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इस्लामिक प्रार्थना के आरोप में निलंबित शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, 15 दिन में जांच पूरी करने का आदेश

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
16 September 2026 11:57 AM 1 मिनट पठन 9854 Views
इस्लामिक प्रार्थना के आरोप में निलंबित शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, 15 दिन में जांच पूरी करने का आदेश

प्रयागराज: संभल में स्कूल के छात्रों द्वारा कथित तौर पर इस्लामिक प्रार्थना किए जाने के मामले में निलंबित शिक्षक मोहम्मद अनजर अहमद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने फिलहाल उनके निलंबन आदेश को प्रभावी न रखने का निर्देश दिया है। साथ ही विभागीय जांच को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है, जिसके लिए 15 दिन की समयसीमा को प्राथमिकता दी गई है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर वह शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सच्चाई या झूठ पर फैसला नहीं कर रही है। इन आरोपों और शिक्षक के बचाव पर विभागीय जांच में विचार किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला संभल जिले का है। शिक्षक मोहम्मद अनजर अहमद ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल की ओर से 10 मई 2026 को जारी निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

विभागीय कार्रवाई में आरोप लगाया गया था कि जब अहमद स्कूल में प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर थे, उस दौरान छात्रों से इस्लामिक प्रार्थना कराई जा रही थी। छात्रों की यूनिफॉर्म को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी और आरोप था कि उनके पहनावे से उन्हें एक विशेष समुदाय से जुड़े छात्र के रूप में पहचाना जा सकता था।

शिक्षक ने आरोपों से किया इनकार

शिक्षक की ओर से हाईकोर्ट में इन आरोपों को चुनौती दी गई। उनका कहना था कि जिस अवधि की घटनाओं को आधार बनाकर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, उस दौरान वह स्वीकृत मेडिकल लीव पर थे और अस्पताल में भर्ती थे।

उनकी ओर से यह भी दलील दी गई कि कथित प्रार्थना कार्यक्रम उनके कार्यकाल के दौरान नहीं हुए और वह उन गतिविधियों के समय स्कूल में मौजूद नहीं थे। शिक्षक ने निलंबन को उनके खिलाफ अत्यधिक कठोर कार्रवाई बताया।

सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

राज्य सरकार की ओर से शिक्षक की दलीलों का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने कहा कि उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार शिक्षक उस समय स्कूल में मौजूद थे, जब छात्रों के इस्लामिक प्रार्थना करने की बात सामने आई थी।

सरकार की ओर से छात्रों की यूनिफॉर्म से संबंधित आरोपों का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर दोनों पक्षों के दावों की अंतिम सत्यता तय करने से इनकार किया।

3 सितंबर को जारी हुई थी चार्जशीट

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है और शिक्षक को 3 सितंबर 2026 की चार्जशीट दी जा चुकी है।

सरकारी पक्ष ने कुछ ऐसे रिकॉर्ड का भी हवाला दिया, जिनके मुताबिक शिक्षक को कथित प्रार्थना कार्यक्रमों के दौरान मौजूद बताया गया। शिक्षक की ओर से इन रिकॉर्ड की व्याख्या पर आपत्ति जताते हुए मेडिकल रिकॉर्ड और स्वीकृत छुट्टी से जुड़े दस्तावेजों का हवाला दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर आरोपों के गुण-दोष पर फैसला करना उचित नहीं होगा। शिक्षक को विभागीय जांच के दौरान अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज पेश करने का पूरा अवसर मिलेगा।

अदालत ने निर्देश दिया कि विभागीय जांच को कानून के अनुसार जल्द से जल्द पूरा किया जाए और संभव हो तो 15 दिनों के भीतर इसे समाप्त किया जाए।

जांच पूरी होने तक निलंबन पर रोक

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विभागीय जांच पूरी होने तक शिक्षक का निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। यानी फिलहाल शिक्षक को निलंबन से अंतरिम राहत मिली है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने शिक्षक को आरोपों से बरी कर दिया है। जांच के अंतिम परिणाम के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी।

शिक्षक को दस्तावेज देने का भी निर्देश

अदालत ने शिक्षक को विभागीय जांच में अपना बचाव रखने का अवसर देने पर भी जोर दिया है। संबंधित दस्तावेजों और उनके बचाव में पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड को जांच प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

शिक्षक मेडिकल रिकॉर्ड, स्वीकृत छुट्टी और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष रख सकते हैं, जबकि विभाग अपने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध रिकॉर्ड पेश करेगा।

कोर्ट के आदेश का मतलब क्या है?

इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक राहत से जुड़ा है। अदालत ने न तो शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही माना है और न ही उन्हें गलत घोषित किया है।

फिलहाल विभागीय जांच जारी रहेगी और उसी प्रक्रिया में दोनों पक्षों के दस्तावेज तथा दलीलों पर विचार किया जाएगा। जांच के निष्कर्ष के बाद ही शिक्षक के खिलाफ आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

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