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यूपी में ED का बड़ा एक्शन: फर्जी ITC मामले में तीन शहरों के 9 ठिकानों पर छापे, फर्जी कंपनियों के नेटवर्क की जांच

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
24 August 2026 3:18 PM 1 मिनट पठन 57032 Views
यूपी में ED का बड़ा एक्शन: फर्जी ITC मामले में तीन शहरों के 9 ठिकानों पर छापे, फर्जी कंपनियों के नेटवर्क की जांच

लखनऊ: फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बड़ी कार्रवाई की। ED की लखनऊ जोनल टीम ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में कुल नौ ठिकानों पर तलाशी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच के तहत की जा रही है।

तीन शहरों में एक साथ ED की छापेमारी

ED के अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के शुरू हुई कार्रवाई में मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) तथा फरीदाबाद (हरियाणा) के नौ परिसरों को शामिल किया गया। तलाशी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की जा रही है।

जांच का केंद्र जम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड से जुड़ा कथित फर्जी ITC नेटवर्क है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए टैक्स क्रेडिट कैसे हासिल किया गया और बाद में किन कारोबारियों या कंपनियों तक इसे पहुंचाया गया।

बिना माल की आवाजाही के बनाए गए फर्जी दस्तावेज

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोप है कि कुछ कंपनियों के बीच बिना वास्तविक माल की आवाजाही के फर्जी चालान और ई-वे बिल तैयार किए गए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी ITC हासिल करने और उसे दूसरी इकाइयों को पास करने के लिए किया गया।

ITC यानी Input Tax Credit वह व्यवस्था है जिसके तहत कारोबार में खरीदी गई वस्तुओं या सेवाओं पर चुकाए गए GST का क्रेडिट पात्र कारोबारी अपने टैक्स भुगतान में इस्तेमाल कर सकता है। फर्जी बिलों के जरिए इस सुविधा का गलत इस्तेमाल होने पर सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता है।

9.63 करोड़ रुपये के ITC का कथित गलत इस्तेमाल

GST अधिकारियों की जांच में कथित तौर पर 9.63 करोड़ रुपये का ITC गलत तरीके से हासिल करने और करीब 10.28 करोड़ रुपये का ITC आगे पास करने की बात सामने आई है। ED अब इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और धन के प्रवाह की जांच कर रही है।

एजेंसी को संदेह है कि फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से लेनदेन को अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया, जिससे वास्तविक धन के स्रोत और लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो सके।

फर्जी और कागजी कंपनियों के नेटवर्क की जांच

ED की जांच में कथित तौर पर कई फर्जी या कागजी कंपनियों के बीच सर्कुलर ट्रांजेक्शन का पता चला है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि इन कंपनियों के बैंक खातों के माध्यम से धन को किस तरह अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर किया गया।

इसके बाद कुछ रकम नकद निकासी के जरिए बाहर निकाले जाने का भी दावा किया गया है।

PMLA के तहत क्यों हो रही है जांच?

फर्जी ITC के जरिए कथित तौर पर हासिल की गई रकम को ED मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से देख रही है। एजेंसी के अनुसार, यदि अवैध तरीके से हासिल धन अपराध से प्राप्त आय यानी Proceeds of Crime की श्रेणी में आता है, तो PMLA के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूत आगे की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

तलाशी में क्या तलाश रही है ED?

ED की टीम छापेमारी के दौरान मुख्य रूप से इन चीजों की जांच कर रही है:

  • फर्जी चालान और ई-वे बिल
  • कंपनी के अकाउंट और वित्तीय रिकॉर्ड
  • बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज
  • डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
  • फर्जी कंपनियों के बीच लेनदेन
  • ITC के कथित हस्तांतरण का रिकॉर्ड
  • धन के वास्तविक लाभार्थियों की जानकारी

अधिकारियों के मुताबिक, तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच का दायरा और बढ़ सकता है

नौ ठिकानों पर एक साथ हुई कार्रवाई के बाद इस मामले में आगे और नाम सामने आने की संभावना है। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क में कितनी कंपनियां शामिल थीं और फर्जी ITC का लाभ किन-किन इकाइयों ने उठाया।

फिलहाल जांच जारी है और तलाशी से मिले दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।


📌 पूरी खबर एक नजर में

जानकारीविवरण
जांच एजेंसीप्रवर्तन निदेशालय (ED)
मामलाफर्जी ITC और कथित मनी लॉन्ड्रिंग
तारीख24 अगस्त 2026
कुल ठिकाने9
शहरमुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद
मुख्य कंपनीजम्बूद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इंपोर्ट्स लिमिटेड
कथित गलत ITC₹9.63 करोड़
आगे पास किया गया कथित ITC₹10.28 करोड़
कानूनPMLA, 2002
जांच का फोकसफर्जी कंपनियां, चालान, ई-वे बिल और धन का प्रवाह

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