अलीगढ़: थानों में शिकायत दर्ज कराने के बाद लंबे समय तक कार्रवाई का इंतजार करने वाले लोगों के लिए अलीगढ़ पुलिस का ‘वन डे-वन प्रॉब्लम’ अभियान चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक, अभियान के तहत जिले के 31 थानों में करीब एक महीने के दौरान मिले 1320 प्रार्थना पत्रों का उसी दिन निस्तारण किया गया। पुलिस ने बताया कि इन मामलों में पेंडेंसी शून्य रही।
इस अभियान का उद्देश्य छोटे-छोटे विवादों को लंबे समय तक चलने से रोकना और उन्हें बड़ा अपराध या गंभीर रंजिश बनने से पहले ही सुलझाना है। पुलिस ने कई मामलों में दोनों पक्षों को थाने बुलाकर काउंसलिंग की, जबकि जरूरत के अनुसार मुकदमा दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी अपनाया।
1320 मामलों का एक दिन में हुआ निस्तारण
अलीगढ़ पुलिस के अनुसार, ‘वन डे-वन प्रॉब्लम’ अभियान के तहत अब तक 1320 शिकायतों का उसी दिन समाधान किया गया है। इनमें 800 से अधिक मामलों में दोनों पक्षों के बीच समझौता और काउंसलिंग कराई गई।
वहीं करीब 300 मामलों में उसी दिन मुकदमा दर्ज किया गया। इसके अलावा 200 से अधिक मामलों में विवाद को आगे बढ़ने से रोकने के लिए दोनों पक्षों को शांतिभंग की कार्रवाई के तहत पाबंद किया गया।
पुलिस के अनुसार, बड़ी संख्या में शिकायतें जमीन के बंटवारे, नाली, चकरोड, दीवार और रास्ते जैसे स्थानीय विवादों से जुड़ी थीं। ऐसे विवाद कई बार लंबे समय तक चलने के बाद गंभीर झगड़े का रूप ले लेते हैं।
क्वार्सी थाने में सबसे ज्यादा शिकायतों का निस्तारण
अभियान के आंकड़ों में क्वार्सी थाना सबसे आगे रहा। यहां 147 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए और पुलिस के मुताबिक सभी 147 मामलों का उसी दिन निस्तारण किया गया।
इसके बाद बन्नादेवी थाने में 95 मामलों का निपटारा हुआ। अन्य थानों में रोरावर में 87, सिविल लाइन में 69, सासनीगेट में 64, गांधीपार्क में 62, देहलीगेट में 56 और कोतवाली में 49 मामलों का उसी दिन समाधान किया गया।
देहात क्षेत्र में भी अभियान के तहत बड़ी संख्या में शिकायतों का निस्तारण हुआ। अकराबाद में 71, हरदुआगंज में 69, खैर में 57 और गोंडा में 49 मामलों का समाधान किया गया।
कैसे काम करता है ‘वन डे-वन प्रॉब्लम’ सिस्टम?
इस अभियान में उन शिकायतों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनका समाधान एक दिन के भीतर किया जा सकता है। पुलिस कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान ऐसे प्रार्थना पत्रों को चिह्नित किया जाता है।
इन शिकायतों पर ओडीओपी यानी वन डे-वन प्रॉब्लम की अलग पहचान लगाकर संबंधित थाने भेजा जाता है। इसके बाद थाना प्रभारी की जिम्मेदारी होती है कि पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचकर मामले की जांच करे और संभव हो तो उसी दिन विवाद का समाधान कराए।
निस्तारण के बाद संबंधित थाने की ओर से इसकी रिपोर्ट भी भेजी जाती है। इस तरह शिकायत को लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
एसएसपी ने बताया अभियान का उद्देश्य
अलीगढ़ के एसएसपी नीरज जादौन के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि छोटे विवाद अगर समय रहते नहीं सुलझते हैं तो वे आगे चलकर बड़े अपराध का कारण बन सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि जहां आपसी सहमति से मामला सुलझ सकता है, वहां काउंसलिंग और समझौते का प्रयास किया जा रहा है। वहीं जिन मामलों में कानूनी कार्रवाई जरूरी है, उनमें तत्काल मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
छोटे विवादों को बड़ा बनने से रोकने पर जोर
अलीगढ़ पुलिस के इस अभियान में जमीन, रास्ते, नाली और दीवार जैसे स्थानीय विवाद बड़ी संख्या में सामने आए हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक विवाद चल सकता है।
पुलिस का जोर ऐसे मामलों में शुरुआती स्तर पर हस्तक्षेप करने पर है, ताकि विवाद बढ़कर मारपीट, गंभीर आपराधिक घटना या लंबे समय की रंजिश में न बदल जाए।
FAQ
1. अलीगढ़ पुलिस का वन डे-वन प्रॉब्लम अभियान क्या है?
यह ऐसा अभियान है जिसमें एक दिन के भीतर समाधान किए जा सकने वाले प्रार्थना पत्रों को प्राथमिकता देकर उसी दिन कार्रवाई और निस्तारण का प्रयास किया जाता है।
2. अभियान के तहत कितने मामलों का निस्तारण हुआ?
पुलिस के अनुसार अब तक 1320 प्रार्थना पत्रों का उसी दिन निस्तारण किया गया है।
3. सबसे ज्यादा मामलों का निस्तारण किस थाने में हुआ?
क्वार्सी थाने में 147 प्रार्थना पत्र आए और पुलिस के अनुसार सभी का उसी दिन निस्तारण किया गया।
4. किन तरह के विवाद सबसे ज्यादा सामने आए?
जमीन के बंटवारे, नाली, चकरोड, दीवार और रास्ते से जुड़े आपसी विवाद बड़ी संख्या में सामने आए।
5. क्या सभी मामलों में समझौता कराया गया?
नहीं। पुलिस के अनुसार 800 से अधिक मामलों में काउंसलिंग और आपसी समाधान कराया गया, जबकि करीब 300 मामलों में उसी दिन मुकदमा दर्ज किया गया।