सहारनपुर: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुधवार को सहारनपुर पहुंचे। उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ जब अगले दिन रामपुर मनिहारान में राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी की ‘स्वाभिमान रैली’ प्रस्तावित थी।
अखिलेश यादव के सहारनपुर दौरे को सिर्फ संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पार्टी नेताओं और अलग-अलग सामाजिक समूहों से मुलाकात के जरिए सपा प्रमुख ने आगामी चुनाव के लिए संगठन मजबूत करने और सामाजिक समीकरण साधने का संकेत दिया।
पहले मंदिर में पूजा, फिर पार्टी नेताओं से मुलाकात
अखिलेश यादव सबसे पहले स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित सिद्धि विनायक मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की तथा विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर उनका उत्साह बढ़ाया।
इसके बाद वह सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन और चौधरी इंद्रसैन के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से बातचीत की। इससे पहले बुधवार को उनके सहारनपुर पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत भी किया था।
हाजी फजलुर्रहमान के घर भी पहुंचे
अखिलेश यादव इसके बाद पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के आवास पहुंचे। उनके एक ही दौरे में अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के घर पहुंचने को सपा की व्यापक सामाजिक रणनीति के संकेत के तौर पर देखा गया।
रुद्रसैन और इंद्रसैन के यहां जाना जहां हिंदू, किसान और पिछड़े वर्गों से जुड़े सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश के रूप में देखा गया, वहीं हाजी फजलुर्रहमान से मुलाकात के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी के आधार को मजबूत रखने का संदेश माना जा रहा है। यह राजनीतिक विश्लेषण है, न कि सपा की ओर से घोषित चुनावी गठबंधन की औपचारिक घोषणा।
सहारनपुर की सातों सीटों पर टिकट दावेदार सक्रिय
2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए सहारनपुर की सातों विधानसभा सीटों पर सपा के टिकट दावेदार सक्रिय हो गए हैं। शहर में जगह-जगह नेताओं और संभावित प्रत्याशियों के पोस्टर व होर्डिंग दिखाई देने लगे हैं।
अखिलेश यादव का प्रमुख नेताओं के घर जाना और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करना टिकट के दावेदारों के लिए भी शक्ति प्रदर्शन का अवसर बन गया। पार्टी के अंदर संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।
जयंत चौधरी की रैली से पहले दौरा क्यों अहम?
अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा जयंत चौधरी की 3 सितंबर की स्वाभिमान रैली से ठीक एक दिन पहले हुआ। जयंत चौधरी की रैली रामपुर मनिहारान में प्रस्तावित थी और इसे पश्चिमी यूपी में RLD के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
ऐसे में दोनों नेताओं की एक-दूसरे के आसपास समय-सीमा में होने वाली राजनीतिक गतिविधियां पश्चिमी यूपी के संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ा रही हैं। सपा के सामने भाजपा के साथ मुकाबले के अलावा सहयोगी दलों के साथ संभावित सीट बंटवारे में अपनी स्थिति मजबूत रखने की चुनौती भी है।
अखिलेश ने 2027 को लेकर क्या कहा?
सहारनपुर में अखिलेश यादव ने 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने का दावा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की सरकार बनने पर युवाओं की शिक्षा और रोजगार, बिजली की कीमत और महंगाई जैसे मुद्दों पर काम किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सपा में आने वाले लोगों को सरकार बनने पर सम्मान दिया जाएगा और चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले नेताओं को टिकट देने पर विचार किया जाएगा।
गन्ना किसानों के लिए 24 घंटे में भुगतान का वादा
पश्चिमी यूपी के प्रमुख किसान मुद्दे को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ने गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर गन्ने का भुगतान 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
सहारनपुर और आसपास का इलाका गन्ने की खेती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में किसानों से जुड़ा यह मुद्दा 2027 के चुनावी अभियान में सपा के लिए अहम हो सकता है।
पीडीए रणनीति पर जोर
अखिलेश यादव ने अपने बयान में पीडीए को भाजपा का मुकाबला करने वाला सामाजिक आधार बताया। उन्होंने आरक्षण और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर भी अपनी पार्टी की स्थिति दोहराई।
सपा की 2027 की रणनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समूहों के बीच संगठनात्मक पहुंच बढ़ाना प्रमुख पहलुओं में शामिल बताया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी बूथ संगठन और डिजिटल पहुंच को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
सहारनपुर के लिए अलग घोषणापत्र का संकेत
अखिलेश यादव ने सहारनपुर की स्थानीय समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अलग मैनिफेस्टो तैयार करने की बात कही। उन्होंने क्षेत्र के कारोबार, खेती, युवाओं और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों को चुनावी एजेंडे में शामिल करने का संकेत दिया।
उन्होंने सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग और कारीगरों के लिए प्रशिक्षण, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं की जरूरत पर भी बात की।
पिछले चुनाव को लेकर लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि उस चुनाव में कथित बेईमानी नहीं हुई होती तो नकुड़ से धर्म सिंह सैनी विधायक होते। उन्होंने दावा किया कि अन्य क्षेत्रों में भी सपा प्रत्याशियों को हराया गया। ये आरोप अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें उनके राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बारिश के कारण टली थी अखिलेश की रैली
अखिलेश यादव की दिल्ली रोड पर प्रस्तावित रैली पहले स्थगित हो चुकी है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की बारिश की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम स्थगित किया गया और अब इसे चुनाव के दौरान आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को लगता है कि रैली उनके कारण टली है तो वे अपनी रैली कर लें और फिर देखा जा सकता है कि किस कार्यक्रम में अधिक लोग पहुंचे।
एक दिन में चार नेताओं के घर पहुंचे
अखिलेश यादव ने अपने दौरे के दौरान चौधरी रुद्रसैन, चौधरी इंद्रसैन के अलावा पूर्व विधायक मनोज चौधरी और पूर्व राज्य मंत्री विनोद तेजियान के घर भी पहुंचकर मुलाकात की। एक ही दिन में अलग-अलग नेताओं से मुलाकात को पार्टी के सामाजिक और संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने की कवायद माना जा रहा है।
2027 के लिए पश्चिमी यूपी पर बढ़ा फोकस
अखिलेश यादव का यह दौरा संकेत देता है कि समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी को धीरे-धीरे जमीन पर तेज कर रही है। सहारनपुर जैसे पश्चिमी यूपी के महत्वपूर्ण क्षेत्र में संगठन, किसान, युवा और सामाजिक समीकरणों पर एक साथ फोकस करना पार्टी की रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले महीनों में सपा सहारनपुर और पश्चिमी यूपी में अपने संगठन को किस तरह मजबूत करती है और संभावित गठबंधन व सीट बंटवारे को लेकर क्या रुख अपनाती है।