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पुलिस का दावा- पुराने विवाद और रंजिश की जानकारी जुटाकर बनाते थे दबाव, समझौते के नाम पर मांगते थे रुपये

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
8 September 2026 11:48 AM 1 मिनट पठन 6135 Views
पुलिस का दावा- पुराने विवाद और रंजिश की जानकारी जुटाकर बनाते थे दबाव, समझौते के नाम पर मांगते थे रुपये

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने ऐसे कथित गिरोह का खुलासा किया है, जो लोगों के पुराने विवाद, पारिवारिक तनाव और आपसी रंजिश से जुड़ी जानकारी जुटाकर उन्हें दबाव में लेने की कोशिश करता था। पुलिस के अनुसार, इसके बाद संबंधित व्यक्ति को मुकदमे में फंसाने का डर दिखाया जाता और समझौता कराने या मुकदमा वापस लेने के नाम पर पैसों की मांग की जाती थी। मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, अगर सामने वाला उनकी मांग मान लेता था तो मामला समझौते तक सीमित रखने की कोशिश की जाती थी। लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराने का दबाव बनाने का आरोप है।

शिकायत के बाद सामने आया पूरा मामला

मामला तब पुलिस के संज्ञान में आया जब बिजनौर की उमर कॉलोनी निवासी मोहम्मद अहसान ने 6 सितंबर 2026 को कोतवाली शहर थाने में शिकायत दी।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ लोग उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे थे और मुकदमा वापस कराने के नाम पर रुपये मांग रहे थे।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसके बाद SWAT/सर्विलांस टीम और कोतवाली शहर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 7 सितंबर को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।


जुल्फेकार को गिरोह का कथित संचालक बताया

पुलिस की अब तक की जांच में जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा को कथित गिरोह का संचालक बताया गया है।

पुलिस के अनुसार उसके साथ अफजाल, गुड्डी, कुन्ती और प्रीति समेत अन्य लोगों के जुड़े होने की जानकारी मिली है।

आरोप है कि गिरोह के सदस्य ऐसे लोगों को तलाशते थे जिनका किसी व्यक्ति या परिवार से विवाद चल रहा हो अथवा जिनकी पुरानी रंजिश हो। इसके बाद उस जानकारी का इस्तेमाल कथित तौर पर संबंधित व्यक्ति पर दबाव बनाने के लिए किया जाता था।


पहले जानकारी जुटाते, फिर शुरू होता था दबाव

पुलिस का दावा है कि कथित गिरोह की कार्यप्रणाली में सबसे पहले किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटाना शामिल था।

किससे विवाद है, परिवार में किससे तनाव है, पुरानी रंजिश क्या है और पहले कोई मुकदमा हुआ है या नहीं—इस तरह की जानकारी हासिल करने के बाद संबंधित व्यक्ति को डराने का आरोप है।

इसके बाद उसे मुकदमे में फंसाने या पुराने मामले को फिर से उठाने का डर दिखाया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, इसी दबाव के बीच समझौते अथवा मुकदमा वापस कराने के नाम पर रकम मांगे जाने का आरोप सामने आया है।


मांग नहीं मानी तो गंभीर धाराओं में केस का दबाव

पुलिस का आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति पैसे देने या कथित समझौते के लिए तैयार नहीं होता था तो उस पर और अधिक दबाव बनाया जाता था।

जांच में पुलिस ने दावा किया कि कुछ मामलों में गंभीर प्रकृति की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कराने अथवा अदालत में परिवाद दाखिल कराने की कोशिश की गई।

पुलिस के अनुसार इन मामलों में बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं से जुड़े प्रकरणों की जानकारी भी सामने आई है।

हालांकि, इन अलग-अलग मामलों में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, यह संबंधित मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा। केवल मुकदमा दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है।


महिलाओं के जरिए शिकायत कराने का भी आरोप

पुलिस की जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कथित गिरोह से जुड़ी महिलाओं और अन्य सहयोगियों का इस्तेमाल कुछ मामलों में शिकायत या न्यायालयी परिवाद दाखिल कराने के लिए किया जाता था।

पुलिस अब ऐसे मामलों का रिकॉर्ड खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार आरोपियों की कोई भूमिका या आपसी कनेक्शन था या नहीं।

अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और उपलब्ध दस्तावेजों तथा शिकायतों की भी जांच की जा रही है।

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