यह कहानी सिर्फ पिंटू के घर लौटने की नहीं, बल्कि उस इंसानियत की भी है, जिसने एक अनजान बच्चे को सहारा दिया. साथ ही यह उस मां के इंतजार की कहानी है, जिसकी आंखें 31 साल बाद बेटे को देखकर नम हो गईं.
Source: Read Full Article
यह कहानी सिर्फ पिंटू के घर लौटने की नहीं, बल्कि उस इंसानियत की भी है, जिसने एक अनजान बच्चे को सहारा दिया. साथ ही यह उस मां के इंतजार की कहानी है, जिसकी आंखें 31 साल बाद बेटे को देखकर नम हो गईं.
Source: Read Full Article