कानपुर के प्रकाश पाल ने राज्यसभा सांसद बनने के बाद दैनिक भास्कर को दिए अपने पहले इंटरव्यू में बीजेपी में 36 साल तक रहने के बाद भी कभी चुनाव न लड़ने की वजह साझा की। अब पार्टी ने उन्हें यूपी में पिछड़ा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही राज्यसभा सांसद भी बनाया गया है। पाल का कहना है कि पार्टी ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है, जिसे वह पूरी निष्ठा से निभाएंगे। भविष्य में चुनाव लड़ने के सवाल पर भी उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह संगठन के लिए हमेशा काम करते रहेंगे, चाहे उन्हें कोई पद मिले या नहीं। बातचीत के दौरान उन्होंने CJP के प्रदर्शन से लेकर कांग्रेस के ज्ञानेश कुमार पर उठाए गए सवालों तक पर अपनी बात रखी। राज्यसभा सांसद बनने के बाद पहली बार प्रकाश पाल कानपुर के बर्रा स्थित अपने निवास पहुंचे। वहां सबसे पहले उन्होंने आराधना मंदिर में हनुमान जी के चरणों में अपना सर्टिफिकेट रखा। इसके बाद हनुमान जी को लड्डू का भोग लगाया और शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। फिर वह अपने निवास पहुंचे। अब पढ़िए, राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने दैनिक भास्कर को दिए सवालों के जवाब सवाल: राज्यसभा सांसद बनने के बाद कानपुर के प्रति आपकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। इसे किस तरह देखते हैं? जवाब: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संकल्पित हैं। विकसित राष्ट्र तभी बन सकता है, जब सभी राज्य विकसित हों और राज्यों के सभी जिले विकसित हों। कानपुर भी विकसित होगा, उत्तर प्रदेश के सभी जिले विकसित होंगे और सभी राज्य विकसित होंगे, तभी विकसित भारत का सपना पूरा होगा। सांसद के नाते मैं अपने गृह जनपद को विकसित बनाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। मेरा लक्ष्य विकसित कानपुर, विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत है। सवाल: भाजपा में 36 साल काम करने के बाद सीधे राज्यसभा पहुंचने की उम्मीद थी? क्या कभी सोचा था कि सांसद बनेंगे? जवाब: राजनीति में आने के बाद यह उम्मीद रहती है कि पार्टी में काम करेंगे तो कोई जिम्मेदारी मिलेगी। हम संगठन के लिए काम करने वाले लोग हैं। मैं संघ का प्रचारक रहा और अलग-अलग जगहों पर संगठन मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई। ऐसे में अपना कोई निर्वाचन क्षेत्र तैयार नहीं कर सकता था। मेरी भूमिका संगठन के काम की रही। मुझे उम्मीद थी कि पार्टी उचित समय पर किसी सदन में भेजने की जिम्मेदारी देगी। आज राष्ट्रीय और प्रांतीय नेतृत्व ने मुझे राज्यसभा के लिए यह जिम्मेदारी सौंपी है। सवाल: अब सांसद बनने के बाद क्या भविष्य में चुनाव लड़ने के लिए अपना कोई निर्वाचन क्षेत्र तैयार करेंगे? जवाब: मेरी पहले भी संगठन के काम में रुचि रही है। इस नए दायित्व के साथ भी संगठन का काम ही मेरी पहली प्राथमिकता है। सवाल: OBC एक्ट बनाने को लेकर विपक्ष के नेता ने ऐलान किया, इसपर क्या कहेंगे ? जवाब: ये वे लोग हैं, जिन्हें पिछड़े वर्ग ने नकार दिया है। कांग्रेस लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रही, लेकिन पिछड़ों को उनका अधिकार देने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया। संविधान लागू होने के समय से ही पिछड़ों को उनका हक मिलना चाहिए था। काका कालेलकर आयोग बना, लेकिन उसकी रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जनता पार्टी के समय 1977 में मंडल आयोग बना और 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान भी इस दिशा में काम आगे नहीं बढ़ा। कांग्रेस ने पिछड़ों की चिंता नहीं की। अब जब उसे राजनीतिक समर्थन नहीं मिल रहा, तो वह पिछड़े वर्ग को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। पिछड़ों को उनके अधिकार देने में कांग्रेस ने लंबा इंतजार कराया है। अब पिछड़े कांग्रेस को आगे बढ़ने का मौका नहीं देंगे। सवाल: उत्तर प्रदेश में सपा पिछड़ों की राजनीति और PDA की बात करती है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: समाजवादी पार्टी चार बार सरकार में रही। अगर उसने वास्तव में पिछड़ों के हित में काम किया होता, तो पिछड़े उसे क्यों नकारते? उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग करीब 55 प्रतिशत आबादी का हिस्सा है। जिसके साथ यह वर्ग खड़ा होगा, उसकी सरकार बनने की संभावना मजबूत होगी। भाजपा के साथ पिछड़ा वर्ग आया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी को समर्थन मिला। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को देश में 282 सीटें और उत्तर प्रदेश में 73 सीटें मिली थीं। सपा पांच सीटों पर सिमट गई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा की सीटें घटकर 47 रह गईं। बाद में गठबंधन करने के बावजूद सफलता नहीं मिली। इससे पता चलता है कि पिछड़ा वर्ग सपा की राजनीति से संतुष्ट नहीं है। हमारी सरकार केंद्र में तीसरी बार और उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है। अगर पिछड़ा वर्ग भाजपा के साथ नहीं होता, तो हमारी सरकार कैसे बनती? मैंने पहले भी कहा है कि PDA धोखा है। राज्यसभा चुनाव में भी सपा की प्राथमिकताएं सामने आ गईं। मेरे अनुसार, पार्टी ने परिवार और दौलतमंद लोगों को प्राथमिकता दी। ऐसे में पिछड़े और दलित वर्ग के हितों की बात कहां रह जाती है? सपा अब चुनाव जीतने की उम्मीद कम होने के कारण नए नाम और नए ब्रांड के साथ PDA लेकर आई है। मैं कहता हूं कि PDA का मतलब है- P यानी पैसा, D यानी देने वाले और A यानी आओ। यानी ‘पैसा देने वाले आओ’। मेरे अनुसार, यही सपा के PDA की वास्तविक राजनीति है। सवाल: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस और CJP भी विरोध कर रहे हैं। इस पर क्या कहेंगे? जवाब: सीजेपी कोई राजनैतिक दल नहीं है, कहां बैठकर इसे विदेशी ताकतों ने इसे बनाया है। ये भारत को अस्थिर करने के लिए बने हैं। जॉर्ज सोरोस और भारत विरोधी ताकतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उनका एजेंडा सफल नहीं हो पा रहा है। सीजेपी ने कौन सा चुनाव लड़ लिया है, इंठी गठबंधन के लोग विदेश में बैठकर बनाए गए संगठन को आगे कर रहें है, ये लोग सिविल वार कराना चाहते हैं, इनका कोई ऐजेंडा नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ऐसे संगठनों को आगे करके अभियान चला रहे हैं। उनके अनुसार, इनका उद्देश्य देश में अस्थिरता पैदा करना है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं। जिनका विरोध आज विपक्ष और इंडी गठबंधन के लोग मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध कर रहे है। ज्ञानेश कुमार लोकसभा चुनाव के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उनसे पहले भी कई राज्यों में कांग्रेस चुनाव हारती रही है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर रही है। ऐसे में हर हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। चुनाव आयोग की ओर से कराए गए SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के कारण मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाए गए हैं। कुछ राजनीतिक दलों को इससे परेशानी है, क्योंकि वे अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची में बनाए रखना चाहते हैं। चुनाव आयोग के SIR का आधिकारिक अर्थ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है। लेकिन मैं इसका एक राजनीतिक अर्थ भी बताता हूं। मेरे अनुसार, S का मतलब ‘सिर्फ’, I का मतलब ‘इंडियन’ और R का मतलब ‘रहेंगे’ है। यानी ‘सिर्फ इंडियन रहेंगे’। मेरा मानना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए।
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