स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से पूछा है कि उसके संबद्ध स्कूलों में यातायात प्रबंधन से जुड़े न्यायालय के आदेशों का पालन किस तरह सुनिश्चित कराया जाएगा। कोर्ट ने बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारी को अगली सुनवाई पर उपस्थित होकर प्रभावी उपाय बताने का निर्देश दिया है। साथ ही, आदेशों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई को मामले में पक्षकार बनाने का मकसद उसके संबद्ध स्कूलों में पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराना है। यदि कोई स्कूल आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान उप परिवहन आयुक्त ने अदालत को बताया कि स्कूली वाहनों की जांच जारी रहेगी। वाहनों में मोटर वाहन अधिनियम और संबंधित नियमों का पालन भी सुनिश्चित कराया जाएगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जांच अभियान लगातार चलना चाहिए। इसे केवल एक बार की कार्रवाई मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। न्यायालय को बताया गया कि यातायात संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए गठित समिति के अध्यक्ष रहे लखनऊ के पुलिस उपायुक्त (यातायात) का तबादला हो चुका है। इस पर कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को अपर महाधिवक्ता से विचार-विमर्श कर समिति के लिए नए अध्यक्ष को नामित करने का निर्देश दिया। नए अध्यक्ष का पद पुलिस उपायुक्त स्तर से नीचे का नहीं होना चाहिए। स्कूलों के भवन निर्माण के नक्शों से संबंधित जानकारी पड़ोसी जिलों से नहीं मिलने पर कोर्ट ने राज्य सरकार को दस दिन का अतिरिक्त समय दिया है। नक्शे उपलब्ध होने के बाद अपर महाधिवक्ता, उनके सहयोगियों और न्याय मित्र को उनकी जांच कर अगली सुनवाई पर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
Source: Read Full Article