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UP Politics: अखिलेश यादव के ‘PDA में Pandit’ बयान पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, 2027 चुनाव से पहले तेज हुई सियासी जंग

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
8 August 2026 1:58 PM 1 मिनट पठन 30156 Views
UP Politics: अखिलेश यादव के ‘PDA में Pandit’ बयान पर ब्रजेश पाठक का पलटवार, 2027 चुनाव से पहले तेज हुई सियासी जंग

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 8 अगस्त को अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अब ब्राह्मण समुदाय का शुभचिंतक बनने की कोशिश कर रहे हैं।

पाठक ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव की एक पुराने पत्रकार से हुई बातचीत का संदर्भ दिया। उन्होंने दावा किया कि उस बातचीत में पत्रकार की जाति को लेकर टिप्पणी की गई थी और इसी आधार पर उन्होंने अखिलेश की ब्राह्मण राजनीति पर सवाल उठाए।

पाठक ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों का जवाब विचारों और तथ्यों से दिया जाना चाहिए, व्यक्तिगत कटुता या आरोपों से नहीं।


🟢 अखिलेश यादव का ‘PDA में Pandit’ बयान

इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत उस समय और तेज हुई जब अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समुदाय के लिए पार्टी का outreach बढ़ाया।

अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी के PDA में:

  • P — पिछड़ा
  • D — दलित
  • A — अल्पसंख्यक

के साथ P को Pandit यानी ब्राह्मण समुदाय के लिए भी समझा जा सकता है।

यह बयान 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा द्वारा अपने सामाजिक गठबंधन को व्यापक बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


🏛️ ब्राह्मण सम्मेलन में अखिलेश ने क्या कहा?

अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार विपक्षी कार्यकर्ताओं, ब्राह्मणों और कुछ धार्मिक नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी को Janeshwar Mishra Park में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में किया गया। ये आरोप अखिलेश यादव के हैं।


🔴 ब्रजेश पाठक का पलटवार

ब्रजेश पाठक ने जवाब में अखिलेश यादव पर वंशवादी राजनीति का आरोप लगाया।

उन्होंने समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया के परिवारवाद विरोधी विचारों का हवाला देते हुए कहा कि लोहिया परिवार आधारित राजनीति के खिलाफ थे और सत्ता को एक परिवार तक सीमित करने वाली राजनीति उनके सिद्धांतों के विपरीत थी।

पाठक ने BJP की राजनीति को “Nation First, Organisation Foremost और Antyodaya” के सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि उनका दावा है कि BJP की राजनीति का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और अवसर पहुंचाना है।


⚔️ BJP vs SP: असली राजनीतिक लड़ाई क्या है?

यह विवाद केवल नेताओं की बयानबाजी तक सीमित नहीं है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में अलग-अलग पार्टियां अपने सामाजिक और जातीय समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

BJP का हमला

BJP की ओर से SP पर मुख्य रूप से:

  • परिवारवाद
  • कथित वोट-बैंक राजनीति
  • ब्राह्मण समुदाय को चुनावी समय पर साधने

जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। ये राजनीतिक आरोप हैं, स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं।

SP की रणनीति

अखिलेश यादव की हालिया बयानबाजी से संकेत मिलता है कि SP अपने पारंपरिक PDA framework को व्यापक सामाजिक गठबंधन में बदलने की कोशिश कर रही है, जिसमें ब्राह्मण समुदाय तक भी पहुंच शामिल है।


🟣 Mayawati भी मैदान में

इस विवाद में BSP प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव पर हमला किया है।

मायावती ने SP के PDA में Pandit को शामिल करने की कोशिश को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक रुख बदलती रहती है। उन्होंने इसे चुनावी राजनीति से जोड़कर निशाना साधा।

इस तरह उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल BJP, SP और BSP तीनों की बयानबाजी में सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।

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