Tuesday, 15 September 2026
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शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों पर खपाते थे नकली सिक्के, ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क

dbnadmin
DBN विशेष संवाददाता
14 September 2026 11:48 AM 1 मिनट पठन 836 Views
शराब ठेकों, टोल प्लाजा और किराना दुकानों पर खपाते थे नकली सिक्के, ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली कथित फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद पुलिस की जांच में इस नेटवर्क को बाजार में खपाने के तरीके का भी पता चला है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह तैयार नकली सिक्कों को सीधे बाजार में उतारने के बजाय एजेंटों के जरिए अलग-अलग दुकानों और प्रतिष्ठानों तक पहुंचाता था। शराब के ठेके, टोल प्लाजा और किराना दुकानें इसके प्रमुख निशाने पर थीं।

शराब के ठेकों को बनाया गया था प्रमुख निशाना

पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, नकली सिक्कों को खपाने के लिए ऐसे स्थान चुने जाते थे जहां रोजाना बड़ी मात्रा में नकदी का लेनदेन होता है। इनमें शराब के ठेके, टोल प्लाजा और किराना दुकानें शामिल थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शराब के ठेकों को गिरोह की प्राथमिकता में रखा गया था। यहां बड़ी संख्या में ग्राहक छोटे-बड़े नोट और सिक्कों में भुगतान करते हैं, जिससे कथित तौर पर नकली सिक्कों को असली मुद्रा के बीच चलाना आसान हो सकता था।

एजेंटों के जरिए बाजार में पहुंचते थे सिक्के

पुलिस के अनुसार, गिरोह तैयार सिक्कों को खुद दुकानदारों तक पहुंचाने के बजाय एजेंटों का इस्तेमाल करता था। इन एजेंटों को 20 रुपये का नकली सिक्का करीब 12 से 15 रुपये में दिए जाने की बात सामने आई है।

इसके बाद एजेंट कमीशन के आधार पर इन्हें अलग-अलग दुकानों और प्रतिष्ठानों में चलाने का काम करते थे। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने एजेंट जुड़े थे और किन-किन इलाकों में नकली सिक्के पहुंचाए गए।

5-6 रुपये में तैयार होता था 20 रुपये का सिक्का

पुलिस की पूछताछ के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, एक नकली 20 रुपये का सिक्का तैयार करने में करीब 5 से 6 रुपये खर्च होते थे। इसके बाद इसे एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेच दिया जाता था।

इस तरह उत्पादन लागत और बिक्री कीमत के बीच अंतर से गिरोह को मुनाफा होता था। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के कारण कथित तौर पर यह कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया।

छह मशीनों से रोज बनते थे हजारों सिक्के

पुलिस के मुताबिक, सहारनपुर में चल रही कथित फैक्ट्री में छह मशीनों की मदद से प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार किए जा रहे थे।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 6,400 तैयार सिक्के बरामद किए। इसके अलावा लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के अधबने सिक्के भी मिलने की जानकारी दी गई है।

70 करोड़ से ज्यादा के सिक्के बाजार में खपाने का दावा

पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी दावा सामने आया है कि गिरोह अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चला चुका था।

हालांकि यह आंकड़ा पुलिस जांच में सामने आया दावा है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि और पूरे नेटवर्क की वास्तविक पहुंच का पता जांच आगे बढ़ने के बाद ही चल सकेगा।

सात रजिस्टर खोल सकते हैं पूरे नेटवर्क का राज

पुलिस ने आरोपियों के पास से सात रजिस्टर बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि इन रजिस्टरों में सिक्कों की सप्लाई, एजेंटों और लेनदेन से जुड़ा हिसाब-किताब दर्ज हो सकता है।

जांच एजेंसियां इन रिकॉर्ड्स की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली सिक्कों की सप्लाई किन शहरों और कारोबारियों तक हुई थी। साथ ही एजेंट नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान भी की जा रही है।

मुख्य आरोपी का पुराना इतिहास भी सामने आया

पुलिस के अनुसार, इस मामले के मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह का नकली सिक्कों से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे गिरफ्तार किया था और उस समय उसके पास से नकली सिक्के बरामद किए गए थे।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी ने 1990 के दशक के दौरान नकली सिक्के बनाने का तरीका सीखा था। जेल से बाहर आने के बाद उसने कथित तौर पर अपना नेटवर्क आगे बढ़ाया और बाद में सहारनपुर में नया ठिकाना बनाया।

नेपाल तक नेटवर्क फैलाने का भी दावा

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए नेपाल गया था। पुलिस के अनुसार, पुराने मामलों की जांच में दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में नकली सिक्कों से जुड़े ठिकानों की जानकारी सामने आई थी।

अब सहारनपुर मामले में जांच एजेंसियां पुराने संपर्कों और मौजूदा नेटवर्क के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्या?

सहारनपुर में फैक्ट्री का पता चलने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिक्कों की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाना है। खास तौर पर यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि कितने एजेंटों ने नकली सिक्के लिए, किन बाजारों में इन्हें चलाया गया और अब तक कितनी नकली मुद्रा आम लोगों तक पहुंच चुकी है।

सात रजिस्टर, मोबाइल फोन और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी जांच को आगे बढ़ाने में अहम साबित हो सकती है।

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