Sunday, 30 August 2026

झांसी में 403 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार; USDT के जरिए विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाते थे रकम

झांसी पुलिस द्वारा 403 करोड़ रुपये की साइबर फ्रॉड मनी ट्रेल से जुड़े गिरोह के खुलासे का प्रतीकात्मक दृश्य।

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में सक्रिय इस गिरोह के छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस की जांच में 56 बैंक खातों से करीब 403 करोड़ रुपये की मनी ट्रेल सामने आई है। इन खातों से देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने और बाद में क्रिप्टोकरेंसी USDT में बदलकर विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाने का आरोप है।

56 बैंक खातों से जुड़ी 325 शिकायतें

पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान साइबर अपराध से जुड़ी 325 शिकायतों की पड़ताल की गई। इन शिकायतों से जुड़े कुल 56 बैंक खातों का पता चला, जिनमें करीब 403 करोड़ रुपये की लेनदेन की मनी ट्रेल सामने आई।

झांसी में ही ऐसे 35 बैंक खाते मिले, जिनका संचालन गिरफ्तार आरोपियों द्वारा किए जाने की बात जांच में सामने आई है। पुलिस अब इन खातों के जरिए देशभर में जुड़े साइबर अपराधियों और पैसों के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

ठगी की रकम को USDT में बदलने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, गिरोह का काम सीधे लोगों से ठगी करना ही नहीं था, बल्कि साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाना भी था।

इसके बाद रकम को क्रिप्टोकरेंसी USDT (Tether) में बदलकर विदेशी हैंडलर्स को उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि इस तरीके का इस्तेमाल कथित तौर पर रकम को बैंक खातों में फ्रीज होने से बचाने और उसे आगे भेजने के लिए किया जाता था।

विदेशी और चीनी कनेक्शन की जांच

Aaj Tak की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि इस नेटवर्क में चीनी गेमिंग नेटवर्क और विदेशी हैंडलर्स से कनेक्शन के संकेत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ गेम चीन से जुड़े बताए गए हैं और इनमें दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जुड़े हैंडलर्स होने की बात सामने आई है।

हालांकि, विदेशी या चीनी नेटवर्क से जुड़े इन कनेक्शनों की विस्तृत भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

छह आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार

झांसी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में दीपक वर्मा उर्फ सत्यम, अदनान हुसैन, आदिल हुसैन, जॉन पाल, अभिषेक चौधरी और अर्चित श्रीवास्तव शामिल हैं।

वहीं अरमान, अर्श और मोहम्मद फैज को पुलिस तलाश रही है। पूछताछ में अरमान को गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बताया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों में छात्र भी शामिल

मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस के मुताबिक गिरोह में शामिल कुछ आरोपी इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने वाले छात्र हैं।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों ने साइबर अपराध की कार्यप्रणाली दूसरे गिरोहों से सीखी और बाद में झांसी में अपना नेटवर्क संचालित करना शुरू किया।

‘यू मनी’ ऐप और पैनल की भी जांच

पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य आरोपी बताए जा रहे दीपक वर्मा उर्फ सत्यम द्वारा ‘यू मनी’ नाम का ऐप संचालित किया जाता था। पुलिस के मुताबिक यह एक पैनल की तरह काम करता था, जिसके जरिए लेनदेन किया जाता था।

अब पुलिस इस ऐप, उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा की जांच कर रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

500 USDT और सात मोबाइल बरामद

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, हिसाब-किताब वाली डायरी/रजिस्टर और 500 USDT बरामद या सीज किए जाने की जानकारी दी है।

पुलिस इन डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इससे बैंक खातों, क्रिप्टो लेनदेन और कथित विदेशी संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रंगे हाथ पकड़े जाने का दावा

अमर उजाला के मुताबिक, साइबर शाखा की टीम ने मुख्य आरोपी सत्यम समेत अन्य आरोपियों के बैंक खातों और लेनदेन पर निगरानी रखी थी। पुलिस ने सत्यम को कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को USDT में बदलते समय पकड़ा

जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले के एक सप्ताह में करीब 9.75 लाख रुपये उस खाते से USDT में बदले गए थे।

403 करोड़ की रकम का मतलब क्या?

पुलिस द्वारा बताई गई 403 करोड़ रुपये की राशि को फिलहाल मनी ट्रेल/लेनदेन की रकम के तौर पर समझना जरूरी है। इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि गिरफ्तार छह आरोपियों ने अकेले 403 करोड़ रुपये की ठगी की है।

जांच में सामने आए बैंक खातों में देशभर की विभिन्न साइबर ठगी से संबंधित रकम का प्रवाह पाया गया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की भूमिका कितनी थी।

कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क

पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल झांसी तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज साइबर शिकायतों और बैंक खातों के कनेक्शन को देखते हुए इसकी कड़ियां कई राज्यों और विदेशी हैंडलर्स तक पहुंच सकती हैं।

अब पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, क्रिप्टो लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।

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