लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कार्डियो वैस्कुलर थौरेसिक सर्जरी (CVTS) विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एपी जैन को निलंबित कर दिया गया है। विभाग के पांच प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों ने उनके खिलाफ अभद्रता और मानसिक रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर संस्थान प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।
संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने निलंबन का आदेश जारी किया है। निलंबन अवधि में डॉ. एपी जैन को कुलसचिव कार्यालय से संबद्ध किया गया है। वहीं CVTS विभाग के संचालन की अतिरिक्त जिम्मेदारी डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह को दी गई है।
पांच रेजिडेंट डॉक्टरों ने की शिकायत
Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार CVTS विभाग के पांच प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ लिखित शिकायत की। शिकायत में डॉक्टरों ने अभद्र व्यवहार और मानसिक रूप से परेशान करने जैसे आरोप लगाए हैं।
शिकायत मिलने के बाद संस्थान प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
दो सदस्यीय कमेटी करेगी आरोपों की जांच
संस्थान प्रशासन ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेगी।
निदेशक डॉ. सीएम सिंह के मुताबिक, अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसका मतलब है कि फिलहाल निलंबन प्रशासनिक जांच के दौरान उठाया गया कदम है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही आएगा।
डीन को मिली CVTS विभाग की जिम्मेदारी
डॉ. एपी जैन के निलंबन के बाद CVTS विभाग के संचालन की जिम्मेदारी डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह को अतिरिक्त रूप से सौंपी गई है।
वह विभागाध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे और विभाग की नियमित चिकित्सा एवं प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य जांच के दौरान विभाग का कामकाज प्रभावित न होने देना है।
देर रात फोन और WhatsApp पर निर्देश देने का आरोप
रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायत में काम के समय के अलावा देर रात तक फोन और WhatsApp के जरिए निर्देश देने का भी आरोप लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ताओं ने कहा कि डॉक्टर देर रात फोन पर बात करते थे और मरीजों से संबंधित निर्देश WhatsApp पर भेजते थे। कुछ रेजिडेंट डॉक्टरों के माता-पिता ने भी मामले को लेकर अधिकारियों से गुहार लगाई है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर नहीं हुई है।
पहले भी शिकायतें सामने आने का दावा
डॉ. एपी जैन के खिलाफ पहले भी शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार नर्सिंग एसोसिएशन ने भी उनके खिलाफ शासन और महिला आयोग तक शिकायतें भेजकर कार्रवाई की मांग की थी।
नर्सिंग एसोसिएशन का आरोप है कि पिछली शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। संघ ने पुराने मामलों को भी दोबारा उठाया है।
महिला और मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा था मामला
रिपोर्ट के अनुसार नर्सिंग कर्मचारियों की ओर से पहले की शिकायतें महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंची थीं।
शिकायतकर्ताओं ने विशाखा कमेटी के समक्ष भी अपनी शिकायत रखी थी। उनके बयान दर्ज किए गए थे और बयान की वीडियोग्राफी भी हुई थी।
हालांकि, इन पुराने मामलों से जुड़े सभी आरोपों और उनकी जांच की अंतिम स्थिति के बारे में स्वतंत्र आधिकारिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
शिकायत पर पहले नोटिस जारी होने का दावा
Live Hindustan की रिपोर्ट में नर्सिंग एसोसिएशन के हवाले से कहा गया है कि पिछली शिकायतों के बाद संस्थान प्रशासन ने डॉ. एपी जैन को नोटिस जारी किया था।
संघ का आरोप है कि मामले को उस समय आगे नहीं बढ़ाया गया। अब रेजिडेंट डॉक्टरों की नई शिकायत के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आया है।
संस्थान प्रशासन ने क्या कहा?
संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायत में विभागाध्यक्ष पर आरोप लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि डॉ. जैन को विभागाध्यक्ष के पद से निलंबित किया गया है और आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इससे साफ है कि प्रशासन फिलहाल मामले की जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहा है।
अस्पताल का कामकाज कैसे चलेगा?
डॉ. एपी जैन के निलंबन के बाद विभाग की जिम्मेदारी डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह को दी गई है। इससे CVTS विभाग में मरीजों के इलाज और अन्य चिकित्सकीय गतिविधियों को जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायत और जांच के बीच अस्पताल प्रशासन के लिए यह जरूरी होगा कि मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर किसी तरह का असर न पड़े।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका दो सदस्यीय जांच कमेटी की होगी। कमेटी रेजिडेंट डॉक्टरों के आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान की जांच कर सकती है।
जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और प्रशासन को आगे किस तरह की कार्रवाई करनी चाहिए।
फिलहाल किसी भी आरोप को अंतिम रूप से साबित मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि जांच अभी जारी है।
मेडिकल संस्थान में प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल
यह मामला केवल एक विभागाध्यक्ष के निलंबन तक सीमित नहीं है। रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की शिकायतों ने मेडिकल संस्थानों में कार्यस्थल का माहौल, वरिष्ठ-जूनियर संबंध और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
ऐसे मामलों में संस्थान के लिए जरूरी होता है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और संबंधित सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।
निष्कर्ष
लखनऊ के लोहिया संस्थान के CVTS विभागाध्यक्ष डॉ. एपी जैन को पांच रेजिडेंट डॉक्टरों की शिकायत के बाद निलंबित किया गया है। डॉक्टरों ने अभद्रता और मानसिक रूप से परेशान करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
संस्थान ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई है और CVTS विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह को दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
वहीं, डॉ. जैन के खिलाफ पहले भी नर्सिंग कर्मचारियों की शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। अब सभी की नजर जांच कमेटी की रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
FAQs
लोहिया संस्थान के CVTS विभागाध्यक्ष कौन सस्पेंड हुए?
CVTS विभागाध्यक्ष डॉ. एपी जैन को निलंबित किया गया है।
डॉ. एपी जैन पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
पांच रेजिडेंट डॉक्टरों ने अभद्र व्यवहार और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में देर रात फोन और WhatsApp के जरिए निर्देश देने की बात भी कही गई है।
मामले की जांच कौन करेगा?
संस्थान ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की है।
CVTS विभाग की जिम्मेदारी किसे मिली?
डॉ. एपी जैन के निलंबन के बाद CVTS विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी डीन डॉ. प्रद्युम्न सिंह को दी गई है।
क्या आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद स्पष्ट होगी। संस्थान ने भी कहा है कि आगे की कार्रवाई जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर होगी।