कानपुर: दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में आरोपी बनाई गई उनकी बहू शालू को पुलिस जांच में बेगुनाह पाया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर क्लीनचिट देने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन अदालत में अंतिम रिपोर्ट पर सुनवाई नहीं हो सकी। शनिवार और रविवार को अदालत में अवकाश होने के कारण शालू को दो दिन और जेल में रहना पड़ा।
पांच सितंबर को मिला था कारोबारी का शव
कल्याणपुर के इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के एक फ्लैट में 5 सितंबर को दवा कारोबारी विनीत मिनोचा का शव मिला था। पुलिस के मुताबिक उनके शरीर पर चाकू के 17 घाव थे। शुरुआती जांच में पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी को गिरफ्तार किया गया था।
पहले शालू पर लगा था साजिश का आरोप
पूछताछ के दौरान आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस ने शालू को भी गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर हत्या की साजिश में शामिल होने और कथित तौर पर सुपारी देने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, आगे की जांच में पुलिस को मिले साक्ष्यों का रुख बदल गया।
जांच में पति सुब्रत की भूमिका सामने आई
पुलिस जांच के मुताबिक हत्या की साजिश में शालू की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई, जबकि उसके पति सुब्रत की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए। पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार किया और शालू के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने की तैयारी की।
कोर्ट की सुनवाई में हुई देरी
शालू के परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी और उसे जल्द रिहाई मिल जाएगी। लेकिन विवेचक के देर से अदालत पहुंचने के कारण उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। महीने के अंतिम शनिवार और रविवार को अदालत बंद रहने के कारण मामले की सुनवाई सोमवार तक टल गई।
बाद में कोर्ट ने रिहाई का आदेश दिया
बाद की सुनवाई में पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। केस डायरी में शालू के खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने के पर्याप्त स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई। अदालत ने 50 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर उसकी रिहाई का आदेश दिया।
रिहाई के बाद शालू अपने भाई से लिपटकर रो पड़ी और लखनऊ स्थित अपने मायके चली गई। अदालत ने उसे मामले की जांच या सुनवाई के दौरान बुलाए जाने पर उपस्थित होने की शर्त के साथ रिहा किया।