Wednesday, 02 September 2026

Ankit Baliyan Encounter: शूटरों के एनकाउंटर पर गरमाई यूपी की सियासत, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

अंकित बालियान हत्याकांड के दो कथित शूटरों के एनकाउंटर के बाद यूपी में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक विवाद का प्रतीकात्मक दृश्य।

लखनऊ/शामली: हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में दो कथित शूटरों के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। एक तरफ बीजेपी और प्रदेश सरकार पुलिस कार्रवाई को अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। Aaj Tak के मुताबिक, इस मामले में अपराध के साथ-साथ जाति और गोत्र को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है।

क्या है पूरा मामला?

अंकित बालियान की 26 अगस्त 2026 को शामली में जिम से बाहर निकलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, हमलावर दो बाइकों पर आए थे और उन्होंने अंकित पर कई राउंड फायरिंग की थी। जांच के दौरान पुलिस ने चार कथित शूटरों की पहचान की।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से पहले अंकित की रेकी की गई थी। पुलिस के मुताबिक, दो संदिग्ध 20-21 अगस्त को शामली पहुंचे थे और सूर्या होटल में रुके थे। होटल की CCTV फुटेज को जांच में अहम सुराग बताया गया।

दो कथित शूटर एनकाउंटर में मारे गए

31 अगस्त की सुबह शामली में पुलिस और STF की संयुक्त कार्रवाई के दौरान सुमित और मोहित नाम के दो कथित शूटरों के साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, दोनों ने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वे घायल हुए और अस्पताल में उनकी मौत हो गई। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस ने मौके से हथियार, कारतूस, बाइक, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद करने का दावा किया है। मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

एनकाउंटर के बाद अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

एनकाउंटर के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि किन परिस्थितियों में एनकाउंटर हुआ, इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपियों को अदालत के जरिए सजा देने की व्यवस्था होने के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी कि एनकाउंटर करना पड़ा।

Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और इसे व्यापक राजनीतिक बहस से जोड़ दिया। इस विवाद का एक हिस्सा जाति और गोत्र के संदर्भ को लेकर भी सामने आया।

सपा का सवाल- पहले हत्या क्यों नहीं रोकी गई?

सपा की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि पुलिस को अगर आरोपियों की गतिविधियों की जानकारी बाद में मिल सकती है, तो हत्या होने से पहले उन्हें क्यों नहीं रोका गया।

पार्टी ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराध होने के बाद कार्रवाई के बजाय ऐसी घटनाओं को पहले रोकना पुलिस और सरकार की जिम्मेदारी है।

बीजेपी ने किया पुलिस कार्रवाई का बचाव

वहीं बीजेपी नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि अंकित बालियान की हत्या करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की और पुलिस पर हमला करने वालों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने वाली कार्रवाई बताया।

बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि योगी सरकार की नीति अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की है।

“अपराधी की जाति नहीं होती”- बीजेपी

एनकाउंटर पर उठ रहे जातिगत सवालों के बीच बीजेपी नेताओं ने विपक्ष पर जाति की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

बीजेपी की ओर से कहा गया कि पुलिस की कार्रवाई आरोपी के अपराध के आधार पर हुई है, उसकी जाति के आधार पर नहीं। मंत्री संजय निषाद और अन्य बीजेपी नेताओं ने भी कहा कि अपराधी किसी भी जाति या वर्ग का हो, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

पुलिस ने क्या बताया?

उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, अंकित बालियान हत्याकांड कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी। जांच में हत्या से पहले रेकी किए जाने की बात सामने आई है।

DGP की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पुलिस और STF की कई टीमें लगातार आरोपियों की तलाश कर रही थीं। अब तक की जांच में चार शूटरों के अलावा दो अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या की कथित साजिश किसने रची और शूटरों को किसने मदद या निर्देश दिए।

गोगी गैंग कनेक्शन की भी जांच

पुलिस की जांच में दोनों मारे गए आरोपियों को गोगी गैंग से जुड़ा बताया गया है। हत्या के बाद सोशल मीडिया पर भी गैंग से संबंधित एक कथित पोस्ट सामने आई थी। पुलिस इस एंगल की जांच कर रही है।

हालांकि गैंग से जुड़े दावों और हत्या के पूरे मकसद की जांच अभी जारी है। इसलिए किसी भी सोशल मीडिया दावे को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

अंकित के परिवार ने एनकाउंटर का समर्थन किया

जहां विपक्षी नेताओं ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए, वहीं अंकित बालियान के परिवार ने पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है।

अंकित के पिता सत्यवीर सिंह बालियान ने कहा कि एनकाउंटर फर्जी नहीं था और उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर भरोसा जताया। उन्होंने बाकी आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

अंकित की पत्नी सीमा ने भी विपक्षी नेताओं के बयानों पर नाराजगी जताई और कहा कि परिवार का घर उजड़ गया है, इसलिए इस मामले को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

अब सियासी बहस का केंद्र क्या है?

इस पूरे विवाद में अब तीन बड़े सवाल सामने हैं:

पहला, क्या पुलिस ने मुठभेड़ में मारे गए दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नियमानुसार की?

दूसरा, हत्या की पूरी साजिश के पीछे कौन था और बाकी आरोपी कब पकड़े जाएंगे?

तीसरा, क्या इस मामले को जाति और गोत्र के राजनीतिक चश्मे से देखा जाना चाहिए या इसे केवल कानून-व्यवस्था और गैंगवार से जुड़े अपराध के रूप में जांचा जाना चाहिए?

इन सवालों पर बीजेपी और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी आगे भी तेज होने की संभावना है।

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