Wednesday, 09 September 2026
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UP Mission 2027: हारी हुई सीटों पर BJP का फोकस, तावड़े-नितिन नवीन-BL संतोष संभालेंगे मोर्चा

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
9 September 2026 11:16 AM 1 मिनट पठन 306 Views
UP Mission 2027: हारी हुई सीटों पर BJP का फोकस, तावड़े-नितिन नवीन-BL संतोष संभालेंगे मोर्चा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन बीजेपी ने उन सीटों पर विशेष रणनीति बनानी शुरू कर दी है जहां पार्टी को 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा था। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब खुद यूपी में उतरकर संगठन, जमीनी फीडबैक और सामाजिक समीकरणों की समीक्षा करने जा रहा है।

बीजेपी के इस मिशन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं के अलग-अलग क्षेत्रों में दौरे और बैठकें पार्टी की 2027 की रणनीति का हिस्सा हैं।

2022 में हारी सीटों पर BJP का खास फोकस

बीजेपी की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा उन सीटों की पहचान और समीक्षा करना है, जहां पार्टी कमजोर रही है। पार्टी संगठन को 2022 में गंवाई सीटों के साथ-साथ एनडीए की कमजोर सीटों पर भी बूथ स्तर तक समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

पार्टी यह जानने की कोशिश कर रही है कि किन इलाकों में संगठन कमजोर है, किन बूथों पर वोट ट्रांसफर नहीं हो पाया और किन सामाजिक समूहों के बीच बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है। इसके आधार पर आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति बनाई जाएगी।

इससे पहले बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर आंतरिक सर्वे की प्रक्रिया भी शुरू की थी। पार्टी का विशेष ध्यान लगातार कमजोर प्रदर्शन वाली सीटों पर बताया गया था।

नितिन नवीन संभालेंगे पश्चिमी यूपी का मोर्चा

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन अपने यूपी दौरे की शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनका दौरा 12 और 13 सितंबर को मेरठ से शुरू होगा।

इस दौरान संगठन और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक के अलावा संघ पदाधिकारियों के साथ समन्वय पर भी चर्चा होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी बीजेपी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां जातीय समीकरण, किसान राजनीति और क्षेत्रीय सामाजिक समूह चुनावी नतीजों पर बड़ा प्रभाव डालते हैं।

नितिन नवीन का लक्ष्य उन सीटों पर संगठन को मजबूत करना है जहां पिछले चुनावों में बीजेपी को नुकसान हुआ था। पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को भी विधानसभा स्तर पर समझने की कोशिश करेगी।

बी.एल. संतोष की नजर अवध और कानपुर क्षेत्र पर

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष का फोकस अवध और कानपुर क्षेत्र के संगठन पर रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार उनका लखनऊ दौरा 10 और 11 सितंबर को प्रस्तावित है।

वे दोनों क्षेत्रों के पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन की स्थिति की समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के साथ उनकी मुलाकात भी संभावित बताई गई है।

अवध क्षेत्र बीजेपी के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को यहां कई सीटों पर नुकसान हुआ था। ऐसे में संगठनात्मक कमजोरी, स्थानीय नाराजगी और सामाजिक समीकरणों को समझना बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है।

विनोद तावड़े की रणनीति: बूथ से लेकर जातीय समीकरण तक

यूपी प्रभारी विनोद तावड़े पहले ही राज्य का दौरा कर चुके हैं और उन्होंने संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया है।

तावड़े ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि प्रत्येक बूथ की स्थिति का बारीकी से आकलन किया जाए। जहां पार्टी कमजोर है, वहां विशेष कार्ययोजना बनाकर संगठन को मजबूत किया जाए।

इसके साथ ही बीजेपी की रणनीति में सामाजिक समीकरण को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। पार्टी का संदेश है कि कोई भी जातीय या सामाजिक समूह उसकी पहुंच से बाहर नहीं रहना चाहिए। संख्या कम होने के बावजूद छोटे सामाजिक समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

SP के PDA के मुकाबले BJP की सोशल इंजीनियरिंग

2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को बीजेपी एक बड़ी चुनौती के तौर पर देख रही है।

इसी वजह से बीजेपी अपनी सोशल इंजीनियरिंग को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति में अलग-अलग जातियों और सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने के साथ स्थानीय मुद्दों को चुनावी नैरेटिव में शामिल करना भी शामिल है।

बीजेपी की कोशिश है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जिन सामाजिक समीकरणों के कारण पार्टी को नुकसान हुआ, उन्हें विधानसभा चुनाव से पहले दोबारा साधा जाए।

2024 के लोकसभा चुनाव ने बढ़ाई BJP की चिंता

उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बीजेपी के लिए नई चुनौती खड़ी की थी। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में बीजेपी की सीट संख्या 62 से घटकर 33 रह गई, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतीं और कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं।

इन नतीजों के बाद बीजेपी ने विधानसभा स्तर पर यह समझने की कोशिश शुरू की कि किन क्षेत्रों में उसका वोट आधार कमजोर हुआ और किन सामाजिक समूहों ने विपक्ष का साथ दिया।

इसी पृष्ठभूमि में 2027 के लिए पार्टी ने अभी से जमीनी तैयारी शुरू कर दी है।

2027 के लिए BJP का ‘ग्राउंड रिव्यू’

बीजेपी के शीर्ष नेताओं के अलग-अलग दौरे का मुख्य उद्देश्य केवल संगठनात्मक बैठकें करना नहीं है। पार्टी 2022 और 2024 में कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से सीधा ग्राउंड फीडबैक लेने की कोशिश कर रही है।

इसमें स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों से जानकारी लेना शामिल है। उम्मीदवारों की स्थिति, स्थानीय नाराजगी, जातीय समीकरण और बूथ स्तर की मजबूती जैसे मुद्दों पर भी फीडबैक जुटाया जा रहा है।

NDA सहयोगियों के साथ भी बनेगा तालमेल

बीजेपी की रणनीति में एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। जिन सीटों पर सहयोगी दलों की मजबूत पकड़ है, वहां सामाजिक समीकरण और सीटों की दावेदारी को लेकर भी चर्चा की जाएगी।

यानी 2027 के चुनाव में बीजेपी सिर्फ अपने संगठन पर निर्भर रहने के बजाय गठबंधन के समीकरण को भी मजबूत करने की कोशिश करेगी।

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