Deoria News: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में कथित अवैध हिरासत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामला गौरी बाजार थाने का है, जहां चार लोगों को करीब 10 दिनों तक कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान थाने की CCTV रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने पर कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से तीखे सवाल किए। अदालत ने चारों याचियों को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया और इस रकम को संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के वेतन से वसूलने का आदेश दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला महेंद्र गौर और तीन अन्य लोगों की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। याचियों की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें देवरिया के गौरी बाजार थाने में 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था।
हाईकोर्ट ने मामले की सच्चाई जानने के लिए थाने की CCTV रिकॉर्डिंग पेश करने को कहा था, क्योंकि फुटेज से यह स्पष्ट हो सकता था कि संबंधित लोग थाने में कब और कितनी देर तक मौजूद रहे।
CCTV खराब होने के जवाब से कोर्ट नाराज
पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित अवधि की CCTV रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है क्योंकि थाने का CCTV सिस्टम खराब था।
इस जवाब के बाद हाईकोर्ट ने देवरिया के SP और संबंधित SHO को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान अधिकारियों से पूछा गया कि अगर CCTV सिस्टम खराब था तो इसकी जानकारी और मरम्मत से जुड़ी प्रक्रिया का रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, SHO ने बताया कि CCTV सिस्टम में खराबी 12 अप्रैल को आई थी। कोर्ट ने पूछा कि क्या इस खराबी को लेकर जनरल डायरी यानी GD में कोई एंट्री की गई थी। बताया गया कि ऐसी कोई GD एंट्री नहीं की गई थी।
SP और SHO से कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक से भी सवाल किए। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि CCTV व्यवस्था में हुई इस लापरवाही के लिए संबंधित SHO के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
अदालत ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि संबंधित अधिकारी को निलंबित किया गया या नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि थाने की निगरानी व्यवस्था और रिकॉर्ड को लेकर लापरवाही को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
SP ने कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी
मामले की सुनवाई के दौरान देवरिया के SP ने अदालत से बिना शर्त माफी भी मांगी। हालांकि, कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि माफी केवल अदालत से मांगने के बजाय उन लोगों से मांगी जानी चाहिए, जिन्हें कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा गया था।
चार याचियों को मिलेगा ₹65 हजार मुआवजा
हाईकोर्ट ने मामले में चारों याचियों को राहत देते हुए मुआवजे का आदेश दिया है।
- दूसरे, तीसरे और चौथे याची को ₹20,000-₹20,000
- पहले याची को ₹5,000
- कुल मुआवजा: ₹65,000
अदालत ने निर्देश दिया कि यह रकम संबंधित SHO के वेतन से वसूल की जाए।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस मामले ने थानों में CCTV व्यवस्था, रिकॉर्ड रखने और पुलिस हिरासत में रखे गए लोगों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CCTV कैमरे पुलिस स्टेशनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
ऐसे में किसी गंभीर मामले में CCTV फुटेज उपलब्ध न होना और सिस्टम खराब होने की जानकारी का उचित रिकॉर्ड नहीं होना अदालत के लिए चिंता का विषय बना।
आगे भी जारी रहेगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है और संबंधित SP को आगे की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है। अब यह देखा जाएगा कि कथित हिरासत और CCTV व्यवस्था में हुई लापरवाही को लेकर पुलिस विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।