उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का परिवार एक बार फिर चर्चा में है। उनकी बेटी शालिनी सिंह ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर की है। बुलंदशहर के ककोड़ क्षेत्र में एक निजी कार्यक्रम के दौरान शालिनी ने कहा कि अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहता है तो वह निश्चित रूप से चुनाव मैदान में उतरेंगी।
शालिनी सिंह पिछले करीब 15 वर्षों से नोएडा में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय होने की बात कहती हैं। अब उन्होंने राजनीति में भी अपनी भूमिका निभाने की तैयारी के संकेत दिए हैं। उनके बयान के बाद 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले उनके संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
‘पार्टी नहीं, नेतृत्व से बनती है पहचान’
शालिनी सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल पार्टी या चुनावी टिकट से नहीं बनती, बल्कि उसके नेतृत्व और जनता के लिए किए गए काम से बनती है।
उन्होंने कहा कि वह किसी पार्टी या विपक्ष को देखकर राजनीति करने के बजाय सही मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने में विश्वास रखती हैं। यदि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहता है तो वह चुनावी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेंगी।
उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सक्रिय राजनीतिक भूमिका की ओर बढ़ते कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
नोएडा से चुनाव लड़ने की चर्चा
शालिनी सिंह के राजनीति में आने की चर्चा नई नहीं है। इससे पहले भी उनके 2027 में नोएडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई थी।
हालांकि अभी तक भाजपा की ओर से शालिनी सिंह को किसी सीट से उम्मीदवार बनाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए नोएडा से चुनाव लड़ने की बात को फिलहाल राजनीतिक संभावना और अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
नोएडा सीट का राजनीतिक समीकरण भी दिलचस्प है क्योंकि यहां वर्तमान में भाजपा के पंकज सिंह विधायक हैं। ऐसे में यदि शालिनी को इसी सीट से चुनाव लड़ाने की चर्चा आगे बढ़ती है तो भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक और राजनीतिक फैसला होगा।
बृजभूषण परिवार में पहले से राजनीति में दो बेटे
शालिनी सिंह के राजनीति में आने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके परिवार के दो सदस्य पहले से चुनावी राजनीति में सक्रिय हैं।
उनके बड़े भाई प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। वह 2017 से विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं छोटे भाई करण भूषण सिंह कैसरगंज लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया।
इस तरह शालिनी के राजनीति में आने पर बृजभूषण परिवार की अगली पीढ़ी का राजनीतिक प्रभाव और बढ़ सकता है।
करण भूषण सिंह हैं कैसरगंज से सांसद
करण भूषण सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कैसरगंज सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। संसद की आधिकारिक प्रोफाइल में भी उन्हें कैसरगंज से भाजपा सांसद के रूप में दर्ज किया गया है।
करण भूषण सिंह राजनीति के साथ खेल से भी जुड़े रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी हैं। भाजपा ने 2024 में बृजभूषण शरण सिंह की जगह करण भूषण को कैसरगंज से उम्मीदवार बनाया था।
प्रतीक भूषण सिंह भी विधायक
बृजभूषण शरण सिंह के बड़े बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर सीट से भाजपा विधायक हैं।
इससे पहले 2017 से ही वह विधानसभा राजनीति में सक्रिय हैं। परिवार की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए शालिनी के संभावित प्रवेश को बृजभूषण परिवार के राजनीतिक विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है।
मां भी रह चुकी हैं सांसद
बृजभूषण शरण सिंह की पत्नी केतकी देवी सिंह भी राजनीति में रह चुकी हैं। वह 1996 में गोंडा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं। इस तरह शालिनी के परिवार में राजनीतिक सक्रियता केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं है।
बृजभूषण शरण सिंह खुद कैसरगंज से छह बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं और 1991 में पहली बार संसद पहुंचे थे।
ससुराल भी राजनीतिक परिवार
शालिनी सिंह का ससुराल भी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला है। उनकी शादी बिहार के आरा से पूर्व सांसद अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के बेटे विशाल सिंह से हुई है।
शालिनी फिलहाल अपने परिवार के साथ नोएडा में रहती हैं। ऐसे में उनके मायके और ससुराल दोनों तरफ राजनीतिक पृष्ठभूमि है।
15 साल से नोएडा में सामाजिक काम का दावा
शालिनी सिंह ने बताया कि वह करीब 15 वर्षों से नोएडा में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। इसी वजह से नोएडा को लेकर उनकी राजनीतिक संभावनाओं पर भी चर्चा होती रही है।
वह सामाजिक मुद्दों के अलावा शिक्षा और अन्य सार्वजनिक विषयों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। हालिया बयान में उन्होंने यूजीसी सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।
RSS की महिला शाखा से भी जुड़ी हैं शालिनी
रिपोर्ट के अनुसार शालिनी सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी महिला शाखा राष्ट्र सेविका समिति से भी जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने हाल ही में संगठन की तीसरे वर्ष की प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करने की जानकारी दी है। यह पहलू भी उनके संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा में है, खासकर यदि वह भविष्य में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ती हैं।
हालांकि, संगठन से जुड़ाव अपने आप में किसी चुनावी टिकट की गारंटी नहीं है।
परिवारवाद पर भी उठ सकते हैं सवाल
यदि शालिनी सिंह चुनावी राजनीति में आती हैं तो बृजभूषण परिवार से एक ही समय में कई लोग सक्रिय चुनावी राजनीति में दिखाई देंगे।
उनके भाई पहले से विधायक और सांसद हैं, जबकि खुद बृजभूषण शरण सिंह भी राजनीतिक रूप से सक्रिय बने हुए हैं। ऐसे में विपक्ष की ओर से परिवारवाद को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि शालिनी पहले ही इस तरह की आलोचना को लेकर अपना पक्ष रख चुकी हैं। उनका कहना रहा है कि यदि परिवार का कोई सदस्य शिक्षित है, जनता के बीच काम करता है और चुनाव लड़ने की क्षमता रखता है तो केवल परिवार से संबंध होना अपने आप में चुनाव लड़ने से रोकने का आधार नहीं होना चाहिए।
भाजपा के लिए भी चुनौतीपूर्ण फैसला
यदि शालिनी सिंह सक्रिय रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी करती हैं तो अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होगा।
एक ओर बृजभूषण परिवार की राजनीतिक पकड़ और क्षेत्रीय प्रभाव है, दूसरी ओर पार्टी के भीतर परिवारवाद और एक ही परिवार से कई उम्मीदवारों को टिकट देने को लेकर राजनीतिक संदेश का सवाल भी उठ सकता है।
यही वजह है कि शालिनी के हालिया बयान के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। विभिन्न दल संभावित उम्मीदवारों, सामाजिक समीकरणों और नए चेहरों पर नजर बनाए हुए हैं।
इसी बीच भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के परिवारों की अगली पीढ़ी के राजनीति में सक्रिय होने की चर्चा भी सामने आई है। शालिनी सिंह का नाम भी इसी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।
क्या शालिनी को भाजपा का टिकट मिलेगा?
फिलहाल इसका जवाब स्पष्ट नहीं है।
शालिनी ने खुद कहा है कि अगर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहेगा तो वह चुनाव लड़ेंगी। लेकिन भाजपा की ओर से अभी तक उनकी उम्मीदवारी या सीट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह 2027 में निश्चित रूप से चुनाव लड़ेंगी या किस विधानसभा सीट से मैदान में उतरेंगी।
निष्कर्ष
बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि यदि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहता है तो वह चुनावी मैदान में उतरेंगी। वह करीब 15 वर्षों से नोएडा में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय होने की बात भी कहती हैं।
बृजभूषण परिवार में पहले से उनके भाई प्रतीक भूषण सिंह विधायक और करण भूषण सिंह सांसद हैं, जबकि उनकी मां केतकी देवी सिंह भी सांसद रह चुकी हैं। ऐसे में शालिनी की राजनीतिक एंट्री परिवार की अगली पीढ़ी की राजनीति को और मजबूत कर सकती है।
हालांकि अभी शालिनी की उम्मीदवारी या पार्टी टिकट पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा शालिनी सिंह को चुनावी मैदान में उतारेगी और अगर हां, तो उनकी सीट कौन-सी होगी?