Sunday, 30 August 2026

पीलीभीत में बाघ का आतंक: खेत की रखवाली करने गए किसान की मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम की

पीलीभीत में बाघ के हमले के बाद किसान की मौत और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन का प्रतीकात्मक दृश्य।

पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में बाघ के हमले में एक किसान की मौत के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। शांतिनगर गांव निवासी 60 वर्षीय किसान मुंशी प्रसाद केले के खेत की रखवाली करने गए थे, तभी कथित तौर पर खेत में घात लगाए बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद ग्रामीणों ने मृतक का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और वन विभाग से बाघ को पकड़ने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

केले के खेत की रखवाली करने गए थे किसान

पुलिस के अनुसार, मुंशी प्रसाद अपने केले के खेत की रखवाली के लिए गए थे। इसी दौरान खेत में मौजूद बाघ ने उन पर हमला कर दिया।

हमले में किसान गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। काफी देर तक जब वह घर नहीं लौटे तो परिवार के लोगों को चिंता हुई। इसके बाद परिजन और ग्रामीण उनकी तलाश में खेत की ओर गए, जहां उनका शव मिला।

शव मिलने की खबर फैलते ही गांव में मातम के साथ-साथ ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।

बाघ के हमले से पूरे इलाके में दहशत

किसान की मौत के बाद ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से बाघ और तेंदुए की गतिविधियां देखी जा रही हैं।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब तीन महीने से बाघ क्षेत्र में लगातार दिखाई दे रहा था और उसने कई पालतू तथा अन्य जानवरों को भी अपना शिकार बनाया था। शाम ढलने के बाद ग्रामीण खेतों की ओर जाने से बचने लगे थे।

किसान की मौत के बाद ग्रामीणों की आशंका और बढ़ गई है।

वन विभाग पर लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की जानकारी पहले भी वन विभाग को दी गई थी, लेकिन उसकी निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने में हुई देरी पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर समय रहते बाघ को पकड़ने या उसकी निगरानी के लिए प्रभावी अभियान चलाया जाता तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था।

हालांकि, वन विभाग की ओर से किसी लापरवाही को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

शव सड़क पर रखकर लगाया जाम

किसान की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने रामनगर तिराहे पर शव रखकर सड़क जाम कर दी

ग्रामीणों की मांग थी कि मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, इलाके में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए और बाघ को जल्द से जल्द पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाए।

जाम के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।

पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया और उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पूरनपुर के सर्कल ऑफिसर विधि भूषण मौर्य के अनुसार, घटना की जांच की जा रही है। वन विभाग की टीम भी मामले की जांच में जुटी है।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद सड़क से जाम हटाया गया।

बाघ की निगरानी शुरू

घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में बाघ की निगरानी शुरू कर दी है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

वन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बाघ की सही लोकेशन का पता लगाना और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ना है।

खेतों में जाने से डर रहे किसान

किसान की मौत के बाद क्षेत्र के किसानों में डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में फसल खड़ी होने के कारण उन्हें रोजाना खेतों में जाना पड़ता है, लेकिन बाघ की मौजूदगी के कारण अब अकेले खेत जाने में डर लग रहा है।

ग्रामीण चाहते हैं कि जब तक बाघ पकड़ा नहीं जाता, तब तक संवेदनशील इलाकों में वन विभाग की टीम लगातार गश्त करे और लोगों को सावधानी बरतने की जानकारी दी जाए।

मानव-वन्यजीव संघर्ष का बढ़ता खतरा

पीलीभीत टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों से लगे क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।

जंगल के आसपास बसे गांवों में खेती करने वाले लोगों का जंगली जानवरों से सामना होने का खतरा बना रहता है। खासकर गन्ने और घनी फसल वाले खेत वन्यजीवों के छिपने के लिए उपयुक्त स्थान बन सकते हैं।

ऐसे में वन विभाग के लिए वन्यजीवों की निगरानी के साथ-साथ ग्रामीणों को सुरक्षित रखने की चुनौती भी बनी रहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *