मॉडल श्रद्धा दुबे पुलिस की गिरफ्त में है। लिव-इन पार्टनर शिवा शर्मा की मौत के बाद से ही वो फरार थी। आज उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसके बयानों के बाद तय होगा कि वो शिवा की मौत को सुसाइड मान रही है या हत्या। इस वक्त श्रद्धा शिवा की मौत केस में प्राइम सस्पेक्ट है। लेकिन, वह शुरुआत से क्रिमिनल बैकग्राउंड से नहीं रही। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने और मशहूर होने की चाहत में वह सट्टा वसूली से लेकर यूपी के कई गैंगस्टरों से जुड़ गई। मुख्तार अंसारी के गैंग से भी उसका नाम जुड़ा। फिर वह धीरे-धीरे मॉडलिंग की दुनिया में आ गई। इससे पहले श्रद्धा ने सियासत में भी किस्मत आजमाई। शिवपाल यादव से जुड़ी। यह वो दौर था, जब शिवपाल और अखिलेश के बीच अदावत थी। शिवपाल यादव ने अलग प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बना ली थी। श्रद्धा इस पार्टी के कामकाज संभाल रही थी। उसका पद क्या था? उसको शिवपाल से किसने मिलवाया? यह अभी सामने नहीं आ सका है। कई नेताओं से जान-पहचान तो बढ़ा ली, लेकिन सियासत में श्रद्धा के पैर नहीं जम सके। हालांकि, सियासत की पहचान का फायदा उसे मिला। यूपी से लेकर हरियाणा तक के बड़े-बड़े इवेंट में वह स्पेशल गेस्ट बनकर पहुंचने लगी। लेकिन, चमचमाती लाइफ स्टाइल के पीछे श्रद्धा के इरादे उसको आज सलाखों के पीछे लेकर पहुंच गए हैं। पढ़िए रिपोर्ट… रायबरेली की रहने वाली श्रद्धा जब 14-15 साल की थी, तब लखनऊ आकर एक रिश्तेदार के घर रहने लगी थी। अपने घर (रायबरेली) कभी-कभार ही जाती थी। 2010 में शादी, फिर पति से झगड़ों की वजह से श्रद्धा एक बार फिर अकेली हो गई। वह अपने करियर में संघर्ष कर रही थी। उसकी सियासत में एंट्री 2016 में हुई, जब कुछ नेताओं ने उसकी मुलाकात सपा नेता शिवपाल यादव से करवाई। उस समय शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच विवाद शुरू हो चुका था। बाद में शिवपाल ने सपा छोड़कर ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी’ बना ली थी। श्रद्धा भी उनकी पार्टी से जुड़ गई थी। पार्टी के कामकाज देखते-देखते वह शिवपाल के बेटे आदित्य यादव के संपर्क में भी आ गई। श्रद्धा इस तरह से चुनाव लड़ने की तैयारी करने लगी थी। लोग ठाठ-बाट देखकर पूछते- क्या नेता बनने का इरादा है… रायबरेली में श्रद्धा के मोहल्ले के लोग बताते हैं- 2016 में वह अक्सर अपने घर आती थी। ठाठ-बाट से रहती थी। इसलिए लोगों की निगाह में जल्दी आ गई थी। श्रद्धा यहां लोगों के बीच अक्सर शिवपाल यादव और उनके बेटे आदित्य यादव के साथ होने वाले कार्यक्रमों की चर्चा करती थी। जब लोग उससे पूछते कि क्या चुनाव लड़ने का इरादा है? इस पर वह हंसते हुए कहती- भविष्य किसने देखा है? क्या पता आगे चलकर मैं नेता बन जाऊं? शिवपाल और आदित्य के साथ उसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। इसके बाद श्रद्धा पार्टी से अलग हो गई। बाद में उसने कुछ दूसरे नेताओं से नजदीकियां बढ़ाईं। इनके जरिए उसे फैशन और मॉडलिंग के क्षेत्र में काम मिलने लगा। फिर उसने यूपी की ब्यूरोक्रेसी में कुछ बड़े अधिकारियों के बीच भी अपनी पैठ जमानी शुरू की। धीरे-धीरे वह पॉलिटिक्स और ब्यूरोक्रेसी के कई दिग्गजों की खास बन गई। लखनऊ यूनिवर्सिटी ने बुलाया, जज बनाया श्रद्धा का लखनऊ में धीरे-धीरे रसूख बढ़ता गया। रेस्टोरेंट से लेकर ब्यूटी पार्लर तक के उद्घाटन में चीफ गेस्ट के रूप में उसे बुलाया जाने लगा। एक बार तो लखनऊ यूनिवर्सिटी ने उसे एक कार्यक्रम में जज की जिम्मेदारी दी थी। यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्टी में 27 फरवरी, 2020 को कल्चरल और स्पोर्ट्स प्रोग्राम था। इसमें फैशन शो और ‘मिस्टर एंड मिस संस्कृति सुरभि’ इवेंट के लिए श्रद्धा को जज बनाया गया था। श्रद्धा को बुलाने के लिए यूनिवर्सिटी ने जो लेटर भेजे, उसमें लिखा था- आपकी सम्मानित जूरी के रूप में उपस्थिति प्रेरणा का स्रोत होगा। इससे प्रतिभागियों और सदस्यों को अमूल्य अनुभव मिलेगा। जिस मां-बाप से कोई मतलब नहीं, उन्हें आदर्श बताती है श्रद्धा दुबे की पर्सनल लाइफ बहुत उलझी हुई है। वह रील लाइफ में जितना बोल्ड और बिंदास दिखती, हकीकत में ऐसा नहीं है। 2024 तक श्रद्धा यूपी, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा से लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में गई, वहां फैशन और मॉडलिंग से जुड़े इवेंट में हिस्सा लिया। कई जगह सम्मानित भी किया गया। वह अक्सर अपनी स्पीच में कहती थी- मेरी सफलता के पीछे मेरे माता-पिता का सहयोग है। उनकी बदौलत ही मैं मॉडलिंग की फील्ड में बेहतर कर पा रही हूं। लेकिन, हकीकत इससे अलग है। श्रद्धा के पिता एसके दुबे जेई पद से रिटायर्ड हैं। श्रद्धा जब 7 साल की थी, तभी उसकी मां पुष्पा देवी की मौत हो गई थी। पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। सौतेली मां से श्रद्धा की बहुत नहीं बनती थी इसलिए वह बाद में लखनऊ में शिफ्ट हो गई थी। शादी के बाद जब श्रद्धा का ससुराल से मनमुटाव हुआ, तब परिवार के लोग चाहते थे कि मामला तलाक तक न जाए। लेकिन, श्रद्धा ने तलाक का फैसला किया था। श्रद्धा के इन्हीं फैसलों के चलते उसके पिता भी उससे बहुत मतलब नहीं रखते थे। श्रद्धा का नाम जब शिवा की हत्या में आया, तब उन्होंने मीडिया से कहा- बेटी से कोई मतलब नहीं है। वह न ही यहां आती है और न ही हमारी उनसे कोई बातचीत होती है। हालांकि, मोहल्ले के लोग बताते हैं कि इसी साल श्रद्धा और इनके परिवार के बीच मनमुटाव कम हुआ था, वह घर भी आई थी। पहले वह नहीं आती थी। —————————– यह खबर भी पढ़ें- श्रद्धा दुबे बुर्का पहनकर पुलिस को चकमा देती रही, गुमराह करने के लिए नेपाल जाकर वापस आ गई श्रद्धा दुबे…9 अक्टूबर की रात फरार हुई। अगले दिन बहराइच में भारत-नेपाल बॉर्डर पहुंची। अपनी गाड़ी छोड़ दी। नेपाल में अलग-अलग जगहों पर रही। 12 घंटे के अंतराल पर तीन वीडियो जारी किए। सीसीटीवी फुटेज में दिखी। नेपाल से वापस अपने घर यानी रायबरेली पहुंची। श्रद्धा इतने दिनों तक कैसे बचती रही….पढ़िए पूरी रिपोर्ट
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