Tuesday, 22 September 2026
होम DBN Samachar नकली सिक्कों को ऐसे देते थे असली जैसा लुक, रोज 12 हजार की सप्लाई! सहारनपुर में बड़ा खुलासा
DBN Samachar

नकली सिक्कों को ऐसे देते थे असली जैसा लुक, रोज 12 हजार की सप्लाई! सहारनपुर में बड़ा खुलासा

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
15 September 2026 11:51 AM 1 मिनट पठन 11478 Views
नकली सिक्कों को ऐसे देते थे असली जैसा लुक, रोज 12 हजार की सप्लाई! सहारनपुर में बड़ा खुलासा

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के पास नकली सिक्कों को तैयार करने और उन्हें बाजार में खपाने के लिए पूरा सेटअप मौजूद था। रोजाना करीब 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता होने का दावा किया गया है।

पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 6,400 नकली 20 रुपये के सिक्के, मशीनें, डाई और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों और इसके सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रही है।

कैसे सामने आया नकली सिक्कों का खेल?

सहारनपुर पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में इस नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सहारनपुर में नकली सिक्कों के उत्पादन का नया बेस तैयार करने की तैयारी में थे, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में तैयार सिक्के और उत्पादन से जुड़े उपकरण मिले। बरामदगी से संकेत मिला कि यह कोई छोटी-मोटी गतिविधि नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर चलने वाला नेटवर्क था।

नकली सिक्कों को असली जैसा दिखाने की कोशिश

Aaj Tak के मुताबिक, SSP अभिनंदन ने बताया कि आरोपी सिक्कों को तैयार करने के बाद उनकी फिनिशिंग और डिजाइन पर खास ध्यान देते थे, ताकि वे पहली नजर में असली सिक्कों जैसे दिखाई दें। पुलिस के अनुसार इस काम में मशीनों और डाई का इस्तेमाल किया जाता था।

मौके से पांच लोहे की डाई, बिना मोहर वाली और मोहर लगी कई डाई, पॉलिशिंग से जुड़े उपकरण तथा अन्य सामान बरामद किए जाने की बात पुलिस ने कही है।

रोज तैयार होते थे 12 हजार नकली सिक्के

पुलिस का दावा है कि गिरोह के पास ऐसा सेटअप था जिससे रोजाना लगभग 10 से 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जा सकते थे। इतनी बड़ी क्षमता बताती है कि गिरोह सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि व्यापक नेटवर्क के जरिए सिक्कों को बाजार तक पहुंचाने की तैयारी में था।

पुलिस के मुताबिक, तैयार नकली सिक्कों को शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटी दुकानों जैसे स्थानों पर खपाया जाता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन इलाकों में कितनी मात्रा में नकली सिक्के पहुंचाए गए।

6,400 नकली सिक्के बरामद

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 6,400 नकली 20 रुपये के सिक्के बरामद किए। इसके अलावा छह मशीनें और सिक्के तैयार करने से संबंधित अन्य उपकरण भी मिले। पुलिस के मुताबिक, मौके से सात रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं, जिनसे नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन और सप्लाई चैन की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

70 करोड़ के सिक्के खपाने का दावा, लेकिन जांच जारी

पूछताछ में आरोपियों की ओर से कथित तौर पर 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चलाने की बात सामने आने की जानकारी पुलिस ने दी है।

हालांकि, Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक SSP अभिनंदन ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की शुरुआती गणना में यह आंकड़ा करीब 10 से 11 करोड़ रुपये के आसपास सामने आया है। वास्तविक रकम की पुष्टि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

इसलिए 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल आरोपियों से पूछताछ में सामने आया दावा है, अंतिम रूप से प्रमाणित आंकड़ा नहीं।

2001 से नेटवर्क चलाने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है। पुलिस का कहना है कि वह वर्ष 2001 से नकली सिक्कों के इस कारोबार में शामिल रहा है। उसके पुराने आपराधिक संपर्कों और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई क्षेत्रों तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब पुराने संपर्कों और सप्लाई चैन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

सोनीपत कनेक्शन भी जांच के घेरे में

पुलिस के दावों के मुताबिक, गिरोह से जुड़े लोगों ने पहले हरियाणा के सोनीपत में भी नकली सिक्कों के उत्पादन से संबंधित गतिविधियां की थीं। हालांकि, सोनीपत पुलिस ने कहा है कि उसे वहां किसी छापेमारी या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी और वह UP पुलिस के दावों की जांच कर रही है।

इससे साफ है कि नेटवर्क के पुराने ठिकानों और संपर्कों की जांच अभी जारी है।

तिहाड़ जेल से जुड़ने की कहानी

सहारनपुर पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी उपकार लूथरा और सहारनपुर निवासी हिमांशु उर्फ गुल्लू की मुलाकात तिहाड़ जेल में हुई थी। पुलिस के अनुसार, इसी संपर्क के बाद दोनों के बीच नकली सिक्कों के कारोबार को लेकर नेटवर्क तैयार हुआ।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका थी।

अब एजेंटों और सप्लाई नेटवर्क पर नजर

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल है कि तैयार नकली सिक्के किन-किन राज्यों और बाजारों तक पहुंचाए गए। सात रजिस्टर और मोबाइल फोन इस जांच में अहम माने जा रहे हैं।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि नकली सिक्कों के एजेंट कौन थे, उनके बीच पैसों का लेनदेन कैसे होता था और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी।

प्रतिक्रिया दें (Leave a Reply)

आपका ईमेल पता सुरक्षित है और प्रकाशित नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *