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काशी में Zoom से हुआ पिंडदान, मॉरीशस से इटली तक विदेशों में बैठे श्रद्धालु हुए शामिल

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
9 October 2026 1:20 PM 1 मिनट पठन 125 Views
काशी में Zoom से हुआ पिंडदान, मॉरीशस से इटली तक विदेशों में बैठे श्रद्धालु हुए शामिल

Varanasi News: पितृ पक्ष के दौरान वाराणसी की काशी नगरी में एक अनोखे धार्मिक आयोजन की चर्चा है। मॉरीशस, इटली, इंग्लैंड, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और थाईलैंड समेत कई देशों में रहने वाले श्रद्धालुओं ने Zoom मीटिंग के जरिए काशी से जुड़कर अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण कराया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने विदेश में रहते हुए अपने पितरों का स्मरण किया, जबकि काशी में मौजूद प्रतिनिधियों ने धार्मिक विधि-विधान के अनुसार अनुष्ठान संपन्न कराया। <Cite refs={[“turn616828news7″,”turn616828search1”]}/>

Zoom के जरिए काशी से जुड़े विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पितृ पक्ष के अवसर पर विदेशों में रहने वाले सनातन धर्मावलंबियों ने ऑनलाइन माध्यम से काशी के घाटों पर आयोजित श्राद्ध कर्म में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने Zoom पर जुड़कर अपने नाम, गोत्र और पूर्वजों का स्मरण करते हुए संकल्प लिया।

इसके बाद वाराणसी में मौजूद पुरोहितों और प्रतिनिधियों ने पिंडदान तथा तर्पण की प्रक्रिया पूरी कराई। इस व्यवस्था के जरिए विदेश में रहने वाले लोग भी अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान में शामिल हो सके। <Cite refs={[“turn616828news7”]}/>

मॉरीशस से इटली तक के श्रद्धालु हुए शामिल

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस आयोजन में कई देशों के श्रद्धालु जुड़े। महामंडलेश्वर अरुणानंद गिरी के अनुसार, त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म में मॉरीशस से लगभग 250, इटली के मिलान से करीब 50 और इंग्लैंड से लगभग 20 श्रद्धालुओं सहित कुल करीब 850 लोग ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से शामिल हुए।

आयोजन का उद्देश्य विदेशों में रह रहे लोगों को पितृ कर्म की परंपराओं और उनके धार्मिक महत्व के बारे में जानकारी देना भी बताया गया। <Cite refs={[“turn616828news7”]}/>

काशी के घाट पर विधि-विधान से हुआ तर्पण

इस धार्मिक आयोजन में महामंडलेश्वर अरुणानंद गिरी की देखरेख में गंगा तट पर श्राद्ध कर्म और तर्पण कराया गया। ऑनलाइन जुड़े श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के नाम और गोत्र का स्मरण कर संकल्प लिया। इसके बाद काशी में मौजूद प्रतिनिधियों ने शास्त्रीय विधि के अनुसार पिंडदान और गंगा जल से तर्पण संपन्न कराया। <Cite refs={[“turn616828news7”]}/>

पितृ पक्ष में पिंडदान और तर्पण का क्या महत्व है?

हिंदू धार्मिक परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने दिवंगत परिजनों के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी, गया, प्रयागराज और हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों का पितृ कर्म में विशेष महत्व है। इन्हीं मान्यताओं के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से भी श्रद्धालु इन स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान कराने पहुंचते हैं। <Cite refs={[“turn616828news7″,”turn616828search3”]}/>

ऑनलाइन धार्मिक अनुष्ठानों से विदेशों में रहने वाले लोगों को जुड़ने का अवसर

विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन माध्यम से धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेना दूरी की चुनौती को कम कर सकता है। इस आयोजन में भी लोग अपने-अपने देशों से जुड़े और काशी में संपन्न हो रहे अनुष्ठान में संकल्प के जरिए शामिल हुए।

हालांकि, ऑनलाइन धार्मिक कर्मकांड को लेकर अलग-अलग तीर्थस्थलों और धार्मिक परंपराओं में अलग मत भी सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी भी विधि की धार्मिक मान्यता को लेकर संबंधित पुरोहित या परंपरा के मार्गदर्शन को समझना महत्वपूर्ण है।

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