Tuesday, 25 August 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय की डायरी में SIT जांच का जिक्र, सख्ती के बाद गोपाल राव ने खोली जुबान?

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़े कथित चोरी और अनियमितता के मामले में अब पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय की डायरी में दर्ज विवरण चर्चा में है। सामने आए विवरण में SIT की पूछताछ, गोपाल राव से बातचीत और जांच के दौरान सामने आई कई जानकारियों का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

डायरी में दर्ज बातों के अनुसार, जांच के दौरान गोपाल राव से भी पूछताछ हुई थी। दावा है कि शुरुआती पूछताछ में वह कुछ सवालों के जवाब देने से बचते रहे, लेकिन SIT की सख्ती के बाद उन्होंने कुछ बातें जांच टीम के सामने रखीं। हालांकि, डायरी में दर्ज टिप्पणियां चंपत राय के व्यक्तिगत रिकॉर्ड हैं और इनमें किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है।

SIT की पूछताछ में गोपाल राव का नाम

राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच के दौरान SIT ने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, चंपत राय और गोपाल राव से भी पूछताछ हुई थी। जांच टीम ने दान की रकम के संग्रह, उसकी गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर सवाल किए थे।

डायरी में दावा किया गया है कि गोपाल राव से हुई पूछताछ के दौरान कुछ जानकारियां सामने आईं। चंपत राय ने कथित तौर पर अपनी डायरी में इस बात को लेकर अनिश्चितता भी दर्ज की कि गोपाल राव ने SIT को वास्तव में क्या बताया।

‘भगवान जाने उन्होंने क्या बताया’ वाली टिप्पणी क्यों चर्चा में?

सामने आए डायरी अंशों में गोपाल राव को लेकर चंपत राय की एक टिप्पणी का जिक्र है। इसमें उन्होंने कथित तौर पर लिखा कि गोपाल राव ने SIT को क्या बताया, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी।

इसी वजह से यह टिप्पणी अब मामले में चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डायरी में दर्ज टिप्पणी अपने आप में यह साबित नहीं करती कि गोपाल राव ने कोई गलत काम किया था या जांच में कोई आपत्तिजनक जानकारी दी थी।

तीन बार अयोध्या पहुंची SIT?

डायरी में दर्ज विवरण के मुताबिक, SIT ने 16 जून से 16 जुलाई के बीच तीन बार अयोध्या पहुंचकर जांच की थी। इससे पहले भी चंपत राय से कई घंटे तक पूछताछ किए जाने का उल्लेख सामने आया है।

जांच के दौरान चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव समेत मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों से अलग-अलग और कुछ मौकों पर संयुक्त रूप से बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

50 से 60 लोगों से पूछताछ का दावा

चंपत राय की डायरी में यह भी दावा किया गया है कि SIT ने जांच के दौरान करीब 50 से 60 लोगों से पूछताछ की।

जांच टीम ने मंदिर ट्रस्ट से विभिन्न दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे थे। डायरी के अनुसार, उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और पूछे गए सवालों के जवाब जांच टीम को दिए गए।

इससे साफ है कि जांच का दायरा केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि मंदिर की दान व्यवस्था और उससे जुड़े कई स्तरों तक जांच की गई।

SIT को भेजा गया था पत्र

डायरी के अनुसार, 6 जुलाई को चंपत राय ने SIT को एक पत्र भेजा था। उन्हें आशंका थी कि पूछताछ के दौरान बताई गई कोई महत्वपूर्ण जानकारी जांच रिकॉर्ड में शामिल होने से छूट गई हो सकती है।

इसी वजह से उन्होंने कुछ जानकारियां लिखित रूप में जांच टीम को भेजने का दावा किया है। डायरी में यह भी उल्लेख है कि बाद में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट से जुड़ी कुछ जानकारी सामने आई।

ट्रस्टियों के संपर्क नंबर भी दिए गए

डायरी में यह भी दावा किया गया है कि SIT को कुछ ट्रस्टियों से संपर्क करने में परेशानी हो रही थी। इसके बाद चंपत राय ने ट्रस्टियों के संपर्क नंबर उपलब्ध कराए।

इन नंबरों को SIT के अधिकारियों तक पहुंचाए जाने का भी उल्लेख डायरी में है। हालांकि, इसके बाद इस प्रक्रिया का क्या परिणाम रहा, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

मंदिर की मूल्यवान वस्तुओं का भी हुआ सत्यापन

जांच के दौरान केवल नकदी से जुड़े मामलों पर ही ध्यान नहीं दिया गया। डायरी में मंदिर की मूल्यवान वस्तुओं और उनके रिकॉर्ड के सत्यापन का भी जिक्र है।

रिपोर्टों के मुताबिक, रिकॉर्ड का मिलान और दस्तावेजों का परीक्षण जांच के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल था।

मामला कैसे सामने आया?

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और कीमती वस्तुओं के कथित गबन का मामला जून 2026 में सामने आया था। इसके बाद 25 जून को आठ आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। जांच में कई कर्मचारियों और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया।

बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT गठित की। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने बताया था कि SIT का नेतृत्व IGP किरण एस कर रही हैं और अदालत ने फोरेंसिक ऑडिटर को भी टीम में शामिल करने को कहा था।

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर क्या हुआ?

मामला सामने आने के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दिया था, जिन्हें ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ती रही।

अगस्त में SIT की अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश गृह विभाग द्वारा ट्रस्ट को सौंपे जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, चंपत राय और अनिल मिश्रा को कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों में क्लीन चिट मिलने की बात कही गई है। हालांकि, मामले को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

फिर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

SIT की रिपोर्ट में प्रमुख नामों को राहत मिलने की खबर के बावजूद फैजाबाद बार एसोसिएशन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। संगठन ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए आगे आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

ऐसे में चंपत राय की डायरी में दर्ज कथित घटनाक्रम ने इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। खासकर गोपाल राव की पूछताछ और मंदिर के अंदर की सूचनाएं बाहर पहुंचने को लेकर दर्ज टिप्पणियां अब नए सवाल खड़े कर रही हैं।

हालांकि, डायरी में दर्ज आरोप या टिप्पणियां अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं हैं। मामले में वास्तविक जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जांच तथा अदालत की प्रक्रिया से ही होगा।


📌 पूरी खबर एक नजर में

मुद्दाजानकारी
मामलाराम मंदिर चढ़ावा चोरी/अनियमितता
स्थानअयोध्या, उत्तर प्रदेश
मुख्य चर्चाचंपत राय की डायरी में SIT जांच का विवरण
गोपाल रावSIT द्वारा पूछताछ का उल्लेख
जांचविशेष जांच दल (SIT)
FIR25 जून 2026 को आठ आरोपियों के खिलाफ
डायरी में दावा50-60 लोगों से पूछताछ
अन्य जांचदस्तावेज और मूल्यवान वस्तुओं का सत्यापन
SIT रिपोर्टचंपत राय और अनिल मिश्रा को कथित तौर पर राहत
विवादकुछ पक्षों द्वारा FIR की मांग जारी

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