बदायूं के सहसवान कोतवाली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। यहां एक सिपाही को डीसीएम से कुचलने की कोशिश की गई। आरोप है कि इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने इस मामले को कई घंटों तक दबाए रखा। वीडियो सामने आने और अफसरों तक बात पहुंचने के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई। सहसवान के तकिया मोहल्ले में लगने वाली पशु बाजार में पहले भी वाहनों में पशुओं को क्रूरता से लादने की शिकायतें आती रही हैं। 6 सितंबर को इसी बाजार में पशु क्रूरता के मामले में दरोगा बलवीर सिंह और एक सिपाही को निलंबित किया गया था। इसके बावजूद गुरुवार को फिर वैसी ही घटना सामने आई। बाजार में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी निगरानी करने के बजाय पशु कारोबारियों के साथ मिले हुए थे। इसी दौरान पशुओं से भरी एक डीसीएम को रोकने पर चालक ने सिपाही को कुचलने की कोशिश की। 6 सितंबर की कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि बाजार में पशु क्रूरता पर पुलिस की निगरानी सख्त होगी, लेकिन गुरुवार की घटना ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिसकर्मी मौके पर तैनात थे, तब पशुओं को किस तरह डीसीएम में लादा जा रहा था। घटना के बाद भी कई घंटों तक अफसरों को जानकारी न देना मामले को और गंभीर बनाता है। पशु प्रेमी विकेंद्र शर्मा ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, डीजीपी, डीआईजी बरेली रेंज और एसएसपी बदायूं से ईमेल के जरिए की है। उन्होंने बाजार संचालक और सिपाही को कुचलने की कोशिश करने वाले डीसीएम चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही बाजार की एनओसी रद्द करने की मांग भी उठाई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद कोतवाल का चालक के प्रति कथित नरम रवैया और उसके घबराए हुए बयान से दोनों के बीच संपर्क होने की आशंका पैदा होती है।
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