अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। कमेटी ने तीन योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया है, जिस पर अब ट्रस्ट अंतिम निर्णय लेगा।
5585 आवेदनों से शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए देशभर से कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया में पात्रता, अनुभव और अन्य मानकों के आधार पर उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की गई।
कमेटी ने 600 अंकों का मूल्यांकन फॉर्म तैयार किया था। प्राप्त आवेदनों में से 3,577 उम्मीदवारों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसके बाद 470 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले 108 उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना गया।
इन उम्मीदवारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की गई। इसके बाद 17 उम्मीदवारों को आगे के चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। इनमें से 16 उम्मीदवार अयोध्या पहुंचकर आमने-सामने इंटरव्यू में शामिल हुए।
16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद चुने गए तीन नाम
अंतिम चरण में उम्मीदवारों के अनुभव, विजन, कार्यक्षमता, नेतृत्व क्षमता और राम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक एवं प्रशासनिक संस्थान को संभालने की समझ का आकलन किया गया।
इसी विस्तृत प्रक्रिया के बाद सर्च कमेटी ने तीन सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया और अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। हालांकि, इन तीनों उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
तीन सदस्यीय कमेटी ने की पूरी प्रक्रिया
CEO चयन के लिए बनाई गई कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े शामिल थे।
कमेटी ने चयन प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा किया। समिति के अनुसार, प्रक्रिया में तकनीक आधारित स्क्रीनिंग के साथ मानवीय मूल्यांकन को भी शामिल किया गया।
अब ट्रस्ट करेगा अंतिम फैसला
सर्च कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास है।
2 सितंबर को अयोध्या में ट्रस्ट की अहम बैठक प्रस्तावित है। बैठक में CEO के तीन नामों वाले पैनल पर चर्चा हो सकती है और सहमति बनने पर पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की घोषणा की जा सकती है। ट्रस्ट के सदस्यों ने भी संकेत दिया है कि बैठक में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
क्यों जरूरी है राम मंदिर के लिए पूर्णकालिक CEO?
राम मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। मंदिर परिसर का विस्तार, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था और रोजमर्रा के प्रशासन जैसे कामों का दायरा भी बढ़ रहा है।
ऐसे में ट्रस्ट को एक ऐसे पेशेवर अधिकारी की जरूरत महसूस हुई जो मंदिर की प्रशासनिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से संभाल सके।
CEO के अधिकार और जिम्मेदारियों को लेकर ट्रस्ट के नियमों में बदलाव पर भी चर्चा होने की संभावना है। इससे CEO और ट्रस्ट के महासचिव समेत अन्य प्रशासनिक समितियों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा अधिक स्पष्ट किया जा सकता है।
आज की बैठक पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर अयोध्या में होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर है। CEO के चयन के अलावा बैठक में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, वित्तीय मामलों और अन्य संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के पास पहुंच चुका है और पहले पूर्णकालिक CEO के चयन की अंतिम मुहर ट्रस्ट को ही लगानी है।