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ससुर की हत्या में बहू शालू निकली बेगुनाह, फिर भी 2 दिन जेल में रहना पड़ा; कोर्ट में रिपोर्ट का इंतजार करते रहे परिजन

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
6 October 2026 1:04 PM 1 मिनट पठन 1025 Views
ससुर की हत्या में बहू शालू निकली बेगुनाह, फिर भी 2 दिन जेल में रहना पड़ा; कोर्ट में रिपोर्ट का इंतजार करते रहे परिजन

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में उस समय बड़ा मोड़ आया, जब पुलिस की जांच में उनकी बहू शालू की हत्या में भूमिका नहीं मिली। पुलिस ने उन्हें मामले में निर्दोष मानते हुए अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की बात कही, लेकिन कोर्ट में रिपोर्ट समय पर पेश नहीं हो सकी। इसके चलते शालू को तत्काल जेल से रिहाई नहीं मिल सकी।

5 सितंबर को मिला था दवा कारोबारी का शव

मामला कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट का है। यहां 5 सितंबर को दवा कारोबारी विनीत मिनोचा का शव उनके फ्लैट से मिला था। पुलिस जांच में उनके शरीर पर चाकू से किए गए कई गंभीर घाव मिले थे।

घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की। पूर्व नौकर विशाल गौतम और उसके साथी को गिरफ्तार किया गया था।

पहले बहू शालू पर लगा था हत्या की साजिश का आरोप

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी विशाल गौतम ने पूछताछ के दौरान शालू का नाम लिया था। इसके बाद शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

शालू के खिलाफ जिन बिंदुओं को शुरुआती जांच में अहम माना गया था, उनमें आरोपी का उसका नाम लेना, सुरक्षा गार्ड को गलत नाम बताकर अपार्टमेंट में प्रवेश, घर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग बंद होना और हत्या के लिए छह लाख रुपये की कथित सुपारी से जुड़े आरोप शामिल थे।

18 दिन की जांच में बदली पूरी कहानी

पुलिस की करीब 18 दिनों तक चली जांच में मामला अलग दिशा में जाता दिखाई दिया। पुलिस के अनुसार, जिन साक्ष्यों के आधार पर शालू को आरोपी बनाया गया था, वे बाद की जांच में कारोबारी के बेटे सुब्रत से जुड़े मिले।

पुलिस का दावा था कि हत्या की साजिश में सुब्रत की भूमिका सामने आई और शालू को इस मामले में फंसाया गया। इसके बाद पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और शालू के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट लगाने की प्रक्रिया शुरू की।

कोर्ट में रिपोर्ट का इंतजार करते रहे शालू के परिजन

पुलिस द्वारा शालू की भूमिका नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद उनके परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होगी और उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को शालू के परिजन कोर्ट में पूरे दिन इस इंतजार में रहे कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट दाखिल करेगी। लेकिन विवेचक के देर से कोर्ट पहुंचने के कारण रिपोर्ट पर सुनवाई नहीं हो सकी।

शनिवार और रविवार की छुट्टी बनी वजह

रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद शनिवार और रविवार को कोर्ट में अवकाश था। ऐसे में अंतिम रिपोर्ट पर तत्काल सुनवाई नहीं हो सकी और शालू को कम से कम दो दिन और जेल में रहना पड़ा।

परिजनों का कहना था कि अगर अंतिम रिपोर्ट समय पर दाखिल हो जाती तो शालू को शनिवार को ही जेल से बाहर आने का मौका मिल सकता था।

बाद में कोर्ट ने रिहाई का रास्ता साफ किया

बाद की घटनाओं में पुलिस ने शालू के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट तैयार की। कोर्ट के समक्ष पुलिस ने कहा कि हत्या की साजिश में शालू के खिलाफ पर्याप्त स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसके बाद 29 सितंबर को कोर्ट के आदेश पर शालू 22वें दिन जेल से बाहर आईं। कोर्ट ने 50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर उनकी रिहाई का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में जब भी कोर्ट या विवेचक द्वारा बुलाया जाएगा, शालू को उपस्थित होना होगा।

बेटे सुब्रत की भूमिका पर पुलिस का फोकस

पुलिस की जांच में हत्या की साजिश में कारोबारी के बेटे सुब्रत की भूमिका सामने आने की बात कही गई। पुलिस के अनुसार, सुब्रत पर कर्ज और आर्थिक दबाव भी था और जांच में उसके खर्च तथा कर्ज से जुड़े कई तथ्य सामने आए।

हालांकि हत्या के मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों और तथ्यों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।

शालू की गिरफ्तारी से रिहाई तक बदली जांच की दिशा

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि शुरुआत में जिस बहू को हत्या की साजिश में आरोपी बनाकर जेल भेजा गया, करीब 18 दिन की जांच के बाद पुलिस ने उसकी भूमिका से इनकार करते हुए अंतिम रिपोर्ट की प्रक्रिया शुरू की। रिपोर्ट दाखिल करने में हुई देरी के कारण उन्हें कुछ अतिरिक्त दिन जेल में रहना पड़ा और बाद में कोर्ट के आदेश से उनकी रिहाई हुई।

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