Friday, 14 August 2026

हमीरपुर में Gen Alpha का जोरदार प्रदर्शन: स्कूल की सड़क के लिए 5 KM पैदल चले बच्चे, कलेक्ट्रेट गेट पर दिया धरना; अब प्रशासन ने बढ़ाई उम्मीद

Hamirpur में स्कूल तक पक्की सड़क की मांग को लेकर तिरंगा लेकर प्रदर्शन करते स्कूली बच्चे

हमीरपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में इन दिनों स्कूली बच्चों का एक अनोखा विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। चंदूपुर ग्राम पंचायत और आसपास के इलाकों के स्कूली बच्चों ने अपने स्कूल तक पक्की सड़क बनवाने की मांग को लेकर तिरंगा यात्रा निकाली और करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे।

बच्चों के साथ उनके माता-पिता और गांव के अन्य लोग भी मौजूद थे। हाथों में तिरंगा, पोस्टर और बैनर लिए बच्चों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी। बच्चों की मांग बेहद बुनियादी थी—स्कूल तक ऐसी पक्की सड़क बनाई जाए, जिस पर वे बारिश के दौरान भी सुरक्षित तरीके से आ-जा सकें।

आखिर क्यों सड़क के लिए प्रदर्शन करने को मजबूर हुए बच्चे?

चंदूपुर इलाके में स्कूल तक जाने वाला रास्ता लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क की स्थिति खासकर मानसून के दौरान बेहद खराब हो जाती है। बारिश होने पर कच्चा रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है।

स्कूल जाने वाले बच्चों को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। कीचड़ में चलने के कारण उनकी स्कूल यूनिफॉर्म गंदी हो जाती है और जूते खराब हो जाते हैं। कई बार रास्ते पर इतना पानी भर जाता है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। किसान, बुजुर्ग और बीमार लोगों को भी इसी खराब रास्ते के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के समय गांव का बाहरी इलाकों से संपर्क भी प्रभावित हो जाता है।

तिरंगा लेकर निकली ‘Gen Alpha’ की यात्रा

अपनी मांग को प्रशासन तक पहुंचाने के लिए बच्चों ने तिरंगा यात्रा निकाली। स्कूली छात्र-छात्राएं और ग्रामीण हाथों में राष्ट्रीय ध्वज, पोस्टर और बैनर लेकर कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए।

करीब 5 किलोमीटर की यात्रा के बाद प्रदर्शनकारी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां बच्चों ने नारे लगाए और जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट के सामने बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस प्रदर्शन को कई रिपोर्टों में Gen Alpha Protest के रूप में बताया गया है। यानी ऐसी पीढ़ी के बच्चे, जिन्हें आम तौर पर डिजिटल दौर में जन्मी नई पीढ़ी के तौर पर देखा जाता है, उन्होंने अपने रोजमर्रा के नागरिक मुद्दे को लेकर सीधे प्रशासन के सामने आवाज उठाई।

बच्चों ने क्या मांग रखी?

प्रदर्शन के दौरान बच्चों और ग्रामीणों की मुख्य मांग थी कि चंदूपुर से हमीरपुर मार्ग और स्कूल तक जाने वाले रास्ते का पक्का निर्माण कराया जाए।

प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों पर भी सड़क और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर संदेश लिखे थे। एक संदेश में किसानों, छात्रों और बीमार लोगों की परेशानी का जिक्र करते हुए चंदूपुर-हमीरपुर मार्ग के निर्माण की मांग की गई।

बच्चों का कहना था कि अगर स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही खराब रहेगा तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। बारिश में कीचड़ के कारण उन्हें रोजाना कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

कलेक्ट्रेट गेट पर बैठ गए बच्चे

कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद बच्चों और ग्रामीणों ने मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं होता, तब तक वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।

स्थिति को संभालने के लिए पुलिसकर्मी भी कलेक्ट्रेट परिसर में तैनात किए गए। SDM सदर अभिषेक कुमार और क्षेत्राधिकारी यशपाल सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया।

शुरुआत में प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। बाद में अधिकारियों की ओर से सड़क निर्माण को लेकर आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया।

सड़क का प्रोजेक्ट कई साल से लंबित

प्रशासन की ओर से सड़क को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। हमीरपुर के ADM राकेश कुमार के अनुसार, ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा था।

उन्होंने बताया कि संबंधित सड़क परियोजना कई वर्षों से लंबित है। सड़क निर्माण की अनुमानित लागत करीब 1 करोड़ रुपये बताई गई है।

ADM के मुताबिक, सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से NOC यानी No Objection Certificate मिल चुका है। प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और उसके बाद सड़क निर्माण का काम आगे बढ़ाया जाएगा।

करीब 3 हजार लोगों को सड़क का फायदा

रिपोर्टों के मुताबिक जिस सड़क को लेकर विवाद और प्रदर्शन हुआ, वह चंदूपुर सहित आसपास की कई बस्तियों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है।

बताया गया है कि इस रास्ते से करीब 3,000 लोगों को लाभ मिल सकता है। लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की खराब स्थिति बारिश के दौरान और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से सिर्फ स्कूली बच्चों को ही सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि गांव के किसानों, मरीजों, बुजुर्गों और दूसरे ग्रामीणों की आवाजाही भी आसान होगी।

ग्रामीणों का आरोप-बारिश आते ही मिट्टी बह जाती है

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले भी रास्ते को बेहतर बनाने के लिए मिट्टी डलवाई गई थी, लेकिन बारिश के बाद स्थिति दोबारा खराब हो गई।

कच्चा रास्ता बारिश का पानी जमा होने के बाद कीचड़ में बदल जाता है। ऐसे में बच्चों को स्कूल जाने में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण को लेकर उन्हें पहले भी कई बार आश्वासन मिले, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।

एक छात्रा ने पढ़ाई छोड़ने की बात भी कही

प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा ने सड़क की खराब स्थिति के कारण पढ़ाई पर पड़ने वाले असर का जिक्र किया। रिपोर्ट के अनुसार, एक छात्रा ने दावा किया कि रास्ते की समस्या के कारण उसे स्कूल छोड़ना पड़ा।

यह बात इस पूरे मामले को और गंभीर बना देती है, क्योंकि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की कमी सीधे बच्चों की शिक्षा को प्रभावित कर सकती है।

ADM ने प्रदर्शन को लेकर क्या कहा?

ADM राकेश कुमार ने बताया कि प्रशासन ने ग्रामीणों की मांग से जुड़े ज्ञापन को प्राप्त किया है और सड़क निर्माण की प्रक्रिया पहले से विचाराधीन है।

उन्होंने बताया कि वन विभाग से NOC मिल चुका है और करीब एक करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी करके निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

हालांकि ADM ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व बच्चों को आगे करके मामले को अनावश्यक रूप से बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान बच्चों के पीछे परिवार के सदस्यों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया।

प्रदर्शन को मिला Gen Z का समर्थन

हमीरपुर के बच्चों के प्रदर्शन को सोशल मीडिया पर भी काफी ध्यान मिला। Gen Alpha के इस आंदोलन को Gen Z से जुड़े लोगों की ओर से समर्थन भी मिला।

Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बच्चों के प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए उनकी पहल की सराहना की। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी बच्चों को स्कूल जाने के लिए सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की मांग को लेकर प्रदर्शन क्यों करना पड़ रहा है।

उन्होंने ग्रामीण इलाकों के बच्चों और सरकारी स्कूलों की सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

अब अधिकारियों के गांव पहुंचने से बढ़ी उम्मीद

बच्चों के प्रदर्शन के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आने पर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हुई। अधिकारियों की टीम ने गांव पहुंचकर सड़क की स्थिति का जायजा लिया।

इससे ग्रामीणों और बच्चों में सड़क निर्माण को लेकर उम्मीद बढ़ी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सरकार से मंजूरी कब मिलती है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन पर निर्माण कार्य कब शुरू होता है।

सड़क की मांग से उठे कई बड़े सवाल

हमीरपुर की यह घटना सिर्फ एक सड़क के निर्माण की मांग तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है।

एक तरफ बच्चे बेहतर शिक्षा और भविष्य की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें स्कूल तक पहुंचने के लिए बारिश और कीचड़ से जूझना पड़ रहा है। यही वजह है कि इस प्रदर्शन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

बच्चों का शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर जिला प्रशासन तक पहुंचना इस घटना का सबसे खास पहलू रहा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

निष्कर्ष

हमीरपुर के चंदूपुर में स्कूली बच्चों ने यह साफ कर दिया कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि स्कूल तक एक पक्की और सुरक्षित सड़क चाहिए। करीब 5 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा से लेकर कलेक्ट्रेट गेट पर धरने तक बच्चों ने अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी।

अब प्रशासन के पास सड़क निर्माण का प्रस्ताव, वन विभाग की NOC और करीब 1 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना का आधार मौजूद है। सरकार की मंजूरी और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि निर्माण कार्य वास्तव में शुरू होता है, तो यह आंदोलन ग्रामीण बच्चों की एक बड़ी जीत मानी जाएगी।

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