लखनऊ: नेपाल के पहाड़ी इलाकों और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पूर्वी यूपी में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन, चंदन और व्यास जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थिति को देखते हुए गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज समेत कई जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जीर्ण-शीर्ण मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में पहुंचाने को कहा गया है।
नेपाल की बारिश का यूपी की नदियों पर असर
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश का असर सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के जिलों में दिखाई दे रहा है। बारिश के कारण नदियों में पानी तेजी से बढ़ रहा है।
बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन और चंदन जैसी नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से उफनती नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
महराजगंज में तेजी से बढ़ा नदियों का जलस्तर
महराजगंज जिले में राप्ती, रोहिन और चंदन नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक धानी क्षेत्र के रिगौली बांध पर राप्ती नदी का जलस्तर 76.85 मीटर पहुंच गया था।
वहीं सदर क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी का जलस्तर 78.48 मीटर और ठूठीबारी क्षेत्र में चंदन नदी का जलस्तर 99.65 मीटर दर्ज किया गया।
हालांकि नियंत्रण कक्ष के अनुसार उस समय महराजगंज और नेपाल सीमा के तटबंध सुरक्षित थे।
गंडक नदी का डिस्चार्ज बढ़ने से कुशीनगर में चिंता
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के बाद बड़ी गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज तेजी से बढ़ा। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर पानी का डिस्चार्ज कुछ ही घंटों में काफी बढ़ गया।
रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार दोपहर डिस्चार्ज 79 हजार क्यूसेक था, जो शाम तक बढ़कर 1 लाख 21 हजार 500 क्यूसेक पहुंच गया। बाद में यह आंकड़ा करीब 1.29 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की जानकारी दी गई।
गंडक नदी में बढ़ते पानी के कारण कुशीनगर के रेता क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
छितौनी तटबंध पर बढ़ा नदी का दबाव
कुशीनगर में छितौनी तटबंध के भैसहा गेज पर गंडक नदी चेतावनी बिंदु से ऊपर बहने लगी थी। नदी का बढ़ता जलस्तर तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर दबाव बढ़ा रहा था।
रिपोर्ट में छितौनी तटबंध के ठोकर नंबर दो और भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन पर कटान का खतरा भी बताया गया है। स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तटबंध के संवेदनशील हिस्सों का निरीक्षण किया।
इन जिलों में अचानक बाढ़ का खतरा
नेपाल और पूर्वी यूपी में लगातार बारिश के कारण कई जिलों को विशेष रूप से सतर्क किया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- गोरखपुर
- देवरिया
- कुशीनगर
- महराजगंज
- सिद्धार्थनगर
- संतकबीरनगर
- बस्ती
इन जिलों के निचले और जलभराव वाले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई गई। प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी।
योगी सरकार ने अधिकारियों को दिए निर्देश
भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए।
विशेष रूप से कमजोर मकानों, झोपड़ियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर ध्यान देने को कहा गया। जरूरत पड़ने पर ऐसे लोगों को राहत शिविरों या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम को फील्ड में रहने के निर्देश
राज्य सरकार ने नेपाल सीमा से लगे जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारियों को खुद फील्ड में जाकर हालात का आकलन करने को कहा गया।
जरूरत के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं लेने की व्यवस्था भी सक्रिय रखी गई।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे उफनती नदियों और नालों के पास न जाएं। जलभराव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।
खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर जाने की सलाह दी गई है।
बारिश और बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
नेपाल में बारिश और पूर्वी यूपी में लगातार खराब मौसम के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ी है। पिछले दिनों भी नेपाल से आने वाले पानी के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा सामने आया था।
ऐसे में प्रशासन की ओर से नदियों के जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।