDA से नहीं, बल्कि महागठबंधन के साथियों के बीच थी। मार्च 2026 में बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर हुए चुनाव पर नजर डालें तो संख्या बल के अनुसार महागठबंधन के एक उम्मीदवार को जीत मिल सकती थी। आरजेडी की तरफ से सीटिंग राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) उम्मीदवार थे, लेकिन महागठबंधन के अंदर ही दांव-पेंच दिख गया। कांग्रेस के तीन विधायक वोट देने ही नहीं पहुंचे, आरजेडी के एक विधायक ने दगा दिया। एनडीए सभी 5 सीटें जीत गई थी।

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